चमोली: ग्लेशियर में दरार पड़ने की ग्रामीणों ने जताई आशंका, वैज्ञानिकों ने किया ऋषिगंगा का हवाई सर्वे

उत्तराखंड में वैज्ञानिकों की एक टीम ने ऋषिगंगा में एक ग्लेशियर का एरियल सर्वे किया है. चमोली के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों ने सूचना दी थी कि ग्लेशियर टूटने के निशान बन रहे हैं, ऐसे में बड़ा हादसा हो सकता है. टीम सरकार को रिपोर्ट भेजेगी.

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चमोली में वैज्ञानिकों ने किया ग्लेशियर का हवाई सर्वे (सांकेतिक तस्वीर-PTI) चमोली में वैज्ञानिकों ने किया ग्लेशियर का हवाई सर्वे (सांकेतिक तस्वीर-PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 मई 2021,
  • अपडेटेड 11:13 AM IST
  • ग्लेशियर का वैज्ञानिकों ने किया हवाई सर्वे
  • ग्रामीणों ने ग्लेशियर में दरारें पड़ने की शिकायत की थी

उत्तराखंड में वैज्ञानिकों की एक टीम ने चमोली जिले में ऋषिगंगा के उद्गम स्थल के पास के ग्लेशियर का हवाई सर्वे किया है. शनिवार को स्थानीय लोगों ने सूचना दी थी कि ग्लेशियर में दरारें नजर आ रही हैं. वैज्ञानिकों की यह टीम जल्द सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक उत्तराखंड के डीजीपी ने अशोक कुमार ने इस बात की सूचना दी है. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर का हवाई सर्वे किया था, एसडीआरएफ से मिली जानकारी के मुताबिक ऋषिगंगा ग्लेशियर में किसी भी तरह की गंभीर स्थिति नहीं है.

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दरअसल चमोली हादसे के बाद ग्रामीणों लगातार ग्लेशियर टूटने का डर बना हुआ है. इसलिए कुछ लोगों ने दरारें पड़ने की आशंका प्रशासन से जाहिर की, जिसके बाद वैज्ञानिकों की एक टीम ने ग्लेशियर का हवाई सर्वे किया. अभी किसी भी तरह की गंभीर स्थिति नजर नहीं आ रही है.

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आपदा का केंद्र बना है चमोली

उत्तराखंड का चोमली जिला लगातार आपदा का केंद्र बना हुआ है. हाल ही अप्रैल में भारत चीन सीमा को जोड़ने वाली सड़क सुमना-2 पर ग्लेशियर टूट कर गिरा था. भारी बर्फबारी की वजह से यह हादसा हुआ था. स्थिति इतनी गंभीर थी कि ऋषिगंगा नदी का जल स्तर 2 फुट तक बढ़ गया था.

चमोली हादसे का अब भी सताता है डर

चमोली के लोग अब भी 7 फरवरी को हुए हादसे को नहीं भूल पाए हैं. ग्लेशियर टूटने की वजह से 205 लोग लापता हो गए थे, वहीं 70 से ज्यादा लोगों ने हादसे में अपनी जान गंवा दी थी. ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था और सरकार की कई योजनाएं भी प्रभावित हुई थीं.

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