Moong Vs Arhar Vs Chana Dal: अरहर, चना या मूंग...कौन सी दाल अधिक पौष्टिक? किसमें अधिक प्रोटीन

अरहर, चना और मूंग तीनों ही प्रोटीन के खजाने हैं. जहां मूंग दाल पेट के लिए सबसे हल्की और पचने वाली है वहीं चना दाल अपनी हाई प्रोटीन वैल्यू के लिए जानी जाती है. अरहर दाल रोजाना के पोषण का बेस्ट सोर्स है. अपनी सेहत की जरूरत के हिसाब से सही चुनाव करें.

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आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:42 PM IST

Best dal for protein: भारतीय रसोई में दालें न सिर्फ स्वाद का हिस्सा हैं, बल्कि सेहत का पावरहाउस भी मानी जाती हैं. प्रोटीन की बात आते ही अरहर, चना और मूंग की दाल सबसे पहले याद में आती हैं लेकिन अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि इनमें से कौन सी दाल ज्यादा फायदेमंद है? यदि आप भी अपनी डाइट में बेस्ट प्रोटीन सोर्स चुनना चाहते हैं तो यह समझना जरूरी है कि हर दाल अपनी जगह खास है. आज हम इन तीनों दालों की न्यूट्रिशनल प्रोफाइल और उनकी खासियत के बारे में जानते हैं.

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अरहर, चना और मूंग: प्रोटीन का गणित

प्रोटीन की मात्रा को लेकर अक्सर भ्रम होता है. कच्ची दाल में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा दिखती है, लेकिन पकने के बाद पानी सोखने के कारण यह कम हो जाती है.

100 ग्राम कच्ची दालों के पोषण का हिसाब देखें तो तीनों की अपनी अलग खासियत है. अरहर दाल में लगभग 21-22 ग्राम प्रोटीन और काफी मात्रा में फोलेट मिलता है जो इसे रोजमर्रा के लिए बेहतरीन बनाता है. चना दाल की बात करें तो इसमें लगभग 22-23 ग्राम प्रोटीन के साथ फाइबर की मात्रा काफी अच्छी होती है, जो इसे पेट भरने के लिहाज से बेस्ट बनाती है. 

छिलके वाली मूंग दाल में लगभग 20-21 ग्राम प्रोटीन होता है लेकिन इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसका फाइबर और जल्दी पचने वाला नेचर है. अगर आप सिर्फ प्रोटीन पर फोकस कर रहे हैं तो चना दाल थोड़ा आगे है, लेकिन ओवरऑल न्यूट्रिशन और डाइजेशन के लिए मूंग दाल सबसे हल्का और बढ़िया ऑपशन माना जाता है.

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मूंग दाल: पचने में सबसे आसान

मूंग दाल काफी आसानी से पच जाती है क्योंकि ये फाइबर से भरपूर होती है. लेकिन इसके फाइबर को लेकर एक जरूरी अंतर समझना जरूरी है. वैसे तो फाइबर खाना पचाने की प्रक्रिया को धीमा करता है लेकिन मूंग दाल का फाइबर बाकी दालों की तुलना में काफी अलग होता है. 

इसमें सॉल्यूबल फाइबर ज्यादा होता है जो आसानी से पानी में घुल जाता है इसलिए यह पेट में भारीपन या गैस पैदा किए बिना बहुत जल्दी पच जाती है. यही कारण है कि जिन लोगों को एसिडिटी की समस्या होती है या जो लोग रिकवरी फेज में होते हैं उनके लिए यह बेस्ट ऑप्शन है. डॉक्टर भी मूंग दाल की खिचड़ी या सूप की सलाह इसलिए देते हैं क्योंकि यह बिना पेट पर लोड डाले पूरा पोषण दे देती है.

अरहर (तूअर) दाल: डेली मील का परफेक्ट बैलेंस

अरहर दाल भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है. यह स्वाद और पोषण का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन है. यह फाइबर और प्रोटीन का एक विश्वसनीय सोर्स है. अरहर दाल रोजमर्रा के खाने के लिए सबसे संतुलित दाल है, जो प्रोटीन के साथ-साथ आपको लंबे समय तक ऊर्जा भी देती है.

चना दाल: प्रोटीन का पावरहाउस

अगर आप विशेष रूप से प्रोटीन की मात्रा पर ध्यान दे रहे हैं तो चना दाल को डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है. यह थोड़ी देर से पचती है लेकिन इसमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा काफी अच्छी होती है. चना दाल ब्लड शुगर लेवल को स्टेबल रखने और वजन को कंट्रोल करने में भी मदद करती है क्योंकि यह आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराती है.

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आपके लिए कौन सी दाल सही है?

अरहर दाल किसके लिए बेस्ट: उन लोगों के लिए जो कामकाजी हैं और जिन्हें दिन भर काम करने के लिए लगातार एनर्जी की जरूरत होती है. यह मीडियम गति से डाइजेस्ट होती है. न बहुत हल्की है और न बहुत भारी.

मूंग दाल किसके लिए बेस्ट: बीमार होने पर, वजन घटाने के दौरान (क्योंकि यह कैलोरी में हल्की है), या रात के खाने के लिए. यह शरीर को जल्दी एनर्जी देती है और आंतों पर कोई जोर नहीं डालती.

चना दाल किसके लिए बेस्ट: एथलीट्स, फिटनेस फ्रीक्स या वे लोग जो अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं. लेकिन ध्यान रखें इसे पचने में समय लगता है इसलिए इसे रात के खाने के बजाय दिन में खाना ज्यादा बेहतर होता है.

दालें अपने आप में कंप्लीट प्रोटीन नहीं होतीं इसलिए इन्हें चावल या रोटी के साथ मिलाकर खाना चाहिए ताकि आपको सभी जरूरी अमीनो एसिड मिल सकें. आप अपनी डाइट में इन तीनों को बदलकर इस्तेमाल करें ताकि आपको वैरायटी और पोषण दोनों मिलें.

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