जानें म्यांमार सीमा पर एक्शन को सर्जिकल स्ट्राइक कहने से क्यों बच रही है भारतीय सेना

27 सितंबर को तड़के जब भारतीय फौज की एक टुकड़ी भारत-म्यांमार सीमा की निगरानी कर रही थी तभी अज्ञात उग्रवादियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी. हमारे जवानों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उग्रवादियों पर भारी गोलाबारी की और उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया.

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म्यांमार बॉर्डर पर सेना का बड़ा ऑपरेशन म्यांमार बॉर्डर पर सेना का बड़ा ऑपरेशन

कौशलेन्द्र बिक्रम सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 27 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 7:17 PM IST

बुधवार को जैसे ही म्यांमार बॉर्डर से 10-12 किमी. दूर नगा इलाके में लांगखू गांव में उग्रवादियों के खिलाफ सेना की बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई. चारों तरफ सर्जिकल स्ट्राइक की चर्चा होने लगी. भारतीय सेना को चारों तरफ से बधाई मिलने लगी. लेकिन इसी बीच भारतीय सेना, और गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कर दिया कि यह ऑपरेशन सर्जिकल स्ट्राइक नहीं है. अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या है कि सेना अपनी इस सफलता को सर्जिकल स्ट्राइक कहने से बच रही है. इसके दो बड़े कारण सामने आ रहे हैं...

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सेना का कहना है कि यह ऑपरेशन भारतीय सीमा पर हुआ. उसने इंटरनेशनल सीमा पार नहीं की.

म्यांमार से हमारे दोस्ताना संबंध हैं. उग्रवादियों की घुसपैठ के अलावा म्यांमार बॉर्डर पर किसी तरह का कोई तनाव नहीं है. ऐसे में अगर भारत इस ऑपरेशन को सर्जिकल स्ट्राइक कहता है एक मित्र राष्ट्र की भावनाएं आहत हो सकती हैं.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी यही बात कही थी कि म्यांमार के साथ हमारे मित्रवत संबंध हैं. यह कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं थी. हमले के बारे में आगे जो भी जानकारी मिलेगी आफ सभी तक पहुंचाई जाएगी.

27 सितंबर को तड़के जब भारतीय फौज की एक टुकड़ी भारत-म्यांमार सीमा की निगरानी कर रही थी तभी अज्ञात उग्रवादियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी. हमारे जवानों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उग्रवादियों पर भारी गोलाबारी की और उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया. इसके बाद उग्रवादी मौके से भाग खड़े हुए. जानकारी के मुताबिक सेना के जवाबी हमले में काफी संख्या में उग्रवादी मारे गए हैं. बताया जा रहा है कि इस हमले में NSCN (K) के कई उग्रवादी ढेर हुए हैं. इस गोलीबारी में हमारे जवानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. यहां ये बताना जरूरी है कि हमारी सेना ने इंटरनेशनल बॉर्डर पार नहीं किया.

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