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हेल्दी फूड

गेहूं पिसवाते समय क्यों मिलाते हैं काला चना? फायदे जान रोज खाएंगे इस आटे की रोटियां

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 24 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:27 PM IST
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भारत में गेहूं पिसवाते समय उसमें अलग-अलग चीजें मिलवाते थे, जिससे गेंहू की गुणवत्ता बढ़ जाती है. रागी, मक्का, बाजरा ही नहीं गेहूं में काला चना भी मिलवाया जाता है. गेहूं में थोड़ा काला चना मिलाने की परंपरा कोई नया ट्रेंड नहीं बल्कि पुराना देसी नुस्खा है, इसके कई चौंकाने वाले फायदे होते हैं, जिनके बारे में जानकर आप तुरंत ये नुस्खा आजमाएंगे.

(Photo:freepik)

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इस नुस्खे को आज फिर लोग सेहत और वजन कंट्रोल के लिए अपनाने लगे हैं, क्योंकि यह तरीका आटे की क्वालिटी बढ़ाने के साथ पोषण भी कई गुना बढ़ा देता है और शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देने में मदद करता है, इसलिए लोग इसे दोबारा आजमाने लगे हैं.
 

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काला चना प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जब इसे गेहूं के साथ पिसा जाता है तो आटे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम हो जाता है, जिससे रोटी खाने के बाद ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ती और पेट लंबे समय तक भरा रहता है, यही कारण है कि यह वजन घटाने वालों के लिए खास फायदेमंद माना जाता है.
 

(Photo: Getty Images)

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इस देसी आटे से बनी रोटियां खाने से बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है, क्योंकि काले चने में मौजूद फाइबर डाइजेशन को स्लो करता है और क्रेविंग्स पर कंट्रोल रखने में मदद करता है, जिससे लोग स्नैकिंग से बचते हैं और कुल कैलोरी इनटेक अपने आप कम हो जाता है.

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सिर्फ वजन ही नहीं, गेहूं और काले चने का मिक्चर मसल्स के लिए भी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें मौजूद प्रोटीन शरीर की मसल्स को मजबूत करता है. खासकर उन लोगों के लिए जो जिम नहीं जाते लेकिन रोजाना के काम में एक्टिव रहते हैं, उनके लिए यह देसी प्रोटीन सोर्स किसी सप्लीमेंट से कम नहीं है.

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आयुर्वेद और घरेलू अनुभव बताते हैं कि काला चना मिलाकर पिसा आटा डाइजेस्टिव सिस्टम को बेहतर बनाता है, कब्ज की समस्या कम करता है और गट को हेल्दी रखता है, जिससे मेटाबॉलिज्म सही रहता है और शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है. यही वजह है कि पहले के समय में यह आटा घर-घर में इस्तेमाल किया जाता था.

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अगर आप इस नुस्खे को आजमाना चाहते हैं तो अनुपात भी जरूरी है, आमतौर पर 5 किलो गेहूं में 500 ग्राम से 1 किलो तक काला चना मिलाया जाता है, इससे स्वाद में ज्यादा बदलाव नहीं आता और रोटियां भी नरम बनती हैं, साथ ही शरीर को अतिरिक्त पोषण मिलता है, जिसे लंबे समय तक नियमित रूप से खाया जा सकता है.

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डाइट एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि रिफाइंड फूड की जगह ऐसे मिक्चर देसी आटे का इस्तेमाल वजन कंट्रोल करने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह नेचुरल होता है. इसमें किसी तरह का प्रोसेस्ड एलिमेंट नहीं होता, जिससे शरीर को धीरे-धीरे लेकिन स्थायी फायदा मिलता है और अचानक कमजोरी या थकान महसूस नहीं होती.

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हालांकि सिर्फ काला चना मिला आटा खाने से ही वजन नहीं घटेगा, इसके साथ बैलेंस डाइट, पर्याप्त पानी, नियमित वॉक या हल्की एक्सरसाइज भी जरूरी है, लेकिन यह देसी नुस्खा आपकी रोजाना की थाली को हेल्दी बनाने में बड़ा रोल निभा सकता है और बिना ज्यादा मेहनत के लाइफस्टाइल सुधारने में मदद करता है.

Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट में किसी भी बदलाव से पहले हमेशा अपने डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या डायटीशियन से सलाह जरूर लें.


(Photo:freepik)

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