कैराना: काउंटिंग में हुई थी गलती, अब हटाए गए शामली के डीएम

मुख्य निर्वाचन अधिकारी एल. वेंकटेशवर लू ने बताया कि वोटों के जोड़ का अंतर 3000 था, लेकिन इससे नतीजे पर कोई फर्क नहीं पड़ा. लेकिन, एक भी वोट का जोड़ गलत होना गंभीर है. इसलिए प्रदेश सरकार को इंदर विक्रम सिंह को चुनाव प्रक्रिया से अलग रखने का निर्देश दिया गया है. 

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इंद्र विक्रम सिंह. इंद्र विक्रम सिंह.

आदित्य बिड़वई

  • लखनऊ,
  • 14 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 9:12 AM IST

उत्तर प्रदेश में 28 मई को हुए कैराना चुनाव में काउंटिंग और टेबुलेशन में गलती पाई थी. जिसके बाद मंगलवार को शामली के जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह को हटा दिया गया है.

यही नहीं, आयोग ने गलती को गंभीरता से लेते हुए 2009 बैच के अफसर को चेतावनी जारी करने के निर्देश भी यूपी सरकार को दिए हैं. आयोग के निर्देश पर इंद्र विक्रम सिंह की जगह स्थानीय निकाय के निदेशक को शामली का डीएम बनाया गया है.

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इस बारे में मुख्य निर्वाचन अधिकारी एल. वेंकटेशवर लू ने बताया कि वोटों के जोड़ का अंतर 3000 था, लेकिन इससे नतीजे पर कोई फर्क नहीं पड़ा. लेकिन, एक भी वोट का जोड़ गलत होना गंभीर है. इसलिए प्रदेश सरकार को इंदर विक्रम सिंह को चुनाव प्रक्रिया से अलग रखने का निर्देश दिया गया है.  

बता दें कि सीट 2014 में बीजेपी के हुकूम सिंह ने जीती थी, लेकिन उनके निधन के बाद 28 मई को कैराना में उपचुनाव हुआ था, जिसमें बीजेपी के खिलाफ संयुक्त विपक्ष ने चुनाव लड़ा था.

राष्ट्रीय लोक दल की तबस्सुम ने की थी जीत हासिल...

31 मई को घोषित नतीजे में विपक्ष की संयुक्त प्रत्याशी के तौर पर राष्ट्रीय लोक दल की तबस्सुम बेगम ने बीजेपी की मृंगाका सिंह को 44618 वोटों से हरा दिया था.

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क्या गलतियां आई सामने...

सूत्रों का कहना है कि की जांच में करीब 3000 वोटों की गणना में गड़बड़ी मिली थी. इसके अलावा टेबुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फार्म 21-ई में हर राउंड के वोटों की प्रत्याशीवार एंट्री में इसमें भी गलतियां सामने आई. रिटर्निंग अफसर के तौर पर इसकी सीधी जिम्मेदारी डीएम की थी.

पक्ष-विपक्ष के निशाने पर रहे थे इंद्र विक्रम...

कैराना उपचुनाव के बाद इंद्र विक्रम सिंह पक्ष- विपक्ष के निशाने पर थे. महागठबंधन के नेताओं ने दोनों ही डीएम पर ईवीएम व वीवीपेट खराब होने व भाजपा प्रत्याशी को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया था. बाकायदा मुख्य चुनाव आयुक्त से दिल्ली में विपक्ष के नेताओं ने लिखित शिकायत की थी.

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