गर्मी के मौसम में नारियल पानी सबसे पसंदीदा प्राकृतिक पेय पदार्थों में से एक माना जाता है. डॉक्टर भी इसे शरीर में पानी की कमी दूर करने और इलेक्ट्रोलाइट्स बनाए रखने के लिए पीने की सलाह देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिल्ली में 80 से 100 रुपये में मिलने वाला एक नारियल पानी आखिर उन राज्यों में कितने का बिकता होगा, जहां नारियल की सबसे ज्यादा खेती होती है?
आइए जानते हैं कि दिल्ली, कर्नाटक और केरल में नारियल पानी की कीमतों में इतना अंतर क्यों होता है. आखिर दिल्ली में क्यों नारियल पानी महंगा मिलता है? दिल्ली में सड़क किनारे नारियल पानी आमतौर पर 60 से 80 रुपये में मिलता है. वहीं कुछ इलाकों और प्रीमियम बाजारों में इसकी कीमत 100 से 120 रुपये तक भी पहुंच जाती है.
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दिल्ली में नारियल की खेती नहीं होती. यहां बिकने वाले अधिकांश नारियल दक्षिण भारत के राज्यों जैसे कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से ट्रकों के जरिए लाए जाते हैं.ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज, खराब होने का जोखिम और लोकल नारियल बेचने वालों का मार्जिन जोड़ने के बाद कीमत काफी बढ़ जाती है.
कर्नाटक में कितना मिलता है नारियल पानी?
कर्नाटक देश के सबसे बड़े नारियल उत्पादक राज्यों में शामिल है. यहां बेंगलुरु, मैसूर और तटीय इलाकों में नारियल आसानी से उपलब्ध होता है. स्थानीय बाजारों और सड़क किनारे स्टॉल पर एक नारियल पानी आमतौर पर 25 से 40 रुपये में मिल जाता है. वहीं बड़े शहरों या टूरिस्ट स्पॉट पर इसकी कीमत 40 से 50 रुपये तक भी हो सकती है.यानी दिल्ली की तुलना में यहां नारियल पानी लगभग आधी कीमत पर मिल सकता है.
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वहीं केरल को लंबे समय से 'नारियल की धरती' कहा जाता है. राज्य के नाम की उत्पत्ति को भी कई लोग नारियल के पेड़ों से जोड़कर देखते हैं. यहां नारियल की भरपूर पैदावार होती है. इसी वजह से स्थानीय बाजारों में नारियल पानी की कीमत आमतौर पर 20 से 40 रुपये के बीच रहती है.ग्रामीण इलाकों में कई बार इससे भी कम कीमत पर नारियल पानी मिल जाता है. हालांकि, टूरिस्ट प्लेस और शहरों में कीमत थोड़ी ज्यादा हो सकती है.
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नारियल की कीमतों में इस अंतर के पीछे कई वजहें हैं. उत्पादन वाले राज्यों में नारियल आसानी से उपलब्ध होता है. वहां ट्रांसपोर्टेशन खर्च बहुत कम लगता है. सप्लाई ज्यादा होने से कीमत कंट्रोल में रहती है. दिल्ली जैसे राज्यों में लंबी दूरी से माल पहुंचाना पड़ता है. बीच में कई लेवल पर लागत और मुनाफा जुड़ जाता है.
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