पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत के मामले में मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी का एक वीडियो चर्चा में है. वीडियो में दिख रहा है कि जब आरोपी सिया गोयल को पूछताथ के लिए लेकर जा रहे हैं तो वो पुलिस कस्टडी में बिना हथकड़ी के नजर आ रही हैं. वहीं, दूसरे आरोपी चेतन के हाथ में हथकड़ी लगाई गई है. ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सिया के हाथ में हथकड़ी क्यों नहीं लगाई गई. तो जानते हैं आखिर ये किस वजह से हुआ है और हथकड़ी से जुड़े प्रोटोकॉल क्या कहते हैं...
क्या हैं नियम?
बता दें कि कोर्ट हमेशा बिना किसी ठोस कारणों के हथकड़ी लगाने के खिलाफ रहा है. पुलिस के नियमों और कोर्ट के फैसलों के हिसाब से सामान्य तौर पर और सिर्फ एस्कॉर्ट के लिए हथकड़ी का इस्तेमाल पुरुष और महिलाओं दोनों के लिए नहीं किया जा सकता है. महिलाओं के केस में पुलिस को कहा जाता है कि उन्हें हथकड़ी लगाने से बचना चाहिए. इसके अलावा 21 साल तक के अपराधियों के भी बिना कोर्ट की परमिशन के हथकड़ी नहीं लगा सकते. अगर पुलिस को लगता है कि पकड़ा गया शख्स गंभीर अपराधी है या वो फरार हो सकता है तो इस स्थिति में हथकड़ी लगाई जा सकती है. लेकिन, आमतौर पर हथकड़ी ना लगाने के लिए कहा जाता है.
कब लगा सकते हैं हथकड़ी?
कई बार कोर्ट में भी हथकड़ी लगाने को लेकर बहस हो चुकी हैं और कोर्ट ने हथकड़ी को लेकर अलग फैसले सुनाए हैं. कोर्ट का कहना है कि किसी भी आरोपी को हथकड़ी लगाने से बचना चाहिए, जबतक कि उसे हथकड़ी लगाने का कोई जरूरी कारण ना हो. कई जगह तो हथकड़ी लगाने से पहले कोर्ट से आदेश लेने की भी बात कही गई है. अगर कोई खूंखार अपराधी है तो उस स्थिति में पुलिस हथकड़ी लगा सकती है, लेकिन सामान्य तौर पर हथकड़ी ना लगाने पर जोर दिया जाता है.
पुलिस के हथकड़ी से जुड़े प्रोटोकॉल के अनुसार, गंभीर अपराध के मामलों में ही आरोपियों को अदालत, अस्पताल और अन्य स्थानों पर ले जाते समय हथकड़ी लगाई जा सकती है. दिल्ली पुलिस के नियमों के अनुसार, साल 18 से 21 साल तक के युवा लोगों को कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना हथकड़ी नहीं लगाई जा सकती. बीएनएसएस की धारा 43(3) के अनुरूप, संगठित अपराध, आतंकवाद, मादक पदार्थों से संबंधित अपराध, हथियारों और गोला-बारूद के अवैध कब्जे, हत्या, बलात्कार, एसिड हमला, मुद्रा या सिक्कों की जालसाजी, मानव तस्करी, बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों या राज्य के विरुद्ध अपराधों में शामिल व्यक्तियों को गिरफ्तार करते समय या पेश करते समय हथकड़ी का उपयोग किया जा सकता है.
पुलिस रिमांड के दौरान हथकड़ी का उपयोग करने के लिए अधिकारियों को अदालत से लिखित अनुमति लेनी होगी. अगर कोई अपराधी अस्पताल में है तो हथकड़ी नहीं लगाई जाएगी. वहीं, बेड़ियों का इस्तेमाल सिर्फ कोर्ट की परमिशन के बाद ही किया जा सकता है. अगर महिला आरोपियों की बात करें तो उन्हें नियमित रूप से हथकड़ी नहीं लगाई जा सकती और उनके मामले में हथकड़ी का उपयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकता है.
इसके अलावा किसी अपराधी के फरार होने की संभावना है या पुराना रिकॉर्ड खराब है तो हथकड़ी लगाई जा सकती है. साथ ही गैंगस्टर आदि अपराधियों के कमर के पीछे हथकड़ी लगाई जा सकती है जबकि आम तौर पर सामने की ओर हथकड़ी लगाई जाती है. ट्रेवल के वक्त हथकड़ी के साथ चेन का इस्तेमाल किया जा सकता है. खाना खाते वक्त, टॉयलेट जाने की स्थिति में हथकड़ी हटाई जा सकती है.
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