लालू को दोषी करार देने पर बिफरी RJD, कहा- पिछड़ी जाति से होने की मिल रही है सजा

मनोज झा ने कहा कि इस मुल्क में पहली बार ऐसा हो रहा है कि जिस व्यक्ति ने इस घोटाले पर अलर्ट किया, उसी को घेर लिया गया. इस घोटाले पर 1996 में लालू यादव ने ही एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन जब उनसे राजनीतिक तौर पर नहीं लड़ा जा सका तो इस तरह घेर लिया गया.

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लालू यादव (फाइल फोटो) लालू यादव (फाइल फोटो)

राहुल विश्वकर्मा

  • पटना,
  • 23 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 5:35 PM IST

लालू यादव पर फैसला आते ही आरजेडी ने बीजेपी पर हल्ला बोल दिया है. फैसले के कुछ ही मिनटों के भीतर आरजेडी नेता मनोज झा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस फैसले से हम सरप्राइज्ड हैं लेकिन शॉक्ड नहीं. झा ने कहा कि पिछले 22 सालों से हम इसे झेल रहे हैं.

मनोज झा ने कहा कि इस मुल्क में पहली बार ऐसा हो रहा है कि जिस व्यक्ति ने इस घोटाले पर अलर्ट किया, उसी को घेर लिया गया. इस घोटाले पर 1996 में ने ही एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन जब उनसे राजनीतिक तौर पर नहीं लड़ा जा सका तो इस तरह घेर लिया गया.

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झा ने कहा कि कमाल की बात है... तेरा निजाम है, सिल दे जुबान शायर की. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि आप लालू यादव का राजनीतिक रूप से सामना नहीं कर पा रहे थे. इसलिए उन्हें ऐसे खत्म करने की साजिश रची गई.लालू यादव को पिछड़ी जाति का होने की सजा मिल रही है.

मनोज झा ने की ओर इशारा करते हुए कहा कि कल तक जो पिंजड़ा वाला तोता था आज वो चिप पर काम कर रहा है. और इस चिप को 11 अशोका रोड से संचालित किया जा रहा है. जो इनके पास 11 अशोक रोड जाकर नतमस्तक हो जाता है वो धुल जाता है. 11 अशोक रोड पर इनके पास वॉशिंग मशीन है. जो नहीं जाता, उसे ये प्रताड़ित करते हैं.

आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद ने कहा कि इस फैसले से हम निराश हैं लेकिन हताश नहीं.

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लालू यादव समेत कुल 22 लोग देवघर चारा घोटाले में आरोपी थे, जिसमें से 16 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है, जबकि बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा और ध्रुव भगत समेत 6 लोगों को बरी कर दिया गया है.

दोषी करार देने के बाद लालू ने ट्वीट करते हुए लिखा कि बीजेपी अपनी विफल नीतियों से ध्यान भटकाने के लिए बदले और बैर की भावना से विपक्षियों की छवि बिगाड़ रही है. उन्होंने लिखा कि लालू परास्त होने वाले नहीं है.

कितनी हो सकती है सजा

लालू के वकील चितरंजन प्रसाद ने बताया कि इस मामले में यदि लालू और अन्य को दोषी ठहराया जाता है तो उन्हें अधिकतम सात साल और न्यूनतम एक साल की कैद की सजा होगी. हालांकि, सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में गबन की धारा 409 के तहत 10 साल और धारा 467 के तहत आजीवन कारावास की भी सजा हो सकती है.

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