बिना सीमेंट, बजरी व पानी से मकान... क्यों लोगों को पंसद आ रही ये टेक्नोलॉजी?

एक साधारण सा घर बनाने में भी ढेर सारे ईंट, रेत, बजरी और पानी का इस्तेमाल होता है. इसके साथ ही काफी मजदूर और मिस्त्री भी कई- कई दिनों तक काम करते रहते हैं. आज हम आपको घर बनाने का ऐसा तरीका बताए, जिसमें ईंट, सीमेंट, रेत और बजरी का इस्तेमाल नहीं होता है.

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बिना ईंट, सीमेंट और पानी ऐसे बनता है प्री फेब्रिकेटेड घर (Photo - AI Generated) बिना ईंट, सीमेंट और पानी ऐसे बनता है प्री फेब्रिकेटेड घर (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:01 PM IST

आजकल घर बनाने के लिए नई- नई तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है. अपनी खाली जमीन पर कम खर्चे में छोटा, कॉम्पेक्ट, मजबूत और सुंदर प्री- फैब्रिकेटेड घर तैयार हो जा रहे हैं. इनमें न ईंट लगती है, ना सीमेंट सिर्फ  बाइसन बोर्ड, एरोकॉन पैनल स्टील और लोहे की पाइप के जरिए एक सुंदर और मजबूत घर का ढांचा खड़ा कर दिया जाता है.  

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ऐसे घरों के दीवार खड़ी करने के लिए एरोकॉन पैनल और लैंटर्न के लिए बाइसन बोर्ड का इस्तेमाल होता है. एरोकॉन पैनल एक सैंटविच पैनल होता है, जो सीमेंट और सिलिसस के मिश्रण से बना होता है. इसे दोनों तरफ से   सीमेंट फाइबर बोर्ड की मोटी परत रहती है और इसे साउंड प्रूफ, टेंप्रेचर प्रूफ, वाटर प्रूफ और फायर प्रूफ बनाने के लिए इसके बीच में जिप्सम के साथ केमिकल मिलाकर एक मिश्रण भी डाला जाता है, जो सीमेंट की कंक्रीट से भी ज्यादा मजबूत होता है. इस केमिकल की वजह से अंदर बबल बन जाते हैं. इस वजह से यह दीवार टेंप्रेचर को कंट्रोल करता है. सीमेंट फाइबर बोर्ड की वजह से एरोकॉन पैनल में न सीलन आती है और न दीमक लगते हैं.

बाइसन बोर्ड सीमेंट और लकड़ी के बुरादे के मिश्रण से बना एक वाटरप्रूफ और फायरप्रूफ सीमेंट बॉन्डेंड पार्टिकल बोर्ड होता है.पार्टिशन, फॉल्स सीलिंग, फ्लोरिंग और अंदर की छत बनाने में इसका इस्तेमाल होता है.  एक पैनल की कीमत इसकी मोटाई, लंबाई और चौड़ाई के मुताबिक 25 से 80 रुपये वर्गफुट होती है.

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प्री- फैब्रिकेटेड घर का पूरा ढांचा एरोकॉन पैनल और बाइसन बोर्ड के सहारे खड़ा हो जाता है. यह बोर्ड 10 फीट लंबा और 2 फीट चौड़ा होता है. हालांकि, दोनों ही पैनल अलग- अलग, मोटाई, लंबाई और चौड़ाई के आते हैं. इन बोर्ड या पैनल में ऐसा खांचा होता है कि सभी एक दूसरे से आराम से इंटरलॉक हो जाते हैं. इंटरलॉक हो जाने पर इनकी मजबूती बढ़ जाती है. 

घर का पूरा ढांचा इस बोर्ड और लोहे की पाइप के जरिए फीट करके खड़ा कर दिया जाता है. छत भी इसी बोर्ड से बन जाती है. इसके बाद इंटीरियर का सारा काम नॉर्मल घरों की तरह होता है. चाहे अंदर आप टाइल फ्लोर बनवाएं, या वॉल में वुडन का काम करवाएं. 

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इससे घर बनाने में कहीं से कोई सीमेंट, बजरी और पानी का इस्तेमाल नहीं होता है. इस पैनल या बोर्ड से घर बनाना काफी सस्ता पड़ता है. एक नॉर्मल घर बनाने में जितना भी खर्च होता है, उससे 30 प्रतिशत कम खर्च लगता है. केरल और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में ऐसे मकान खूब बनते हैं. वहां एक दशक पहले से इस तकनीक से मकान बन रहे हैं. 

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