'मैं सुरक्षित हूं', जब हिटलर ने रेडियो पर की घोषणा, हमले में बाल- बाल बची थी जान

आज के दिन ही एक हमले में बाल- बाल जान बचने के बाद हिटलर ने रेडियो पर घोषणा की थी कि वह सुरक्षित है. इसके बाद हिटलर ने तख्तापलट की साजिश करने वाले लोगों को 11 घंटे के अंदर दबा दिया.

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एक हत्या की कोशिश में बचने के बाद हिटलर ने आज के दिन ही रेडियो पर घोषणा की थी कि मैं जिंदा हूं (Photo - Getty) एक हत्या की कोशिश में बचने के बाद हिटलर ने आज के दिन ही रेडियो पर घोषणा की थी कि मैं जिंदा हूं (Photo - Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:03 PM IST

21 जुलाई 1944 को एडॉल्फ हिटलर ने रेडियो पर घोषणा की थी कि उन पर किया गया हमला विफल हो गया और वो सुरक्षित हैं. इस ऑपरेशन का कोड नाम ऑपरेशन वाल्कीरी था और इसका हिसाब चुकाया जाएगा. हिटलर पर बम से हमला किया गया था . धमाके में वह किसी तरह बच गया था. उसे मामूली चोट आई थी. उसके कान के परदे फट गए थे और जलने के थोड़े निशान थे. 

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हिटलर उस बम धमाके में बच गया था, जिसका मकसद उसे मारना था. हमले में ऐसी कोई चोट नहीं थी जो उसे सरकार पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने और विद्रोहियों को ढूंढने से रोक सके. दरअसल, हिटलर की हत्या के साथ होने वाले तख्तापलट को महज साढ़े ग्यारह घंटे में दबा दिया गया था.

बर्लिन में, सेना के मेजर ओटो रेमर, जिन्हें षड्यंत्रकारियों द्वारा राजनीति से परे और किसी भी आदेश का पालन करने के लिए तैयार माना जाता था, उसे बताया गया कि हिटलर की मृत्यु हो गई है और उन्हें प्रचार मंत्री जोसेफ गोएबल्स को गिरफ्तार करना है, लेकिन गोएबल्स के पास रेमर के लिए एक और खबर थी- हिटलर जीवित था और उन्होंने इसे साबित भी कर दिया, जब उन्होंने नेता से फोन पर बात की. विद्रोही फोन लाइनें काटना भूल गए थे.

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हिटलर ने फिर रेमर को सीधे आदेश दिया कि किसी भी सैन्य विद्रोह को कुचल दिया जाए और केवल उनके या गोएबल्स या हिमलर के आदेशों का पालन किया जाए. रेमर ने गोएबल्स को जाने दिया. इसके बाद एसएस हरकत में आ गई और अराजकता से घिरे बर्लिन में ठीक समय पर पहुंचकर कई उच्च जर्मन अधिकारियों को हिटलर के प्रति वफादार रहने के लिए मना लिया.

इसके बाद गिरफ्तारियां, यातनाएं, फांसी और आत्महत्याएं हुईं. काउंट क्लॉस वॉन स्टॉफेनबर्ग, वह व्यक्ति जिसने वास्तव में हिटलर के कमरे में विस्फोटक लगाया था और जिसने अपने साथियों से कहा था कि विस्फोट ऐसा था मानो 150 मिलीमीटर का गोला लगा हो. उस कमरे में कोई भी जीवित नहीं बचा होगा. लेकिन स्टॉफेनबर्ग खुद ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह सका. क्योंकि, हिटलर समर्थक अधिकारी ने उसी दिन उसकी गोली मारकर हत्या कर दी. साजिश पूरी तरह नाकाम हो गई. 

अब हिटलर को जर्मन जनता में शांति और विश्वास बहाल करना था. इसलिए 21 जुलाई की सुबह 1 बजे, हिटलर की आवाज रेडियो पर सुनाई दी - मैं सुरक्षित और स्वस्थ हूं… महत्वाकांक्षी, गैर-जिम्मेदार… और मूर्ख अधिकारियों के एक छोटे से गुट ने मुझे खत्म करने की साजिश रची थी… यह अपराधियों का गिरोह है जिसे बेरहमी से नष्ट कर दिया जाएगा. इसलिए मैं अभी आदेश देता हूं कि कोई भी सैन्य अधिकारी… इस धोखेबाजों के गिरोह का आदेश नहीं मानेगा… इस बार हम उनसे उसी तरह हिसाब लेंगे जिस तरह हम राष्ट्रीय समाजवादी लेते आए हैं.

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