लिंगायत मुद्दे पर VHP का कांग्रेस पर निशाना, कहा- भुगतना पड़ेगा खामियाजा

सुरेंद्र जैन ने एक बयान में कहा है कि हम सभी को समान अधिकार के पक्षधर हैं. विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री सुरेंद्र जैन का कहना है कि अल्पसंख्यकवाद संविधान विरोधी तो है ही सर्वोच्च न्यायालय भी अनेक बार इस संबंध में आगाह कर चुका है.

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सिद्धारमैया सिद्धारमैया

अंकुर कुमार / अशोक सिंघल

  • नई द‍िल्ली,
  • 20 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 7:31 PM IST

कर्नाटक सरकार की लिंगायत को अलग धर्म मानकर अल्पसंख्यक मानने के निर्णय से विश्व हिंदू परिषद भी नाराज है. विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री सुरेंद्र जैन ने कहा कि अल्पसंख्यकवाद देश के लिए घातक है. सभी को समान अधिकार मिलना चाहिए, जो अधिकार अल्पसंख्यकों को दिए गए हैं, वही बहुसंख्यकों को भी होने चाहिए.

विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि कर्नाटक कांग्रेस ने समुदाय को जो हिंदू समाज से अलग करके जो वोट बैंक की राजनीति करने की कोशिश की है. समाज को बांटने की कोशिश की है, वह ठीक नहीं है. अल्पसंख्यकवाद देश के लिए घातक है. कर्नाटक कांग्रेस का यह निर्णय चुनाव पूर्व विभाजन से वोट प्राप्त करने का षड्यंत्र है और यह देश विरोधी किया गया काम है.

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सुरेंद्र जैन ने एक बयान में कहा है कि हम सभी को समान अधिकार के पक्षधर हैं. विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री सुरेंद्र जैन का कहना है कि अल्पसंख्यकवाद संविधान विरोधी तो है ही सर्वोच्च न्यायालय भी अनेक बार इस संबंध में आगाह कर चुका है. वहीं राहुल और कांग्रेस कर्नाटक में चुनाव के लि‍ए देश में विभाजन की कोशिश कर रही है. इसको विश्व हिंदू परिषद कभी बर्दाश्त नहीं करेगा. इसका पुरजोर विरोध करता है और कांग्रेस के ऐसे मंसूबों को कभी भी कामयाब नहीं होने देगा. कांग्रेस के इस तरीके के विभाजन से वोट हासिल करने के मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे.

विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि कांग्रेस वोट पाने के लिए  इनकी  मानसिकता समय-समय पर कांग्रेस दिखाती रही है. पिछले आम चुनाव के दौरान भी कांग्रेस ने जैन समाज को अलग करने का प्रयास किया और राहुल गांधी मैं कैबिनेट निर्णय से पहले ही इस की घोषणा कर दी थी.हालांक‍ि उनको उसका नुकसान उठाना पड़ा था और इस बार भी कर्नाटक चुनाव में इस निर्णय का खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा.

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BJP भी कर्नाटक सरकार के इस निर्णय का लगातार विरोध कर रही है. संसद परिसर में भी बीजेपी के नेताओं ने सिद्धारमैया सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है.

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