प्रवीण तोगड़िया से छिनी VHP की कमान, 2019 में क्या करेंगे?

प्रवीण तोगड़िया पिछले कुछ वक्त से मोदी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं. 52 साल में पहली बार विहिप अध्यक्ष के चुनाव की वजह भी तोगड़िया के बगावती सुर ही बने.

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प्रवीण तोगड़िया प्रवीण तोगड़िया

जावेद अख़्तर

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 6:12 PM IST

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बयानबाजी का हर्जाना अपने समर्थित उम्मीदवार की हार के रूप में भुगतना पड़ा है. शनिवार को वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव में तोगड़िया गुट के राघव रेड्डी को शिकस्त मिली और विष्णु सदाशिवम् कोकजे वीएचपी के नए अध्यक्ष निर्वाचित हो गए. इसके साथ ही प्रवीण तोगड़िया का 32 साल पुराना विहिप का सफर समाप्त हो गया. अब सवाल ये है कि विहिप अध्यक्ष के चुनाव में परास्त होने के बाद प्रवीण तोगड़िया अगला कदम क्या उठाएंगे?

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ये सवाल इसलिए है क्योंकि प्रवीण तोगड़िया पिछले कुछ वक्त से मोदी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं. 52 साल में पहली बार विहिप अध्यक्ष के चुनाव की वजह भी तोगड़िया के बगावती सुर ही बने. चुनाव हार जाने के बाद अब माना जा रहा है कि तोगड़िया अपने विरोध के स्वर और बुलंद कर सकते हैं.

तोगड़िया ने दिए आंदोलन के संकेत

शनिवार (14 अप्रैल) को हुए चुनाव से ठीक पहले तोगड़िया ऐसे संकेत भी दे चुके हैं. एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में जब तोगड़िया से पूछा गया कि चुनाव हारने के बाद वो क्या करेंगे, तब उन्होंने राम मंदिर, कश्मीरी हिंदू, रोजगार और किसानों के मुद्दों का जिक्र करते हुए जवाब दिया कि इन सभी मुद्दों पर मोदी सरकार पिछले चार सालों में विफल रही है.

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2019 में देंगे मोदी का साथ?

2019 के आम चुनाव में तोगड़िया क्या मोदी और बीजेपी को समर्थन करेंगे, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि ये मोदी जी को तय करना है. तोगड़िया का कहना है कि अगर राम मंदिर जैसे मुद्दों पर हमारी मांग पूरी नहीं की जाती है, तो वह मोदी का साथ नहीं देंगे. उन्होंने कहा है कि ऐसी स्थिति में वो जनता की इच्छा पूरी करने वाली व्यवस्था को जिताने का काम करेंगे.

दरअसल, 2017 में अध्यक्ष पद का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से ही प्रवीण तोगड़िया नाराज चल रहे हैं. इसी साल जनवरी में वो अहमदाबाद में बेहोशी की हालत में मिले थे, जिसके बाद उन्होंने मीडिया के सामने रोते हुए खुद की जान को खतरा होने का आरोप लगाया था.

तोगड़िया लगातार राम मंदिर के मुद्दे पर भी मोदी सरकार को घेर रहे हैं. तोगड़िया ने आरोप लगाते हुए कहा है कि बीजेपी ने संसद में बहुमत हासिल करने के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने के लिए कानून बनाने के 1989 के अपने पालमपुर प्रस्ताव पर पलटी मार ली है. अब वीएचपी से बेदखल होने के बाद तोगड़िया हिंदुओं से एकजुट होने का आह्वान कर रहे हैं. वो संसद में कानून लाकर राम मंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं को एकजुट करने की बात कह रहे हैं. जिसके लिए 17 अप्रैल से उन्होंने अहमदाबाद में अनिश्चितकालीन अनशन पर जाने का ऐलान किया है.

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तोगड़िया का आरोप है कि पिछले चार सालों में न तो कोई विकास हुआ और न ही सरकार ने किया है. वो आरोप लगा रहे हैं कि सरकार हर मोर्चे पर फेल हुई है.

ऐसे में मोदी सरकार के खिलाफ लंबे वक्त से विरोधी स्वर उगल रहे प्रवीण तोगड़िया विहिप का चुनाव गंवाने के बाद बीजेपी और मोदी सरकार के लिए संकट पैदा कर सकते हैं. हालांकि, सवाल ये भी है कि केंद्र में मोदी सरकार आने से पहले हिंदुओं की आवाज माने जाने वाले तोगड़िया अब विहिप के बिना क्या देश के हिंदुओं को एकजुट कर पाने में सफल हो पाएंगे?

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