आज के दिन ही 5 मार्च 1770 को बोस्टन की एक ठंडी रात में कुछ नाराज नौजवाों ने अकेले खड़े एक ब्रिटिश संतरी पर बर्फ के गोले फेंके. उसके बाद जो हुआ वह इतिहास है. क्योंकि, यहीं से अमेरिका की क्रांति की आग भड़की थी और इस घटना ने चिंगारी का काम किया था. इतिहास में यह घटना बोस्टन नरसंहार के नाम से जानी जाती है. इसके बाद से ही अंग्रेजों का खुला विरोध शुरू हो गया था.
मैसाचुसेट्स के बोस्टन शहर में काफी बर्फबारी हुई थी. सड़के सफेद चादर से ढंकी हुई थी और लोगों के मन में इस बात का गुस्सा भरा था कि उनके शहर पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था. रात 8 बजे के करीब शहर के किंग स्ट्रीट पर कस्टम हाउस के पास से कुछ स्थानीय युवक गुजर रहे थे. तभी उनकी नजर वहां पहरा दे रहे एक ब्रिटिश सैनिक पर ह्यूग व्हाइट पड़ी. जोशील युवकों की उस सिपाही से बहस शुरू हो गई.
धीरे-धीरे आसपास के लोग जमा होते गए. इसी बीच एक युवक ने उस सिपाही पर एक बर्फ का गोला फेंक दिया. जैसे-जैसे बहस और धमकियां बढ़ती गईं, व्हाइट ने अतिरिक्त सहायता के लिए पुकार लगाई. फिर दूसरे अंग्रेज सिपाही भी वहां पहुंच गए और स्थानीय लोगों को वहां से जाने को कहा, लेकिन लोगों ने सिपाहियों पर एक के बाद एक बर्फ के गोले फेंकने शुरू कर दिए. इसके जवाब में वहां मदद के लिए पहुंचे कप्तान थॉमस प्रेस्टन और उनके कुछ साथी सिपाहियों ने हाथापाई शुरू कर दी.
इसी दौरान किसी ने एक सैनिक के सिर पर डंडा दे मारा और ब्रिटिश सैनिकों ने भी गोलियां चलानी शुरू कर दी. इस गोलीबारी में पांच लोग मारे गए और आधा दर्जन से ज्यादा घायल हो गए. बोस्टन नरसंहार ने ब्रिटेन विरोधी भावना को और बढ़ा दिया.
इस तरह सिर्फ एक बर्फ के गोले ने अमेरिकी क्रांति को जन्म दिया. इसमें कोई संदेह नहीं है कि औपनिवेशिक आक्रोश के बाद ब्रिटिश राज ने मैसाचुसेट्स को क्रांतिकारी भावना के केंद्र के रूप में माना और पूरे अमेरिका में क्रांति की आग भड़क उठी. स्टैम्प एक्ट का विरोध करने के लिए 1765 में गठित देशभक्ति समूह, संस ऑफ लिबर्टी ने "बोस्टन नरसंहार" को अमेरिकी स्वतंत्रता की लड़ाई और बोस्टन से ब्रिटिश सैनिकों को हटाने का एक उचित कारण बताया.
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