सिलक्यारा टनल का काम अंतिम चरण में... चारधाम यात्रा होगी आसान, 15 मिनट में होगा डेढ़ घंटे का सफर

उत्तरकाशी की सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग परियोजना अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. सुरंग का आर-पार कार्य पूरा हो चुका है. फिलहाल इसके भीतर वॉल स्ट्रेंथनिंग, फेंसिंग और लाइनिंग का काम चल रहा है. प्रशासन के अनुसार, यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो इस साल के अंत तक चारधाम यात्रा और स्थानीय आवागमन को बड़ी राहत मिलेगी.

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सिलक्यारा सुरंग प्रोजेक्ट अंतिम दौर में. (Photo: ITG) सिलक्यारा सुरंग प्रोजेक्ट अंतिम दौर में. (Photo: ITG)

ओंकार बहुगुणा

  • उत्तरकाशी,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:04 PM IST

बहुचर्चित सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. सुरंग का आर-पार का काम पूरा हो चुका है. फिलहाल इसके भीतर वॉल स्ट्रेंथनिंग, फेंसिंग और लाइनिंग जैसे काम चल रहे हैं. जिला प्रशासन के अनुसार, यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार चलता रहा तो यह सुरंग वर्ष 2026 के अंत तक आम लोगों के लिए पूरी तरह तैयार हो सकती है.

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जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सुरंग के अंदर चल रहे कार्यों का जायजा लिया और बताया कि फिलहाल सुरक्षा से जुड़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सुरंग के सिविल वर्क के सितंबर तक पूरा होने की संभावना है, जिसके बाद परीक्षण और तकनीकी प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी. सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद सुरंग को वाहनों के लिए खोला जाएगा.

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सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग के चालू होने से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी करीब 26 किलोमीटर कम हो जाएगी. इससे चारधाम यात्रा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आवाजाही भी बेहद आसान हो जाएगी. वर्तमान में सिलक्यारा से बड़कोट तक का सफर राड़ी टॉप होकर तय किया जाता है, जिसमें लगभग डेढ़ घंटे का समय लगता है. सुरंग के संचालन के बाद यही दूरी मात्र 15 मिनट में तय की जा सकेगी.

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यह सुरंग खास तौर पर चारधाम यात्रा के दौरान होने वाले भारी जाम और बर्फबारी की समस्या से राहत दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी. अभी राड़ी क्षेत्र में सड़क संकरी होने के कारण यात्रा सीजन में कई-कई घंटे जाम की स्थिति बनी रहती है, जबकि सर्दियों में बर्फबारी के चलते यह मार्ग कई दिनों तक बंद रहता है. सुरंग के शुरू होने से इन परेशानियों से काफी हद तक निजात मिलने की उम्मीद है.

2023 में मिट्टी धंसने से फंस गए थे 41 मजदूर, 17 दिन चला था रेस्क्यू

बता दें कि 12 नवंबर 2023 को इसी सुरंग में निर्माण कार्य के दौरान बड़ा हादसा हुआ था, जब मिट्टी धंसने से 41 मजदूर अंदर फंस गए थे. करीब 17 दिनों तक चले चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू के बाद सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था. इस घटना के बाद कुछ समय के लिए निर्माण कार्य रोक दिया गया था.

सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग परियोजना की शुरुआत साल 2018 में करीब 1384 करोड़ रुपये की लागत से की गई थी. वर्ष 2024 के मध्य में सुरंग के भीतर जमा मलबा हटाए जाने के बाद दोबारा तेजी से काम शुरू हुआ, जो अब अपने अंतिम दौर में है. सुरंग के बनकर तैयार होने से उत्तरकाशी और आसपास के पर्वतीय इलाकों के विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

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