100-100 रुपये में महंगे आइटम... क्यों सस्ते में मिलता है जहाज से निकला सामान?

आपने देखा होगा कि जहाज के सामान को लेकर लोगों में काफी क्रेज रहता है और उन्हें काफी कम दाम में बेचा जाता है. तो जानते हैं जहाज के सामान सस्ते क्यों बेचे जाते हैं.

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जहाज से निकले सामान की बाजार में काफी डिमांड होती है. (Photo: Ai Generated) जहाज से निकले सामान की बाजार में काफी डिमांड होती है. (Photo: Ai Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:39 PM IST

आपने सोशल मीडिया पर कई वीडियो देखे होंगे, जिनमें दावा किया जाता है कि वो जहाज से निकले सामान को बेच रहे हैं. इनमें गेट, गीजर, मोटर, एसी, फर्नीचर आदि सामान होते हैं. इसके अलावा कई शहरों में कुछ ऐसे वेयरहाउस भी होते हैं, जहां इस तरह के सामान बेचे जाते हैं. कुछ महंगे आइटम्स को तो 100-100 रुपये में भी बेचने के दावे किए जाते हैं और कम रेट में इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचे जाते हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर इसमें कितनी सच्चाई है और हकीकत में ये सामान कितने सस्ते में मिल जाते हैं. 

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क्या सही में जहाज का सामान होता है? 

अब दो सवाल है कि क्या सही में सहाज का सामान बिकता है और अगर इसका जवाब हां है तो सवाल है कि आखिर जहाज का सामान बेचा क्यों जाता है. तो जानते हैं इसकी कहानी... पहले तो आपको बता दें कि जहाज से निकले सामानों को कम रेट में बाजार में बेचा जाता है. दरअसल, एक वक्त बाद पानी का जहाज रिटायर हो जाता है, उसके बाद उन्हें शिप-ब्रेकिंग यार्ड्स में लाया जाता है, जहां उन्हें तोड़ा जाता है. जब जहाज को काटा जाता है तो उसमें से कई तरह के सामान निकलते हैं, जिसमें कुछ सामान वापस इस्तेमाल करने लायक होते हैं, जबकि कुछ सामान स्क्रैप में चले जाते हैं. 

जो सामान वापस इस्तेमाल करने लायक होता है, उन्हें कम रेट में बाजार में बेच दिया जाता है. इसके अलावा जो सामान स्क्रैप होता है, उन्हें ढलाई फैक्ट्री में भेज दिया जाता है, जहां से कॉपर आदि को अलग अलग कर लिया जाता है. भारत में सबसे ज्यादा ये काम गुजरात के अलंग में  होता है. 

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शिप कटिंग के कारोबारी मुकेश कुमार बताते हैं कि एक शिप करीब 25-30 चलने के बाद कटने के लिए आता है. उन्होंने बताया, 'हर एक जहाज की अपनी लिमिट होती है, जिसके बाद इसे काट दिया जाता है.  इसमें कई तरह के सामान निकलते हैं, जिसमें चम्मच से लेकर महंगे एंटीक सामान तक रहते हैं. इन सामान को लोकल व्यापारी खरीद लेते हैं और फिर वे इन्हें इंपोर्ट सामान के नाम से, जहाज के सामान के नाम से बेचते हैं. वैसे तो कई सामान 25 साल बाद काफी पुराने लगते हैं, जो सस्ते में मिल जाते हैं. लेकिन, कुछ सामान जैसे लकड़ी आदि की क्वालिटी अच्छी होती है तो उनकी भी डिमांड रहती है. कुछ सामान के रेट में नए से ज्यादा अंतर नहीं होता, जबकि कुछ सामान थोड़े सस्ते मिल जाते हैं.'

कैसे-कैसे सामान निकलते हैं?

जहाज से टीक की लकड़ी के दरवाजे और फर्नीचर, पीतल के हैंडल, वाल्व और फिटिंग्स, जहाज की बड़ी एलईडी और नेविगेशन लाइटें, लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, स्टील की अलमारियां, टेबल, कुर्सियां, एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, किचन का इंडस्ट्रियल सामान, एंकर, चेन और सजावट के आइटम, पुराने कंपास, टेलीग्राफ और अन्य समुद्री उपकरण निकलते हैं, जिन्हें बाजार में बेचा जाता है. अच्छी क्वालिटी  की होने की वजह से इनकी बाजार में काफी डिमांड रहती है और उन्हें काफी लोग खरीदते हैं. इन सामान को होटल, रेस्टोरेंट मालिक, फॉर्म हाउस मालिक, इंटीरियर डिजाइनर काफी खरीदते हैं.  विंटेज सामान के शौकीन लोग इन्हें खरीदकर मरम्मत करके अच्छे दाम में बेच देते हैं. 

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कहां मिलते हैं?

वैसे तो अलग-अलग शहरों में इनके स्टोर होते हैं, जो इस तरह के सामान बेचते हैं. वैसे जहां शिप कटिंग का काम ज्यादा होता है, वहां ये सामान ज्यादा बिकते हैं. इसके अलावा जिन शहरों में स्क्रैप का काम काफी होता है, वहां भी इनकी दुकानें काफी होती हैं. इसके अलावा अब लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से भी सामान भेजना शुरू कर दिया है. कोलकाता, भावनगर, जयपुर, सूरत आदि शहरों में ऐसी काफी दुकानें हैं. 
 

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