'सड़क पर चप्पलें चिपक रही थीं...' उस दिन क्या हुआ था, जब भारत में पड़ी थी सबसे तेज गर्मी?

क्या आप जानते हैं साल 2016 में भारत में सबसे तेज गर्मी पड़ी थी और उस वक्त हालात इतने बुरे थे कि चप्पलें सड़क पर चिपकने लग गई थीं.

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फलोदी में 19 मई 2016 को पारा 51 डिग्री थी. (Photo: PTI) फलोदी में 19 मई 2016 को पारा 51 डिग्री थी. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:51 PM IST

उत्तर भारत में गर्मी की वजह से आग बरस रही है. कई शहरों में तापमान 45 डिग्री से ज्यादा पहुंच गया है. हर कोई गर्मी से परेशान है और दोपहर में तो घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. ये गर्मी आपको खतरनाक लग रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं 10 साल पहले इससे भी खतरनाक गर्मी पड़ी थी. उस वक्त जो तापमान दर्ज किया गया था, उसे अब तक का सबसे ज्यादा तापमान माना जाता है. यानी उस दिन भारत में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ी थी. ये दिन था 19 मई 2016. 

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दरअसल, 19 मई 2016 को राजस्थान के फलौदी में सबसे ज्यादा तापमान रिकॉर्ड किया गया था. सरकारी डेटा के हिसाब से उस दिन 51 डिग्री सेल्सियस (या 123.8 डिग्री फ़ारेनहाइट) तापमान रिकॉर्ड किया गया था, जो भारत में अब तक का सबसे ज्यादा तापमान था. इससे पहले 1886 में 50.6 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड बना था और उसके बाद 2016 में इतनी भयानक गर्मी पड़ी थी. वैसे इस बीच कभी-कभी 53 डिग्री तक के दावे किए गए थे, लेकिन मौसम विभाग ने उन्हें गलत ठहरा दिया था. ऐसे में 19 मई 2016 को ही सबसे गर्म दिन माना जाता है. 

इस दौरान सिर्फ राजस्थान में ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में काफी तेज गर्मी पड़ी थी. उस वक्त दिल्ली में पारा 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. वहीं, जयपुर, जोधपुर में भी काफी गर्मी थी और बिहार तक इसका असर था. बिहार में आग लगने और लू लगने के केस काफी स्पीड से बढ़ रहे थे. इसके बाद दावा किया गया था कि कुछ साल पहले धौलपुर में भी पारा 51 डिग्री तक पहुंचा था. 

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उस दिन क्या हुआ?

अगर फलौदी की बात करें तो उस दिन इतनी गर्मी थी कि बड़ी संख्या में लोग घरों में रहे थे. क्लाइमेट एंड डवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, उस दिन इस छोटे से शहर के करीब 50 हजार लोग घरों में रहे थे और बाहर नहीं निकले थे. बीबीसी की एक रिपोर्ट में मजदूरी करने वाले एक शख्स ने बताया कि लोग गर्मियों के दिनों में ही काम करवाना पसंद करते हैं क्योंकि गर्मी में दिन बड़े होते हैं.  उन्हें भीषण गर्मी में तपते सूरज में उन्हें काम करने की आदत हो गई है. 19 मई वाले दिन को गर्मी की बढ़ती तपिश देख मालिक ने दोपहर में काम रुकवा दिया था.

वहीं, एक शख्स ने बताया कि बढ़ती हुई गर्मी की वजह से 19 मई को वो अपने नमक के खद्दान में जाने की हिम्मत नहीं कर पाए थे. यानी बहुत से लोग अपने काम पर नहीं गए थे. सिर्फ राजस्थान ही नहीं, राजस्थान के बाहर भी कुछ ऐसे हालात थे. वहां तापमान भले ही 51 डिग्री रिकॉर्ड नहीं हुआ, लेकिन गर्मी ने कहरा बरपाया था. 

दोपहर में खाना बनाने की थी मनाही

सीडीकेएन की ही रिपोर्ट में बताया गया है कि तेज गर्मी की वजह से गुजरात के वालसाड में सड़क इतनी गर्म थी कि लोगों की चप्पल सड़क पर चिपक रही थी. इसके अलावा पटना में इतने बुरे हालात थे कि बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने ग्रामीण इलाकों में सुबह नौ बजे के बाद और शाम छह बजे से पहले खाना न बनाने और पूजा-हवन न करने की सलाह दी थी.

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बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि गेहूं का भूसा और डंठल जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी. गर्मी की वजह से राज्य में आग लगने की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ऐसा किया गया था.
 

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