क्या हर बार पासपोर्ट पर मुहर लगती है... दूसरे देश जाने पर कहां रुकती हैं एयर होस्टेस?

एयर होस्टेस और पायलट भी हर अंतरराष्ट्रीय उड़ान में दूसरे देशों की सीमा पार करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उनके पासपोर्ट पर हर बार इमिग्रेशन की मुहर लगती है? इसका जवाब नियमों में छिपा है.

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क्रू इमिग्रेशन का मतलब है एयरलाइन के पायलट और केबिन क्रू (एयर होस्टेस/फ्लाइट अटेंडेंट) के लिए इमिग्रेशन की विशेष प्रक्रिया (Photo:Pexel) क्रू इमिग्रेशन का मतलब है एयरलाइन के पायलट और केबिन क्रू (एयर होस्टेस/फ्लाइट अटेंडेंट) के लिए इमिग्रेशन की विशेष प्रक्रिया (Photo:Pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:22 AM IST

अगर आपने कभी किसी भारतीय एयर होस्टेस का व्लॉग या सोशल मीडिया पोस्ट देखा है, तो आपके मन में भी यह सवाल आया होगा कि जब वे हर महीने कई देशों की यात्रा करती हैं, तो क्या उनके पासपोर्ट पर हर बार इमिग्रेशन की मुहर लगती है? आखिर उनका पासपोर्ट तो कुछ ही समय में भर जाएगा. इसका जवाब थोड़ा दिलचस्प है.

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क्या भारतीय एयर होस्टेस को भी इमिग्रेशन से गुजरना पड़ता है?

हां. एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर या किसी भी अन्य भारतीय एयरलाइन की एयर होस्टेस जब अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर जाती हैं, तो उन्हें संबंधित देश के इमिग्रेशन नियमों का पालन करना होता है. हालांकि, अधिकांश अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर एयरलाइन क्रू के लिए अलग क्रू इमिग्रेशन या क्रू लेन की व्यवस्था होती है, जिससे उनकी प्रक्रिया सामान्य यात्रियों की तुलना में तेज हो जाती है. ICAO और IATA

क्रू इमिग्रेशन का मतलब है एयरलाइन के पायलट और केबिन क्रू (एयर होस्टेस/फ्लाइट अटेंडेंट) के लिए इमिग्रेशन की विशेष प्रक्रिया.यानी, जब कोई अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट किसी दूसरे देश में पहुंचती है, तो यात्रियों की तरह क्रू को भी इमिग्रेशन नियमों का पालन करना पड़ता है. लेकिन कई एयरपोर्ट पर उनके लिए अलग काउंटर या अलग लेन होती है, ताकि ड्यूटी पर मौजूद क्रू की जांच जल्दी हो सके और अगली उड़ान में देरी न हो.

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हालांकि, यह सुविधा हर एयरपोर्ट या हर देश में नहीं होती. कुछ जगहों पर क्रू भी सामान्य यात्रियों की तरह ही इमिग्रेशन प्रक्रिया से गुजरता है.

क्या हर बार पासपोर्ट पर मुहर लगती है?

इसका जवाब है-नहीं, हर बार नहीं.

यह पूरी तरह उस देश के इमिग्रेशन नियमों पर निर्भर करता है. कई देशों में एयरलाइन क्रू की एंट्री और एग्जिट विशेष क्रू प्रक्रिया या डिजिटल सिस्टम के जरिए दर्ज की जाती है. ऐसे मामलों में पासपोर्ट पर हर बार फिजिकल स्टैम्प नहीं लगाया जाता.

वहीं, कुछ देश आज भी भारतीय केबिन क्रू के पासपोर्ट पर एंट्री और एग्जिट की मुहर लगाते हैं. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर उड़ान में स्टैम्प लगती है या कभी नहीं लगती. नियम देश के अनुसार बदलते हैं.

विदेश पहुंचने के बाद एयर होस्टेस कहां ठहरती हैं?

अगर वापसी की उड़ान तुरंत नहीं होती, तो एयरलाइन अपने केबिन क्रू के लिए होटल की व्यवस्था करती है. इसे विमानन उद्योग में लेओवर कहा जाता है. इस दौरान क्रू को आराम करने का समय दिया जाता है ताकि वे अगली उड़ान के लिए पूरी तरह फिट रहें.

एयरलाइन आमतौर पर होटल और एयरपोर्ट से होटल तक आने-जाने की व्यवस्था भी करती है. अगर लेओवर लंबा हो और ड्यूटी शेड्यूल अनुमति दे, तो कई एयर होस्टेस खाली समय में शहर भी घूम लेती हैं. हालांकि, उन्हें तय समय पर वापस रिपोर्ट करना अनिवार्य होता है.

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क्यों नहीं होते सभी देशों में एक जैसे नियम?

हर देश की अपनी इमिग्रेशन नीति होती है. कुछ देशों ने e-Gate, बायोमेट्रिक पहचान और डिजिटल एंट्री-एग्जिट सिस्टम लागू कर दिए हैं, जबकि कुछ देशों में आज भी पासपोर्ट पर फिजिकल स्टैम्प लगाया जाता है. यही वजह है कि भारतीय एयर होस्टेस के पासपोर्ट पर हर विदेश यात्रा में मुहर लगे, ऐसा कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है.

भारतीय एयर होस्टेस भी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इमिग्रेशन प्रक्रिया से गुजरती हैं, लेकिन उनके पासपोर्ट पर हर बार मुहर लगे, यह जरूरी नहीं है. यह पूरी तरह उस देश के नियमों, एयरपोर्ट की व्यवस्था और क्रू के लिए लागू इमिग्रेशन प्रक्रिया पर निर्भर करता है.

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