इस कारण बिजनेस टाइकून से 'किंग ऑफ बैड टाइम्स' बन गए विजय माल्या

शराब उद्योग से तेजी से पैसा बनाने वाले माल्या आज बैंक उद्योग के 'नन परफॉर्मिंग एसेट' संकट के प्रतीक बन गए हैं. विजय माल्या को 'किंग ऑफ गुड टाइम्स' कहा जाता था, लेकिन आज यह एक मजाक बन चुका है.

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लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए मशहूर रहे हैं विजय माल्या लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए मशहूर रहे हैं विजय माल्या

संदीप कुमार सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 10 मार्च 2016,
  • अपडेटेड 6:46 AM IST

कभी जिस विजय माल्या की रईसी और चमक-दमक वाली जिंदगी से लोग जलते थे आज उसी माल्या को लेकर सड़क से संसद तक हंगामा जारी है. देश में शराब उद्योग से पैसा बनाने और कई अन्य व्यवसायों में हाथ आजमाकार तेजी से उभरने वाले विजय माल्या आज अचानक बैड ब्वॉय के रूप में सबके सामने हैं और सरकार से लेकर तमाम एजेंसियां तलाश में जुटी हुई है. लिकर किंग के नाम से मशहूर विजय माल्या की कहानी पूरी तरह फिल्मी लगती है.

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बैंकों के 'NPA' संकट के प्रतीक बने
शराब उद्योग से तेजी से पैसा बनाने वाले माल्या आज बैंक उद्योग के ' बन गए हैं. विजय माल्या को 'किंग ऑफ गुड टाइम्स' कहा जाता था, लेकिन आज यह एक बन चुका है.

शराब का कारोबार विरासत में मिला
पॉलिटिशियन, सहारा फोर्स इंडिया, रॉयल चैलेंजर्स, मैक्डोवेल, मोहन बगान, किंगफिशर और ईस्ट बंगाल के मालिक रहे विजय माल्या का जन्म 18 दिसंबर, 1955 को हुआ था. कोलकाता में पैदा हुए माल्या के पिता विठ्ठल माल्या भी देश के जाने-माने कारोबारी थे. उनकी माता का नाम ललिता रमैया है. माल्या को शराब का बिजनेस पिता विट्ठल माल्या से विरासत में मिला था. उन्होंने देश के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थानों से लोगों को चुना और इस शराब उद्योग को एक कारपोरेट रूप दिया.

छवि बदलने के लिए कई क्षेत्रों में कोशिश
जानकार बताते हैं कि विजय माल्या चाहते थे कि लोग उन्हें शराब के बड़े व्यवसायी नहीं, बल्कि एक उद्योगपति के रूप में जानें. क्योंकि भारत में शराब व्यवसाय को अच्छी नज़रों से नहीं देखा जाता. इसलिए शायद माल्या ने इंजीनियरिंग, उर्वरक, टेलीविज़न और चार्टर विमान सेवा की कंपनियों में पैसे लगाए.

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माल्या ने जब किंगफिशर एयरलाइन शुरु किया तो खूब पैसे उड़ाए. किसी यात्री की उड़ान छूट जाने पर वे उसे उसके गंतव्य स्थान तक दूसरी एयरलाइन से भेजते थे. उन्होंने यह मान लिया कि लोग उनके फ्लाइंग फाइव स्टार होटल पर टूट पड़ेंगे. माल्या कहते- यात्रियों के लिए उन्होंने मंहगी विदेशी पत्र-पत्रिकाएं मंगवाई, पर शायद वे कभी गोदाम से बाहर निकल ही नही पाईं. कंपनी के पड़ना ही था.

झटके में फैसले लेने की आदत
बिजनेस में कुछ हटके फैसले लेने और एक झटके में नई कंपनियां खरीदने की आदत और कई बार तो बिना बही-खाते की जांच के ही फैसला लेने की वजह से माल्या लगातार संकट में फंसते रहे.

फोन पर एयर डेकन की डील
किंगफिशर एयरलाइन को अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनी बनाने के लिए माल्या ने कैप्टेन गोपीनाथ की कंपनी एयर डेकन खरीदी थी. इस बारे में एक कहानी मशहूर है कि माल्या ने अपने यॉट से गोपीनाथ को फ़ोन किया कि वो एयर डेकन खरीदना चाहते हैं. गोपीनाथ ने कहा, एक हजार करोड़ रुपए. माल्या ने एयर डेकन की और गोपीनाथ को डिमांड ड्राफ्ट भिजवा दिया.

ना कर्ज लिया ना ही डिफॉल्टर
माल्या ये कहते रहे हैं कि किंगफिशर एयरलाइंस, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स और एक मशहूर अंतरराष्ट्रीय विमानन सलाहकार से सलाह मशविरा के बाद शुरू की गई थी. अर्थव्यवस्था में उस समय उपजी स्थिति और सरकारी नीतियां कंपनी की बदहाली की वजहें रहीं. विजय माल्या ने एक बयान में कहा, 'व्यक्तिगत तौर पर मैंने कर्ज नहीं लिए हैं और .'

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लग्जरी लाइफ और रईसी जलन का कारण
आज माल्या की इमेज एक डिफॉल्टर के रूप में बन गई है. लिकर किंग के नाम से मशहूर विजय माल्या व्यापार से ज्यादा अपनी लग्जरी लाइफ, दौलत और शोहरत को लेकर चर्चा में रहते थे.


विंटेज कार्स, याट्स, हॉर्स रेस के अलावा डिफरेंट लुक्स फॉलो करने के लिए फेमस माल्या पर 17 बैंकों का करीब 9 हजार करोड़ रुपए कर्ज है. कहा जा रहा है कि वे हैं. कर्ज में डूबने के बावजूद माल्या के ऐशो आराम और पेज थ्री की पार्टीज में कोई कमी नहीं आई. बता दें कि, कर्ज अदा किए बगैर ही विदेश जाने का खुलासा बुधवार को अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में किया.

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