कैश या फिर ऑनलाइन? मकान मालिक को किस तरह से किराया देना चाहिए

क्या मकान मालिक को किराया कैश में देना बेहतर है या ऑनलाइन? क्या कैश पेमेंट कानूनी रूप से वैलिड है और ऑनलाइन पेमेंट क्यों ज्यादा सुरक्षित माना जाता है? जानिए कैश और ऑनलाइन दोनों तरीकों के फायदे-नुकसान, किराया देते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

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आज के समय में अधिकतर लोग ऑनलाइन किराया देना ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद मानते हैं. ( Photo: ITG) आज के समय में अधिकतर लोग ऑनलाइन किराया देना ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद मानते हैं. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:39 AM IST

कैश हो या ऑनलाइन, मकान मालिक को किराया किस तरीके से देना चाहिए? यह सवाल आज भी कई किरायेदारों के मन में आता है. कुछ लोग हर महीने नकद में किराया देना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें यही तरीका आसान लगता है. वहीं कई लोग यूपीआई, बैंक ट्रांसफर या नेट बैंकिंग से किराया भेजते हैं. लेकिन अगर आगे चलकर किराए को लेकर कोई विवाद हो जाए, तो कौन-सा तरीका आपके लिए ज्यादा सुरक्षित रहेगा? इसलिए किराया देने का तरीका सिर्फ सुविधा का नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा का भी मामला है.

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ज्यादातर एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर संभव हो, तो किराया ऑनलाइन देना बेहतर है. इसकी वजह यह है कि हर ऑनलाइन पेमेंट का रिकॉर्ड अपने आप बन जाता है. बैंक या यूपीआई ऐप में कब, कितने पैसे और किसे भेजे गए, इसकी पूरी जानकारी सुरक्षित रहती है. अगर भविष्य में कभी मकान मालिक कहे कि उन्हें किराया नहीं मिला, तो यही रिकॉर्ड आपके लिए सबूत का काम करेगा. यही कारण है कि आज के समय में अधिकतर लोग ऑनलाइन किराया देना ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद मानते हैं.

ऑनलाइन किराया देने के क्या फायदे हैं?
ऑनलाइन किराया देने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि हर पेमेंट का साफ रिकॉर्ड बन जाता है. पैसा सीधे मकान मालिक के बैंक खाते में पहुंचता है, इसलिए यह साबित करना आसान होता है कि किराया दिया जा चुका है. इससे दोनों पक्षों के बीच गलतफहमी या विवाद होने की संभावना भी काफी कम रहती है. इसके अलावा बैंक या यूपीआई ऐप में हर ट्रांजैक्शन की तारीख और पेमेंट आसानी से देखी जा सकती है. कई ऐप रिमाइंडर और ऑटो-पे जैसी सुविधाएं भी देते हैं, जिससे हर महीने समय पर किराया जमा करना आसान हो जाता है.

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अगर कैश में किराया दे रहे हैं, तो क्या सावधानी रखें?
कैश में किराया देना बिल्कुल गलत या गैरकानूनी नहीं है. आज भी देश में लाखों लोग हर महीने नकद में ही किराया चुकाते हैं. लेकिन यहां एक छोटी-सी लापरवाही आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है. इसलिए अगर आप कैश में किराया देते हैं, तो हर बार मकान मालिक से लिखित रसीद जरूर लें. रसीद में तारीख, दी गई रकम, किस महीने का किराया है और मकान मालिक के हस्ताक्षर जरूर होने चाहिए. यही कागज जरूरत पड़ने पर सबसे बड़ा सबूत बन सकता है.

मान लीजिए कुछ महीनों बाद कोई विवाद हो जाए और मकान मालिक कहे कि आपने किराया ही नहीं दिया. अगर आपके पास रसीद नहीं है, तो अपनी बात साबित करना मुश्किल हो सकता है. इसलिए सिर्फ भरोसे के बजाय किराए के भुगतान का कोई न कोई रिकॉर्ड अपने पास रखना हमेशा समझदारी है.

अगर मकान मालिक सिर्फ कैश ही मांगे, तो क्या करें?
कई बार मकान मालिक खुद कैश लेना पसंद करते हैं. इसकी वजह यह हो सकती है कि उन्हें ऑनलाइन पेमेंट की आदत न हो या वे नकद लेना ज्यादा सुविधाजनक समझते हों. ऐसी स्थिति में बेझिझक रसीद मांगें. अगर मकान मालिक रसीद देने से बचते हैं, तो कोशिश करें कि किराया बैंक ट्रांसफर या यूपीआई से भेजें, ताकि आपके पास भुगतान का पक्का रिकॉर्ड मौजूद रहे.

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ऑनलाइन पेमेंट करते समय यह छोटी-सी गलती न करें
अगर आप हर महीने यूपीआई या बैंक ट्रांसफर से किराया भेजते हैं, तो पैसे भेजते समय रिमार्क में 'House Rent', 'July Rent' या जिस महीने का किराया हो, उसका नाम जरूर लिखें. इससे महीनों बाद भी बैंक स्टेटमेंट देखते ही समझ आ जाएगा कि यह ट्रांजैक्शन किराए के लिए किया गया था. कई लोग इस छोटी-सी बात पर ध्यान नहीं देते, लेकिन जरूरत पड़ने पर यही रिकॉर्ड उनके बहुत काम आता है.

रेंट एग्रीमेंट बनवाना क्यों जरूरी है?
इसके साथ ही एक और जरूरी बात है कि हमेशा रेंट एग्रीमेंट जरूर बनवाएं. इसमें किराए की रकम, हर महीने भुगतान की तारीख, सिक्योरिटी डिपॉजिट और किराया किस तरीके से दिया जाएगा, यह सब साफ-साफ लिखा होना चाहिए. जब शुरुआत से ही सारी बातें लिखित में तय रहती हैं, तो बाद में गलतफहमी और विवाद होने की संभावना काफी कम हो जाती है.

आखिर कौन-सा तरीका सबसे बेहतर है?
आखिर में बात सिर्फ कैश या ऑनलाइन की नहीं, बल्कि सुरक्षित तरीके से किराया देने की है. अगर सुविधा और सुरक्षा दोनों को देखा जाए, तो ऑनलाइन पेमेंट बेहतर ऑप्शन माना जाता है, क्योंकि उसका रिकॉर्ड अपने आप तैयार हो जाता है. वहीं अगर किसी वजह से आपको कैश में किराया देना पड़ रहा है, तो बिना रसीद लिए कभी पेमेंट न करें. एक छोटी-सी सावधानी आपको भविष्य में होने वाले बड़े विवाद और बेवजह की परेशानी से बचा सकती है.

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