उत्तराखंड: 34 यात्रियों की जान बचाने के लिए ड्राइवर ने दे दी अपनी कुर्बानी, ब्रेक फेल होने पर किया ये काम

उत्तराखंड के चंपावत में एक रोडवेज बस के ब्रेक फेल होने पर चालक बेनीराम थ्वाल ने अपनी सूझबूझ से बड़ा हादसा टाल दिया. धारचूला से टनकपुर जा रही बस को उन्होंने पहाड़ी की ओर मोड़कर रोक दिया, जिससे 34 यात्रियों की जान बच गई. हालांकि, टक्कर के दौरान वह बस से बाहर गिर गए और पहिये के नीचे आने से उनकी मौत हो गई. हादसे में केवल एक महिला को मामूली चोटें आईं. चालक की बहादुरी की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है.

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घटनास्थल पर मौजूद भीड़. घटनास्थल पर मौजूद भीड़.

aajtak.in

  • चंपावत,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:44 PM IST

उत्तराखंड के चंपावत जिले में एक रोडवेज बस चालक ने अपनी सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए 34 यात्रियों की जान बचा ली, लेकिन इस दौरान खुद की जान गंवा बैठा. हादसा बुधवार सुबह करीब 10 बजे ऑल वेदर रोड पर मरोड़ाखान के पास हुआ.

जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड परिवहन निगम की बस धारचूला से टनकपुर जा रही थी. रास्ते में ढलान वाले हिस्से पर बस के ब्रेक अचानक फेल हो गए. बस में सवार यात्रियों की जान खतरे में देख चालक बेनीराम थ्वाल (49) ने बड़ा फैसला लिया और बस को सड़क किनारे पहाड़ी की ओर मोड़ दिया, जिससे वाहन रुक गया और बड़ा हादसा टल गया. हालांकि, टक्कर के दौरान चालक बस से बाहर जा गिरा और बस के अगले पहिये के नीचे आ गया. मौके पर ही उसकी मौत हो गई.

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पुलिस के अनुसार, बस में सवार 34 यात्रियों में से केवल एक महिला को मामूली चोटें आई हैं, जबकि बाकी सभी यात्री सुरक्षित हैं. घायल महिला का उपचार लोहाघाट उप-जिला अस्पताल में चल रहा है.

उत्तराखंड परिवहन निगम के टनकपुर मंडल के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक सुरेश पांडे ने बताया कि चालक ने अपनी जान की परवाह किए बिना बस को पहाड़ी से टकराकर रोकने का निर्णय लिया, जिससे दर्जनों यात्रियों की जान बच गई. इस घटना के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है और चालक बेनीराम थ्वाल की बहादुरी की हर ओर सराहना की जा रही है.

एक ओर बस चालक बेनीराम थ्वाल की मौत से उनके परिवार, सहकर्मियों और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है, वहीं दूसरी ओर उनकी बहादुरी और सूझबूझ की हर तरफ सराहना हो रही है. लोगों का कहना है कि अगर चालक ने समय रहते साहसिक फैसला न लिया होता तो बड़ा हादसा हो सकता था. अपनी जान की परवाह किए बिना 34 यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले बेनीराम को लोग सच्चा नायक और कर्तव्यनिष्ठ चालक बता रहे हैं. उनकी वीरता की चर्चा पूरे उत्तराखंड में हो रही है.

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