आज के समय में आपने ऐसे कई लोगों को देखा होगा जो घर से निकलते ही कानों में हेडफोन या ईयरबड्स लगा लेते हैं. बस, मेट्रो, ऑफिस, जिम, सड़क या यहां तक कि घर में भी वे हर समय कुछ न कुछ सुनते रहते हैं. कई बार तो लोग बिना म्यूजिक चलाए भी हेडफोन लगाए रखते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हर समय हेडफोन लगाने वाले लोगों की सोच दूसरों से अलग होती है? क्या यह सिर्फ म्यूजिक सुनने की आदत है या इसके पीछे कोई मनोवैज्ञानिक कारण भी होता है? चलिए जानते हैं इस बारे में रिसर्च और एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं.
हेडफोन सिर्फ गाने सुनने के लिए नहीं होते
मनोवैज्ञानिक प्रिया साहनी कहती हैं कि कई लोगों के लिए हेडफोन सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं होते, बल्कि वे अपने आसपास की भीड़ और शोर से बचने का तरीका भी बन जाते हैं. जब कोई व्यक्ति लगातार शोर-शराबे वाले माहौल में रहता है, तो वह हेडफोन लगाकर खुद के लिए एक पर्सनल स्पेस बना लेता है. इससे उसे लगता है कि वह अपने हिसाब से दुनिया को कंट्रोल कर रहा है.
हर समय हेडफोन लगाने वाले लोग अक्सर क्या सोचते हैं?
इसका कोई एक जवाब नहीं है, क्योंकि हर व्यक्ति अलग होता है. लेकिन कई मनोवैज्ञानिक अध्ययनों में कुछ सामान्य बातें सामने आई हैं.
1. उन्हें अपना अकेलापन पसंद हो सकता है
हर समय हेडफोन लगाने वाले कई लोग भीड़ में भी अपनी छोटी-सी दुनिया बनाकर रखना पसंद करते हैं. इसका मतलब यह नहीं कि वे लोगों से नफरत करते हैं, बल्कि कई बार वे खुद के साथ समय बिताना चाहते हैं.
2. वे तनाव कम करने की कोशिश कर रहे होते हैं
संगीत दिमाग को शांत करने में मदद करता है. रिसर्च बताती हैं कि पसंदीदा म्यूजिक सुनने से तनाव पैदा करने वाला हार्मोन कोर्टिसोल कम हो सकता है और मूड बेहतर महसूस होता है. इसी वजह से कई लोग ऑफिस के काम, पढ़ाई या सफर के दौरान हेडफोन लगाकर म्यूजिक सुनते हैं.
3. उन्हें ध्यान लगाने में आसानी होती है
कुछ लोगों का दिमाग आसपास की आवाजों से जल्दी भटक जाता है. ऐसे लोग हल्का म्यूजिक सुनकर ज्यादा फोकस कर पाते हैं. यही कारण है कि कई छात्र पढ़ाई करते समय और कई कर्मचारी काम करते समय हेडफोन पहनते हैं.
4. वे अपनी भावनाओं को संभाल रहे होते हैं
म्यूजिक इंसान की भावनाओं पर गहरा असर डालता है. जब कोई उदास होता है, खुश होता है या किसी बात को लेकर परेशान होता है, तो वह अपनी पसंद के गाने सुनकर खुद को बेहतर महसूस करने की कोशिश करता है. यानी कई बार हेडफोन भावनाओं को संभालने का एक तरीका भी बन जाते हैं.
क्या इसका मतलब वे इंट्रोवर्ट होते हैं?
अक्सर लोग मान लेते हैं कि हर समय हेडफोन लगाने वाला व्यक्ति इंट्रोवर्ट होगा, लेकिन ऐसा कोई वैज्ञानिक नियम नहीं है. कई एक्स्ट्रोवर्ट लोग भी सफर के दौरान म्यूजिक सुनना पसंद करते हैं. इसलिए सिर्फ हेडफोन देखकर किसी की पर्सनैलिटी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता.
रिसर्च क्या कहती है?
ब्रिटेन की University of Westminster और कई अन्य मनोवैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि संगीत इंसान के मूड, एकाग्रता और तनाव पर सकारात्मक असर डाल सकता है. वहीं American Psychological Association (APA) से जुड़ी कई रिपोर्टों में भी बताया गया है कि संगीत मानसिक आराम देने और फिलिंग्स को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है. हालांकि एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि किसी व्यक्ति की सोच या स्वभाव का फैसला केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि वह हेडफोन लगाता है या नहीं. लेकिन हर समय हेडफोन पहनना नुकसान भी पहुंचा सकता है
अगर बहुत तेज आवाज में लंबे समय तक हेडफोन का इस्तेमाल किया जाए, तो सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. यही वजह है कि डॉक्टर 60/60 नियम अपनाने की सलाह देते हैं. यानी आवाज 60 प्रतिशत से ज्यादा न रखें और लगातार 60 मिनट से ज्यादा तेज आवाज में न सुनें. हर समय हेडफोन लगाने वाला व्यक्ति जरूरी नहीं कि अकेला, उदास या लोगों से दूर रहने वाला हो. कई लोग सिर्फ म्यूजिक पसंद होने की वजह से ऐसा करते हैं, कुछ लोग शोर से बचना चाहते हैं, जबकि कुछ लोग तनाव कम करने या बेहतर फोकस के लिए हेडफोन पहनते हैं.
यानी किसी व्यक्ति के कान में हेडफोन देखकर उसकी पूरी पर्सनैलिटी का अंदाजा लगाना सही नहीं होगा. हां, इतना जरूर कहा जा सकता है कि हेडफोन आज सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि कई लोगों के लिए अपनी फीलिंग्स को संभालने, शांति पाने और अपनी छोटी-सी निजी दुनिया बनाने का एक आसान तरीका बन चुके हैं.
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