तीन तलाक, आंगनबाड़ी वर्कर्स पर कैबिनेट ने लिए अहम फैसले

रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक के बाद अहम फैसलों की जानकारी दी.

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प्रेस कॉन्फ्रेंस करते रविशंकर प्रसाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते रविशंकर प्रसाद

भारत सिंह / हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 19 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 1:38 PM IST

केंद्र सरकार की कैबिनेट ने बुधवार को तीन तलाक से संबंधित अध्यादेश पारित कर दिया. इसके अलावा और भी कई मामलों पर केंद्रीय कैबिनेट ने अहम फैसले किए हैं. इनमें आंगनबाड़ी वर्कर्स का मानदेय बढ़ाने और देश भर के बांधों के रखरखाव के लिए पैकेज जारी करना शामिल है.

बता दें कि तीन तलाक बिल पिछले दो सत्रों से राज्यसभा में पास नहीं हो पाया था. सूत्रों की मानें तो ऐसे में अब कैबिनेट ने इस पर अध्यादेश पारित किया है. आपको बता दें कि ये अध्यादेश 6 महीने तक लागू रहेगा, जिसके बाद सरकार को दोबारा इसे बिल के तौर पर पास करवाने के लिए संसद में पेश करना होगा.

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तीन तलाक के अलावा कैबिनेट के अहम फैसले

केंद्रीय कैबिनेट ने आंगनबाड़ी वर्कर्स के लिए नए पैकेज को भी मंजूरी दी. आंगनबाड़ी वर्कर्स के मानदेय को 4500 रुपया कर दिया गया है. आंगनबाड़ी हेल्पर के मानदेय को भी बढ़ाया गया. यह  1 अक्टूबर 20018 से लागू होगा.

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने देश भर के 198 डैम की सुरक्षा और रिपेयर के लिए 3,466 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी.

इंदौर-बुधनी नई रेल लाइन को भी कैबिनेट को मंजूरी मिली. इस रेलवे योजना में 3261.82 करोड़ खर्च होंगे.

सोनिया, ममता, मायावती से की अपील

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कैबिनेट के फैसलों के बारे में पत्रकारों को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि जनवरी 2017 से लेकर सितंबर 2018 के बीच हमारे संज्ञान में तीन तलाक के 430 मामले आए हैं. बहुत ही मामूली बातों के लिए तीन तलाक दे दिया जाता है.

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उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले यूपी से 126 मामले सामने आए जबकि उसके बाद 120 मामले आए. कानून मंत्री ने कहा कि ये पूजा, धर्म या इबादत का मामला नहीं, बल्कि नारी की समानता, न्याय की गरिमा और इज्जत का मामला है.

उन्होंने कहा, 'मैं सोनिया गांधी, मायावती और ममता बनर्जी से अपील करता हूं कि पीड़ित महिलाओं के लिए तीन तलाक बिल का समर्थन करें. तीन तलाक बेधड़क चल रहा है. यह अध्यादेश देशहित में और के लिए लाया गया है. वोटबैंक की चारदीवारी से ऊपर उठकर इंसानियत और इंसाफ के लिए समर्थन करें.'

उन्होंने कहा कि जब पीड़ित पत्नी या उसके ब्लड रिलेशन या शादी से बने करीबी संबंधियों की ओर से एफआईआर की जाए. बच्चे की कस्टडी भी पीड़ित मां या पत्नी को मिलेगी और इनके लिए भत्ते की व्यवस्था मजिस्ट्रेट सुनिश्चित करवाएंगे.

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