चीन तनाव: 'मैन्युफैक्चरिंग हब बनने तक भारत के लिए शांति जरूरी'

यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष ने कहा कि भारत को अपना आर्थिक एजेंडा ठीक करने के लिए 20 साल का समय चाहिए. उन्होंने कहा कि नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार, प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाने के साथ ही रक्षा क्षेत्र में अधिक खर्च करने की जरूरत है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर (PTI) प्रतीकात्मक तस्वीर (PTI)

गीता मोहन

  • नई दिल्ली,
  • 26 जून 2020,
  • अपडेटेड 1:54 PM IST

  • यूएसआईएसपीएफ अध्यक्ष ने चीन को बताया शक्तिशाली
  • कहा- चीन ने भारत को कभी समान भागीदार नहीं माना

भारत और चीन के बीच सीमा पर चल रहे तनाव के बीच यूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) के अध्यक्ष डॉक्टर मुकेश अघी ने कहा है कि चीन ने कभी भी भारत को समान भागीदार नहीं माना. वह कभी भी भारत के साथ समान व्यवहार नहीं करेगा. वाशिंगटन डीसी से आजतक से बात करते हुए डॉक्टर अघी ने कहा कि चीन अधिक आक्रामक हो गया है और प्रभाव क्षेत्र को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

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उन्होंने कहा कि चीन से आने वाले मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी वस्तुओं का चीन से आयात रोकने का यह सही समय नहीं था. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा. डॉक्टर अघी ने कहा कि भारत को तब तक शांति बनाए रखने की जरूरत है, जब तक वह विनिर्माण हब नहीं बन जाता. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने इसकी कल्पना की है.

यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष ने कहा कि भारत को अपना आर्थिक एजेंडा ठीक करने के लिए 20 साल का समय चाहिए. उन्होंने कहा कि नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार, प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाने के साथ ही रक्षा क्षेत्र में अधिक खर्च करने की जरूरत है. डॉक्टर अघी ने कहा कि चीन आर्थिक और सैन्य स्तर पर शक्तिशाली है. उन्होंने चीनी वस्तुओं के बहिष्कार को लेकर भारत में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन को लेकर कहा कि नागरिकों को भावनाओं से बाहर निकलना होगा.

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डॉक्टर अघी ने कहा सरकार को बड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. सरकार शांति के लिए कोशिश भी कर रही है. उसे आर्थिक और भावनात्मक रूप से निपटना होगा. उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर ध्यान देना चहिए कि दीर्घकाल में भारत की चीन पर निर्भरता कम हो. एन1बी1 वीजा निलंबित किए जाने पर डॉक्टर अघी ने कहा कि व्यापारी समुदाय ट्रंप प्रशासन के संपर्क में है. इस फैसले को लेकर विरोध भी जता दिया गया है.

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