पेगासस पर SC में सुनवाई, सिब्बल बोले- ये निजता पर हमला, CJI ने पूछा- FIR क्यों नहीं करवाई?

पेगासस जासूसी मामले के मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक विपक्ष सरकार पर हमलावर है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले पर सुनवाई हुई. सर्वोच्च अदालत में इस मामले से जुड़ी कुल नौ याचिकाएं डाली गई हैं, जिनमें जांच की मांग की गई है.

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पेगासस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई (सांकेतिक तस्वीर) पेगासस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई (सांकेतिक तस्वीर)

नलिनी शर्मा / संजय शर्मा / अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 05 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 12:38 PM IST
  • पेगासस जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
  • जांच की अपील के लिए दाखिल हैं नौ याचिकाएं

पेगासस जासूसी मामले (Pegasus Snooping Case) के मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक विपक्ष सरकार पर हमलावर है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में भी इस मामले पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस (CJI) ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से सवाल किया कि इस मामले में आईटी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज क्यों नहीं करवाई गई है? सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि अगर आपको लगता है कि आपका फोन हैक हुआ है, तो फिर FIR दर्ज क्यों नहीं करवाई?

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चीफ जस्टिस ने सभी याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वह अपनी याचिका की कॉपी सरकार को भी भेजें. अब इस मामले में अगले हफ्ते सुनवाई होगी. कोर्ट की ओर से इस दौरान एमएल शर्मा को फटकार भी लगाई गई, जिन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य व्यक्तिगत लोगों के खिलाफ याचिका दायर की थी. अदालत ने कहा कि वह कोई फायदा उठाने की कोशिश ना करें.

'सिर्फ अखबारों के आधार पर दाखिल की याचिका'

याचिका दायर करने वाले वकील एमएल शर्मा को सुनवाई की शुरुआत में ही तंज का सामना करना पड़ा. चीफ जस्टिस ने अदालत में कहा कि वह पहले कपिल सिब्बल को सुनेंगे, क्योंकि एमएल शर्मा की याचिका सिर्फ अखबारों की कटिंग के आधार पर ही है. चीफ जस्टिस ने पूछा कि आपने याचिका दायर ही क्यों की है?

आपराधिक शिकायत दर्ज क्यों नहीं करवाई? : CJI

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वरिष्ठ पत्रकार एन. राम की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि पेगासस जैसा सॉफ्टवेयर एक व्यक्ति की प्राइवेसी पर हमला है और संविधान के नियमों के खिलाफ है. सिर्फ एक फोन के दम पर कोई भी हमारी ज़िंदगी में घुस सकता है, सबकुछ देख-सुन सकता है. चीफ जस्टिस ने कहा कि न्यूज रिपोर्ट में जो बताया गया है अगर वो सच है तो ये आरोप काफी सीरियस हैं. 

चीफ जस्टिस ने कहा कि ये मामला दो साल पहले आया था, अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है. ऐसे में याचिका में ठोस तरीके से तथ्यों को शामिल किया जाना चाहिए था. चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि अभी तक किसी ने भी इस मामले में आपराधिक शिकायत क्यों नहीं की, ये आईटी एक्ट के तहत की जा सकती थी. कपिल सिब्बल की ओर से जानकारी दी गई कि कैलिफॉर्निया की कोर्ट में व्हाट्सएप ने केस दर्ज किया है. हमने उसका फैसला भी याचिका में दिया है, ये सॉफ्टवेयर सिर्फ सरकारों को दिया जा सकता है किसी प्राइवेट कंपनी को नहीं.

'सरकार को देना चाहिए जवाब'

याचिकाकर्ता की ओर से कपिल सिब्बल ने मांग करते हुए कहा कि सरकार को जवाब देना चाहिए कि क्या उन्होंने ये सॉफ्टवेयर खरीदा और कहां पर इस्तेमाल किया. सरकार ने इस बात को माना है कि 121 स्पाइवेयर से प्रभावित यूज़र भारत में हैं. इस सॉफ्टवेयर को सिर्फ सरकारें ही खरीद सकती हैं, जिसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि एक राज्य सरकार भी सरकार ही है. कपिल सिब्बल ने कहा कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, ऐसे में सरकार को जवाब देना चाहिए. 

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चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि 2019 में भी ऐसी रिपोर्ट्स थीं, आप दो साल बाद अचानक क्यों आए. जिसपर कपिल सिब्बल ने जवाब दिया कि हाल ही में हुए खुलासों से ये सब पता चला है. इसी सुबह पता चला कि कोर्ट के रजिस्ट्रार का भी फोन टैप हुआ है. चीफ जस्टिस ने कहा कि सच सामने आएगा, हमें अभी नहीं पता कि किसका नंबर था और किसका नहीं. 

9 याचिकाओं पर सुनवाई, सड़क से संसद तक बवाल

सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग कुल 9 याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें पेगासस से जुड़े खुलासों की जांच करने की अपील की गई है. बता दें कि कुछ दिनों पहले ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने ये खुलासा किया था कि इज़रायल के पेगासस साफ्टवेयर की मदद से भारत में कई लोगों की जासूसी की गई है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रशांत किशोर, दर्जनों पत्रकार, कुछ केंद्रीय मंत्री और अन्य फील्ड से जुड़े लोगों को फोन हैक किए गए थे. इस मसले पर लगातार संसद में हंगामा हो रहा है और विपक्ष जांच की मांग कर रहा है. 

 

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