धराली आपदा: 1 साल बाद भी नहीं मिटे जख्म, आज भी याद आती है खीरगंगा की तबाही  

उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त 2025 की विनाशकारी आपदा को एक वर्ष पूरा होने जा रहा है, लेकिन तबाही की यादें आज भी जिंदा हैं. कई परिवार अब भी लापता परिजनों के अंतिम सुराग का इंतजार कर रहे हैं, जबकि पुनर्वास और स्थायी सुरक्षा कार्य अभी अधूरे हैं.

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1 साल बाद भी नहीं मिटे जख्म, आज भी याद आती है खीरगंगा की तबाही  (Photo: itg) 1 साल बाद भी नहीं मिटे जख्म, आज भी याद आती है खीरगंगा की तबाही  (Photo: itg)

ओंकार बहुगुणा

  • धाराली,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:04 AM IST

बीते साल 2025 में 5 अगस्त को धराली क्षेत्र में आई विनाशकारी आपदा को एक वर्ष पूरा होने जा रहा है, लेकिन उस दिन की भयावह तस्वीरें आज भी स्थानीय लोगों के जेहन में ताजा हैं. साल 2025 में खीरगंगा में आए भीषण मलबे और सैलाब ने कुछ ही मिनटों में धराली का भूगोल बदल दिया. देखते ही देखते होटल, मकान, दुकानें और अन्य निर्माण मलबे में समा गए, जबकि गंगोत्री धाम की ओर जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग भी बुरी तरह से तबाह हो गया.

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आपदा के दौरान राहत एवं बचाव अभियान कई दिनों तक सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, बीआरओ तथा अन्य एजेंसियों द्वारा चलाया गया. बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की आशंका जताई गई थी. जिसमें 07 मृत घोषित किए गए थे जबकि 53 लापता माने गए थे जिनमें से कई को मृत्यु भी घोषित किया गया लेकिन डेढ़ बोडी आज तक नहीं मिली. कई परिवार आज भी अपने परिजनों के अंतिम सुराग की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

धराली के स्थानीय लोग बताते हैं कि आपदा ने केवल भवन और कारोबार ही नहीं छीने, बल्कि वर्षों की मेहनत, यादें और आजीविका भी मलबे में दफन हो गई. आज भी आपदा स्थल पर खड़े होकर उस दिन की विभीषिका सहज ही महसूस की जा सकती है.

यदि वर्तमान स्थिति की बात करें तो गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग को मलबे के ऊपर कटिंग कर अस्थायी रूप से यातायात के लिए रास्ता तैयार कर दिया गया है, जिससे आवागमन सुचारु है. हालांकि, प्रभावित क्षेत्र के स्थायी उपचार, सुरक्षा कार्यों तथा विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया अभी भी पूरी नहीं हो सकी है. स्थानीय लोग उम्मीद जता रहे हैं कि आपदा की पहली बरसी तक सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़े कार्यों में और तेजी आएगी, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.

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धराली की यह त्रासदी हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्क रहने और संवेदनशील क्षेत्रों में दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता की भी याद दिलाती है. एक वर्ष बाद भी मलबे के निशान और उजड़े घर उस भयावह दिन की मूक गवाही दे रहे हैं.

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