सोनिया गांधी बोलीं- नाकामी से ना घबराएं, दिन फिरेंगे और हम भी जीतेंगे

चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश के तहत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को जोर देकर कहा कि कोई भी नाकामी स्थायी नहीं होती.

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अमित कुमार दुबे / BHASHA

  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2016,
  • अपडेटेड 7:48 AM IST

चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश के तहत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को जोर देकर कहा कि कोई भी नाकामी स्थायी नहीं होती.

राजीव गांधी की 25वीं पुण्यतिथि
अपने पति और पूर्व प्रधानमंत्री की 25वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक स्मृति सभा में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सोनिया ने कहा 'अपने सिद्धांतों को ताक पर रखकर हासिल की गई कामयाबी ज्यादा लंबे समय तक नहीं टिकती, अगर कोई सिद्धांतों का पालन करता है तो कोई भी नाकामी स्थायी नहीं होती'. पिछले दिनों संपन्न हुए असम, केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस आलोचनाओं का सामना कर रही है.

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राजीव की राह पर चलने की अपील
सामाजिक सद्भाव की वकालत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा 'हमें सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देकर और उसे मजबूत कर भारतीय सरजमीं पर गिरे राजीव के खून के एक-एक कतरे का मोल चुकाना है'. सोनिया ने अपने संबोधन में कहा 'हमें सादगी, आधुनिकता, सद्भाव और संवेदनशीलता के उनके मूल्यों का पालन करना होगा और यही उन्हें हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी. तभी हम कह सकेंगे कि राजीव हम सब में हैं'. युवाओं को दिलाने, पंचायतों को अधिकार दिलाने और दूरसंचार और संचार के क्षेत्र में क्रांति लाने जैसे योगदानों के लिए दिवंगत प्रधानमंत्री की सराहना करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने देश के विकास की प्रक्रिया में युवाओं और समाज के वंचित वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की.

सोनिया ने विपक्ष पर किया हमला
इसके अलााव सोनिया गांधी ने कहा कि उनकी ओर से उठाए गए कदमों के कारण ही भारत दुनिया में सिर उंचा करके कदम आगे बढ़ा रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति में जिन के बारे में 'आज हम जोर-जोर से बोलते हैं' वह बदलाव राजीव गांधी ने ही शुरू किया था. सोनिया की मानें तो राजीव ने ही असम, मिजोरम और दार्जिलिंग में शांति लाने के लिए ठोस कदम उठाए थे. राजीव जी विश्व-व्यवस्था में भारत को सबसे आगे देखना चाहते थे. कार्यक्रम में गुलाम नबी आजाद, दिग्विजय सिंह, जनार्दन द्विवेदी, अजित जोगी सहित कुछ अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे.

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