खुद के पैसे नहीं वसूल पा रहा ईरान... क्या होर्मुज पर ब्लैकमेल होगा अमेरिका?

क्या आप जानते हैं कि ईरान का काफी पैसा दूसरे देशों में फंसा हुआ है और अमेरिका के कुछ प्रतिबंधों की वजह से ईरान ये पैसे वसूल नहीं पा रहा है. तो जानते हैं इस पैसे के बारे में...

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ईरान कई सालों से दूसरे देशों में अटके अपने पैसे नहीं वसूल पा रहा है. (File Photo) ईरान कई सालों से दूसरे देशों में अटके अपने पैसे नहीं वसूल पा रहा है. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:40 PM IST

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अभी भी खत्म नहीं हुआ है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित है. लेकिन,  होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग के साथ-साथ दोनों देशों के बीच कई ऐसे आर्थिक और कूटनीतिक विवाद भी हैं, जो लंबे समय से अनसुलझे पड़े हैं. इन्हीं में एक बड़ा मुद्दा ईरान का वह फंसा हुआ पैसा भी है, जो अलग-अलग देशों में अटक गया है और जिस पर अमेरिकी प्रतिबंधों का सीधा असर माना जाता है. ऐसे में सवाल है कि जब ईरान अपना पैसा वसूल नहीं पा रहा है तो क्या होर्मुज पर अमेरिका को ब्लैकमेल कर पाएगा? तो समझते हैं कि ये पैसा आखिर किस तरह फंसा, किन देशों में अटका है और इसके पीछे अमेरिका की नीतियों की क्या भूमिका रही है...

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गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान लंबे समय से उन अरबों डॉलर तक पहुंच की मांग कर रहा है, जो प्रतिबंधों के कारण विदेशों में फंसे हुए हैं. ईरानी अधिकारियों का दावा है कि प्रस्तावित समझौते के तहत लगभग 25 अरब डॉलर तक की जमी हुई संपत्ति को धीरे-धीरे जारी किया जा सकता है. लेकिन, अमेरिका का रुख इस मामले में काफी सतर्क और सख्त दिखाई देता है. 

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि वॉशिंगटन ने अभी तक किसी भी जमी हुई संपत्ति को जारी करने पर सहमति नहीं दी है. ये बताया जा रहा है कि भविष्य में अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े दायित्वों का पालन करता है, तो इस पर विचार किया जा सकता है.

यह मुद्दा अमेरिका की घरेलू राजनीति के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील है. दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की आलोचना की है कि उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते के तहत ईरान को धन जारी किया था. यही वह समझौता था, जिससे ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को अलग कर लिया था.

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ईरान का कितना पैसा है?

दरअसल, ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अमेरिका और अन्य देशों की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से मुश्किल में है. ये प्रतिबंध 1979 से लगाए जाने शुरू हुए थे, जब ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास में अमेरिकी बंधकों को रखा गया था. इसके बाद ये प्रतिबंध और भी सख्त होते गए. इन प्रतिबंधों की वजह से ईरान को अपनी ही संपत्तियों तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है, जैसे कि तेल बिक्री से होने वाली कमाई, जो विदेशी बैंकों में जमा होकर फ्रीज हो गई है. 

अलजजीरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान की फंसी हुई संपत्तियों का कुछ अमाउंट स्पष्ट नहीं है, लेकिन ईरान की आधिकारिक रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुसार विदेशों में फंसी हुई ईरानी संपत्तियों की कुल राशि 100 अरब डॉलर से अधिक है. मिडिल ईस्ट काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स के नॉन-रेजिडेंट सीनियर फेलो फ्रेडरिक श्नाइडर ने अल जजीरा से कहा कि यह राशि ईरान की सालाना हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) बिक्री से होने वाली कमाई का लगभग तीन गुना है. ईरान को इस वक्त इन पैसों की बहुत जरूरत है. 

दरअसल, जब किसी व्यक्ति, कंपनी या किसी देश के केंद्रीय बैंक की धनराशि, संपत्ति या सिक्योरिटीज को किसी दूसरे देश की सरकार या किसी वैश्विक संस्था द्वारा अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है, तो उसे संपत्ति को फ्रीज करना कहा जाता है. 

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क्यों फ्रीज है पैसा?

यूएस गवर्नमेंट आर्काइव्स के अनुसार, पहली बार ईरान की संपत्तियों को फ्रीज करने की घटना नवंबर 1979 में हुई थी. उस समय ईरानी छात्र तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास में 66 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बनाए हुए थे. उस समय के अमेरिकी वित्त सचिव विलियम मिलर ने बताया था कि ईरान की लिक्विड प्रॉपर्टी उस समय 6 अरब डॉलर से भी कम थीं. इनमें सबसे बड़ा हिस्सा लगभग 1.3 अरब डॉलर के ट्रेजरी नोट्स थे, जो न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक में रखे गए थे. 

1981 में, अल्जीयर्स समझौते के तहत अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता हुई, जिसके बाद अमेरिका ने इन संपत्तियों का बड़ा हिस्सा अनफ्रीज कर दिया, बदले में ईरान ने तेहरान में बंधक बनाए गए 52 अमेरिकी नागरिकों को रिहा किया.  हालांकि इसके बाद आने वाले सालों में अमेरिका और ईरान के संबंध और खराब होते गए, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वॉशिंगटन की चिंता बढ़ती गई. 

फिर बीच में कुछ समझौते भी हुए. साल 2023 में अमेरिका और ईरान के बीच एक कैदी अदला-बदली समझौता हुआ था, जिसके तहत ईरान ने पांच ईरान-अमेरिकी नागरिकों को रिहा किया. इसके बदले में अमेरिका ने कुछ ईरानी कैदियों को छोड़ा और ईरान को कुछ फंसे हुए फंड तक पहुंच दी. ये लगभग 6 अरब डॉलर का तेल राजस्व था, जो दक्षिण कोरिया में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण फंसा हुआ था. इस पैसे को कतर में ट्रांसफर किया गया ताकि उस पर निगरानी रखी जा सके.

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लेकिन अगले ही साल अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले के जवाब में नए प्रतिबंध लगा दिए, जिससे ईरान को दोबारा इन फंड्स तक पहुंच खोनी पड़ी. अमेरिका के अलावा, यूरोपीय संघ ने भी ईरान के सेंट्रल बैंक की कुछ संपत्तियों को आंशिक रूप से फ्रीज किया है.  इसके पीछे कारण ईरान पर मानवाधिकार उल्लंघन, परमाणु समझौतों के पालन में कमी, आतंकवाद से जुड़े आरोप और रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन समर्थन जैसे आरोप बताए गए हैं. 

और किन देशों में फंसा है पैसा?

ईरान की फंसी हुई संपत्तियों का फिक्स अमाउंट पता नहीं है, लेकिन बताया जाता है कि जापान, इराक, चीन, अमेरिका, कतर में काफी पैसा फंसा हुआ है. 

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