शशिकला पर आज SC का फैसला, AG की सलाह- दोनों गुटों को दें शक्ति परीक्षण का मौका

एजी मुकुल रोहतगी ने राज्यपाल सी विद्यासागर राव को राय दी है कि इन दोनों में किसे बहुमत प्राप्त है, यह तय करने के वास्ते शक्ति परीक्षण के लिए विधानसभा का सत्र बुलाया जाए.

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अटॉर्नी जनरल ने दी फ्लोर टेस्ट की सलाह अटॉर्नी जनरल ने दी फ्लोर टेस्ट की सलाह

अमित कुमार दुबे

  • चेन्नई,
  • 13 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 12:17 AM IST

तमिलनाडु में चल रहा राजनीतिक ड्रामा अब शीघ्र समापन की ओर बढ़ सकता है क्योंकि अटार्नी जनरल (एजी) मुकुल रोहतगी ने सोमवार को तमिलनाडु के राज्यपाल को मुख्यमंत्री पद के दो प्रतिद्वंद्वी अन्नाद्रमुक दावेदारों- पनीरसेल्वम और वी के शशिकला के राजनीतिक भाग्य का फैसला करने के लिए शक्ति परीक्षण के वास्ते विधानसभा का सत्र एक हफ्ते के अंदर बुलाने की सलाह दी. वहीं शशिकला सोमवार की रात रिसॉर्ट में पार्टी के सभी विधायकों के साथ ही रुकी हुई हैं.

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विधानसभा सत्र बुलाने की सलाह
एजी मुकुल रोहतगी ने राज्यपाल सी विद्यासागर राव को राय दी है कि इन दोनों में किसे बहुमत प्राप्त है, यह तय करने के वास्ते शक्ति परीक्षण के लिए विधानसभा का सत्र बुलाया जाए. सूत्रों ने बताया कि रोहतगी ने कहा है कि राज्यपाल को एक हफ्ते के अंदर विशेष सत्र बुलाना चाहिए और शक्ति परीक्षण कराना चाहिए जैसा कि जगदंबिका पाल प्रकरण में उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था.

अटार्नी जनरल ने जगदंबिका पाल से जुड़े उच्चतम न्यायालय के 1998 के फैसले का हवाला दिया. तब शीर्ष अदालत ने आदेश दिया था कि दो दावेदारों- पाल एवं कल्याण सिंह में किन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए बहुमत प्राप्त है, यह तय करने के लिए सदन में शक्ति परीक्षण कराया जाए.

शक्ति परीक्षण से होगी तस्वीर साफ
सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने से राय मांगी थी. रोहतगी ने जगदंबिका पाल से जुड़े उच्चतम न्यायालय के 1998 के फैसले का हवाला दिया. सूत्रों के अनुसार सदन में शक्ति परीक्षण की राय इसलिए दी गयी है क्योंकि दोनों ही दावेदार एक ही दल से हैं तथा यह तय करने के लिए दोनों के बीच आमना-सामना होगा कि विधानसभा में किसे बहुमत प्राप्त है.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निगाह
वैसे, तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत जे जयललिता की लंबे समय तक मित्र रहीं शशिकला का राजनीतिक भाग्य पूरी तरह आय के अज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा जो मंगलवार को सुबह साढ़े 10 बजे आने की संभावना है. जयललिता, शशिकला और उनके दो रिश्तेदारों को कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा दोषमुक्त करने के फैसले को कर्नाटक सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे रखी है.

इस महीने पांच फरवरी को अन्नाद्रमुक विधायक दल की नेता चुनी गईं शशिकला दोषसिद्धि की स्थिति में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाएंगी और इस तरह मुख्यमंत्री बनने की उनकी महत्वाकांक्षा पर ठंडा पानी फिर जाएगा. अगर वह बरी हो जाती हैं तो वह शक्ति परीक्षण का सामना करने के लिए और जोरदार ढंग से सामने आएंगी.

शशिकला दोषी होने पर फिर क्या?
शशिकला अगर दोषी करार दी जाती हैं तो उन्हें सीएम पद के लिए किसी अन्य का चयन करना होगा. इस मामले में अति लोकप्रिय नेता रहीं दिवंगत जयललिता मुख्य आरोपी हैं. मुश्किलों में फंसी शशिकला चेन्नई के बाहरी इलाके में एक रिसोर्ट में ठहरे हुए 100 विधायकों से सोमवार को लगातार तीसरे दिन मिलीं.

विधायकों को कैद करके रखने का आरोप
शशिकला ने 9 फरवरी को सरकार बनाने का दावा किया था. पार्टी महासचिव शशिकला उन्हें समर्थन कर रहे 129 विधायकों को एकजुट करने की जद्दोजहद में जुटी हैं क्योंकि उनमें से 6 विधायक में शामिल हो चुके हैं. 11 सांसद भी पन्नीरसेल्वम का समर्थन कर रहे हैं. पन्नीरसेल्वम गुट इस बात पर जोर दे रहा है कि एआईएडीएमके के अधिकांश विधायकों को शशिकला ने एक रिसॉर्ट में कैद कर रखा है, वहीं सरकारी वकील ने मद्रास उच्च न्यायालय से कहा है कि विधायकों को अवैध रूप से कैद कर नहीं रखा गया है.

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शशिकला का पन्नीरसेल्वम पर वार
तमिलनाडु में 234 सदस्यीय विधानसभा है. इन दो गुटों के बीच चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच शशिकला ने कहा कि उन्होंने पनीरसेल्वम को मुख्यमंत्री पद से इसलिए हटवाया क्योंकि उन्होंने पार्टी की कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ साठगांठ कर ली थी. उन्होंने यहां जयललिता के पोएस गार्डन निवास पर पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, यह पनीरसेल्वम ही थे जिन्होंने हमें ऐसा करने को मजबूर किया, हमने खुद ऐसा नहीं किया और इस तरह चीजें हुई. मैं उन्हें पद पर रहने देती क्योंकि मेरी मुख्यमंत्री बनने की आकांक्षा नहीं थी और यह सच्चाई है.

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