मीटिंग में राजनाथ ने चीन को सुनाई खरी-खरी, कहा- हमारी इच्छा शक्ति पर संदेह न करें

रक्षा मंत्री ने चीनी पक्ष को सलाह दी कि चीन को भारत के साथ मिलकर जल्द से जल्द अपने सैनिकों को टकराव के सभी बिंदुओं, जिनमें पैंगोंग झील भी शामिल है, से पूर्ण रूप से वापस बुलाना चाहिए. 

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मॉस्को में चीनी रक्षा मंत्री के साथ राजनाथ सिंह की बातचीत (फोटो-पीटीआई) मॉस्को में चीनी रक्षा मंत्री के साथ राजनाथ सिंह की बातचीत (फोटो-पीटीआई)

अभि‍षेक भल्ला

  • नई दिल्ली,
  • 05 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 1:49 PM IST
  • चीन को राजनाथ सिंह ने सुनाई खरी-खरी
  • 'जिम्मेदारी का एहसास, लेकिन संकल्प पर संदेह न करें'
  • पैंगोंग समेत विवाद के सभी बिन्दू खाली करे चीन

चीन के साथ बॉर्डर पर तनाव को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच मॉस्को में हुई बैठक का कोई नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है.  चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंघे को भारत ने दो टूक कहा है कि बॉर्डर पर हमें अपनी जिम्मेदारी का एहसास है, लेकिन किसी को भी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा को लेकर भारत की इच्छा शक्ति पर तनिक भी संदेह नहीं होना चाहिए. इधर चीन ने भी कहा कि चीन अपनी जमीन नहीं खो सकता है और चीनी सेना इसकी रक्षा के लिए कटिबद्ध है. 

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन सरकार को साफ-साफ बता दिया कि LAC पर बड़े पैमाने पर चीनी सैनिकों का जमावड़ा, उनका आक्रामक व्यवहार और यथास्थिति को एकपक्षीय तरीके से बदलने की कोशिश दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का उल्लंघन है. 

बता दें कि 4 सितंबर को मॉस्को में शंघाई सहयोग संगठन के बैनर तले भारत और चीन के रक्षा मंत्री तनाव भर माहौल में बातचीत की मेज पर आए. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों के बीच लंबी और विस्तृत वार्ता हुई. 

इस दौरान राजनाथ सिंह ने अपने चीनी समकक्ष को गलवान समेत LAC पर भारत की स्थिति मजबूती से स्पष्ट कर दी. 

चीनी सेना का कदम द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन

चीन को रक्षा मंत्री ने कहा कि चीनी सेना का कदम द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर सैनिकों का जमावड़ा, आक्रामक व्यवहार और एकपक्षीय तरीके से यथास्थिति को बदलने की कोशिश द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन है. 

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हमारे संकल्प पर तनिक भी संदेह न करें

रक्षा मंत्री ने चीन को स्पष्ट रूप से कहा कि हालांकि भारतीय फौज ने बॉर्डर मैनेजमेंट को लेकर बेहद संयमित और जिम्मेदारी भरा रवैया दिखाया है, लेकिन साथ-साथ भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की हमारी निष्ठा पर तनिक भी संदेह नहीं होना चाहिए. 


पैंगोंग झील का इलाका खाली करे चीन

रक्षा मंत्री ने चीनी पक्ष को सलाह दी कि चीन को भारत के साथ मिलकर जल्द से जल्द अपने सैनिकों को टकराव के सभी बिंदुओं, जिनमें पैंगोंग झील भी शामिल है, से पूर्ण रूप से वापस बुलाना चाहिए. 

रक्षा मंत्री ने कहा कि मौजूदा  स्थिति का जिम्मेदारी पूर्वक संचालन किया जाना चाहिए और किसी को भी ऐसा एक्शन नहीं लेना चाहिए जिससे स्थिति और भी जटिल हो जाए और बॉर्डर के इलाकों में तनाव बढ़ जाए. 

रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों को कूटनीतिक और सैन्य सहयोग के जरिए LAC पर पूर्ण शांति बहाली की कोशिश करनी चाहिए और इसके लिए सैनिकों की पूरी वापसी होनी चाहिए. 

चीन अपनी जमीन नहीं खो सकता

बता दें कि इसी बैठक में चीन ने कहा था कि चीन अपनी जमीन नहीं खो सकता है. चीनी रक्षा मंत्रालय ने चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंघे के बयान का जिक्र करते हुए कहा, "चीन अपनी जमीन नहीं खो सकता और चीन की सेना पूरी तरह से अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध और समर्पित है."

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