क्या सही में यहां लड़कियों को शादी के लिए नहीं मिल रहे लड़के?

इन दिनों इंटरनेट पर कई ऐसे दावों की चर्चा होती दिख जाती है, जिन पर आसानी से भरोसा नहीं होता है. ऐसा ही दावा एक देश को लेकर किया जा रहा है कि वहां लड़कियों को शादी के लिए लड़के नहीं मिल रहे हैं. ऐसे में जानते हैं कि इस दावे में कितना दम है?

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इस देश में पुरुषों से ज्यादा दिनों तक जीवित रहती है महिलाएं (Photo - Pexels) इस देश में पुरुषों से ज्यादा दिनों तक जीवित रहती है महिलाएं (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:06 PM IST

सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे दावे देखने को मिल जाते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे देश हैं जहां लड़कियों की संख्या लड़कों से इतनी ज्यादा है कि उन्हें शादी के लिए साथी नहीं मिल रहे.  क्या वास्तव में वहां की महिलाएं सिर्फ इसलिए विदेशों में शादी कर रही हैं क्योंकि देश में पुरुषों की कमी है? आइए समझते हैं कि इस दावे के पीछे कितनी सच्चाई है.

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हाल के दिनों में ऐसा ही दावा यूरोप के देश लिथुआनिया को लेकर भी किया जा रहा है. यूरोप के बाल्टिक क्षेत्र में स्थित लिथुआनिया उन देशों में शामिल है जहां महिलाओं की आबादी पुरुषों से थोड़ी ज्यादा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 53 फीसदी है.

यानी हर 100 लोगों में लगभग 53 महिलाएं और 47 पुरुष हैं. हालांकि यह अंतर इतना बड़ा नहीं है कि यह कहा जाए कि महिलाओं को बड़े पैमाने पर शादी के लिए पुरुष नहीं मिल रहे हैं.

महिलाओं की संख्या ज्यादा क्यों है?
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण महिलाओं की लंबी जीवन प्रत्याशा यानी लाइफ एक्सपेक्टेंसी है. लिथुआनिया में महिलाएं औसतन पुरुषों की तुलना में करीब 9 साल अधिक जीवित रहती हैं. विशेषज्ञ इसके लिए धूम्रपान, शराब के अधिक सेवन, खान-पान की आदतों और स्वास्थ्य संबंधी अन्य कारणों को जिम्मेदार मानते हैं.

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यही वजह है कि 65 साल से अधिक उम्र की आबादी में महिलाओं की संख्या काफी अधिक दिखाई देती है. कई रिपोर्टों के मुताबिक इस आयु वर्ग में लगभग दो-तिहाई आबादी महिलाओं की है. क्योंकि, लिथुआनिया में अधिकतर पुरुषों की मृत्यु महिलाओं से पहले हो जाती है. इसलिए एक उम्र सीमा के बाद महिलाओं की जनसंख्या वहां ज्यादा है.   

यूक्रेन युद्ध का भी पड़ा असर
हाल के वर्षों में यूक्रेन युद्ध के बाद बड़ी संख्या में शरणार्थी लिथुआनिया पहुंचे हैं. इनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक रही है. बताया जाता है कि देश में आए हजारों यूक्रेनी शरणार्थियों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा थी. इससे भी कुल आबादी में महिलाओं का अनुपात कुछ बढ़ गया.

क्या शादी के लिए साथी मिलना मुश्किल है?
कुछ हद तक हां, लेकिन तस्वीर उतनी सरल नहीं है जितनी सोशल मीडिया पर दिखाई जाती है. लिथुआनिया और उसके पड़ोसी देशों जैसे लातविया, एस्टोनिया और बेलारूस में कई सामाजिक और जनसांख्यिकीय बदलाव देखने को मिले हैं. कम होती आबादी, युवाओं का दूसरे देशों में पलायन और ग्रामीण इलाकों से बड़े शहरों की ओर जाना भी रिश्तों और विवाह के अवसरों को प्रभावित करता है.

ऐसे में कुछ महिलाओं को अपनी पसंद का जीवनसाथी ढूंढने में कठिनाई हो सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में पुरुषों की भारी कमी हो गई है या महिलाओं के लिए शादी करना असंभव हो गया है.

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कई महिलाएं विदेशों में भी तलाश रही हैं जीवनसाथी
ग्लोबलाइजेशन और इंटरनेट के दौर में अब रिश्ते सिर्फ एक शहर या देश तक सीमित नहीं रह गए हैं. लिथुआनिया की कुछ महिलाएं भी पढ़ाई, नौकरी या व्यक्तिगत पसंद के कारण दूसरे देशों के लोगों से रिश्ते बना रही हैं.

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इस दौरान उन्हें नई भाषा, नई संस्कृति और अलग जीवनशैली जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. फिर भी कई महिलाएं बेहतर अवसरों और अपनी पसंद के साथी की तलाश में देश की सीमाओं से बाहर जाने का फैसला कर रही हैं.

सिर्फ लिथुआनिया की नहीं है यह कहानी
जेंडर इंबैलेंस या लैंगिक अनुपात में असंतुलन केवल लिथुआनिया तक सीमित नहीं है. बाल्टिक क्षेत्र के कई देशों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है. इनमें लातविया का नाम अक्सर सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है.

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी देश में महिलाओं की संख्या ज्यादा होने का मतलब यह नहीं होता कि वहां हर महिला को शादी के लिए साथी नहीं मिल रहे हैं. विवाह और रिश्ते केवल जनसंख्या के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत पसंद पर भी निर्भर करते हैं.

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लिथुआनिया में महिलाओं की संख्या पुरुषों से जरूर अधिक है, लेकिन यह कहना कि वहां लड़कियों को शादी के लिए लड़के ही नहीं मिल रहे, पूरी तरह सही नहीं है. महिलाओं की अधिक आबादी के पीछे लंबी जीवन प्रत्याशा, शरणार्थियों की बढ़ती संख्या और अन्य सामाजिक कारण हैं. हां, कुछ लोगों के लिए उपयुक्त जीवनसाथी ढूंढना चैलेंज हो सकता है, लेकिन इसे पूरे देश की शादी व्यवस्था का संकट कहना अतिशयोक्ति होगी. 

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