Psychology Facts: नाखून चबाने वाले लोग कैसे होते हैं?

मनोविज्ञान के अनुसार, नाखून चबाने की आदत कई बार तनाव, चिंता, बोरियत या लंबे समय से बनी आदत से जुड़ी हो सकती है. हालांकि हर नाखून चबाने वाला व्यक्ति तनाव में हो, ऐसा जरूरी नहीं है. साइकोलॉजी इस आदत के बारे में क्या कहती है, इसके पीछे की वजहें क्या हो सकती हैं और इसे कैसे छोड़ा जा सकता है.

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क्या आप भी बिना सोचे-समझे नाखून चबाने लगते हैं? ( Photo: ITG) क्या आप भी बिना सोचे-समझे नाखून चबाने लगते हैं? ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:26 PM IST

Psychology Facts: क्या आप भी बिना सोचे-समझे नाखून चबाने लगते हैं? या आपके घर में कोई ऐसा है जो पढ़ाई करते समय, टीवी देखते हुए या किसी टेंशन में अपने नाखून चबाने लगता है? पहली नजर में यह सिर्फ एक खराब आदत लग सकती है, लेकिन मनोविज्ञान बताता है कि कई बार इसके पीछे हमारी भावनाएं, तनाव और मानसिक स्थिति भी जुड़ी हो सकती है. दिलचस्प बात यह है कि बहुत से लोगों को खुद भी पता नहीं चलता कि वे कब नाखून चबाने लगे. कई बार यह आदत इतनी सामान्य हो जाती है कि इंसान बातचीत करते हुए, मोबाइल चलाते हुए या किसी काम में डूबे रहने के दौरान भी अपने नाखून चबाता रहता है.

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तनाव और चिंता से हो सकता है संबंध
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, नाखून चबाने की आदत अक्सर तनाव, चिंता या बेचैनी के समय ज्यादा दिखाई देती है. जब कोई व्यक्ति किसी बात को लेकर परेशान होता है या उसके दिमाग में बहुत सारे थॉट चल रहे होते हैं, तब वह अनजाने में ऐसा करने लगता है. कुछ लोगों के लिए यह खुद को शांत करने का एक तरीका बन जाता है. हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जो भी व्यक्ति नाखून चबाता है, उसे कोई मानसिक बीमारी है. कई बार यह सिर्फ लंबे समय से बनी एक आदत भी होती है.

बोरियत में भी शुरू हो जाती है यह आदत
क्या आपने कभी महसूस किया है कि खाली बैठे-बैठे भी लोग नाखून चबाने लगते हैं? ऐसा इसलिए क्योंकि दिमाग किसी काम की तलाश करता है. जब कोई खास काम नहीं होते, तो कुछ लोग अनजाने में नाखून चबाने लगते हैं. इसलिए यह आदत सिर्फ तनाव में ही नहीं, बल्कि बोरियत के समय भी दिखाई दे सकती है. कुछ मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि जो लोग हर काम को बिल्कुल सही तरीके से करना चाहते हैं, उनमें भी यह आदत देखने को मिल सकती है. जब चीजें उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं होतीं, तो बेचैनी बढ़ सकती है और वे नाखून चबाने लगते हैं। हालांकि यह हर व्यक्ति पर लागू नहीं होता.

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अक्सर यह आदत बचपन में शुरू होती है. कई बच्चे पढ़ाई के दबाव, डर, घबराहट या सिर्फ दूसरों को देखकर नाखून चबाना शुरू कर देते हैं. अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आदत बड़े होने तक भी बनी रह सकती है. बार-बार नाखून चबाने से सिर्फ नाखून ही खराब नहीं होते, बल्कि उंगलियों को भी नुकसान पहुंच सकता है. क्योंकि हाथों पर कई तरह के कीटाणु मौजूद होते हैं, इसलिए उन्हें बार-बार मुंह में डालने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है. इसके अलावा दांतों और मसूड़ों पर भी असर पड़ सकता है.

क्या इस आदत को छोड़ा जा सकता है?
अच्छी बात यह है कि थोड़ी जागरूकता और अभ्यास से इस आदत को कम किया जा सकता है. सबसे पहले यह पहचानें कि आप कब सबसे ज्यादा नाखून चबाते हैं. तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लेने, टहलने या किसी पसंदीदा काम में समय बिताने की कोशिश करें. नाखूनों को छोटा और साफ रखें. हाथों को किसी दूसरी काम में व्यस्त रखें, जैसे स्ट्रेस बॉल दबाना या पेन पकड़ना. अगर आदत बहुत ज्यादा हो गई है और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है, तो मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है.

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क्या हर नाखून चबाने वाला व्यक्ति तनाव में होता है?
हर व्यक्ति अलग होता है. कोई तनाव में नाखून चबा सकता है, तो कोई सिर्फ आदत की वजह से ऐसा करता है. इसलिए सिर्फ इस एक व्यवहार के आधार पर किसी के व्यक्तित्व या मानसिक स्थिति के बारे में निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए. नाखून चबाना देखने में एक छोटी-सी आदत लग सकती है, लेकिन कई बार यह हमारे तनाव, बेचैनी, बोरियत या लंबे समय से बनी आदत का संकेत भी हो सकता है. अगर यह कभी-कभार होता है, तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती. लेकिन यदि यह आदत लगातार बढ़ रही है, उंगलियों को नुकसान पहुंचा रही है या रोकने की कोशिश के बाद भी नहीं छूट रही, तो किसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर हो सकता है. याद रखें, किसी की यह आदत देखकर उसे कमजोर, लापरवाह या मानसिक रूप से बीमार मान लेना सही नहीं है. 

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