राष्ट्रगान के बारे में हर वह बात जो आप जानना चाहते हैं

भारत के राष्ट्रगान से जुड़े कई ऐसे नियम हैं, जिससे शायद देश की ज्यादातर जनता वाकिफ नहीं है. पिछले दिनों अमिताभ बच्चन द्वारा राष्ट्रगान को तय से ज्यादा लंबे समय तक गाए जाने को लेकर विवाद उठा तो लोगों को मालूम पड़ा कि ऐसा भी कोई नियम है.

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52 सेकंड में खत्म करना होता है जन-गण-मन 52 सेकंड में खत्म करना होता है जन-गण-मन

मोनिका शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2016,
  • अपडेटेड 12:47 PM IST

‘राष्ट्रगान जन-गण-मन भारत की आजादी का अभिन्न हिस्सा है. इसे पूर्ण सम्मान देना और इसके सम्मान की रक्षा करना भारत के हर नागरिक का कर्तव्य है.’ राष्ट्रगान को लेकर हुए हर विवाद के बाद सबके जेहन में यही बात उठती होगी. जब राष्ट्र की बात होती है तो जाहिर तौर पर राष्ट्रगान का सम्मान सर्वोपरि है.

के खिलाफ हाल ही राष्ट्रगान को गलत तरीके से गाने की शिकायत दर्ज कराई गई थी. उन्होंने 19 मार्च को भारत और पाकिस्तान के बीच कोलकाता के ईडन गार्डन्स में हुए वर्ल्ड टी20 मैच से पहले राष्ट्रगान गाया था.

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दिल्ली के अशोक नगर थाने में शिकायत करने वाले ने आरोप लगाया है कि अमिताभ ने राष्ट्रगान को खत्म करने में 1 मिनट 10 सेकेंड का वक्त लिया, जबकि नियम के मुताबिक इसे 52 सेकेंड में खत्म किया जाना चाहिए.

राष्ट्रगान से जुड़े इस नियम को शायद बहुत लोगों ने पहली बार सुना होगा. अक्सर इस तरह के विवाद पनपने के बाद हमें पता लगता कि ऐसा भी कोई नियम मौजूद है. तो आइए जानते हैं, से जुड़े कुछ नियम, विवाद, वाद और उस पर कोर्ट के फैसलों के बारे में.

राष्ट्रगान की सही अवधि
राष्ट्रगान को गाने की अवधि लगभग 52 सेकेंड है. कुछ मौकों पर इसे संक्षिप्त रूप में भी गाया जाता है, जिसमें पहली और आखिरी पंक्तियां ही बोली जाती हैं और इसमें करीब 20 सेकेंड का वक्त लगता है.

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पहले भी अमिताभ ने गाया राष्ट्रगान
पिछले साल अमिताभ बच्चन की एक वीडियो जारी की गई थी, जिसे राष्ट्रगान के लेखक रवीन्द्रनाथ टैगोर की याद में बनाया गया था. इस वीडियो में अमिताभ कोलकाता में टैगोर के पैतृक घर में जन गण मन गाते दिखे थे. इस वीडियो में भी उन्होंने राष्ट्रगान को एक मिनट से ज्यादा समय में गाया था.

अमिताभ के खिलाफ दूसरी बार हुई शिकायत
एक डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर उल्हास पीआर ने पूर्वी दिल्ली के अशोक नगर पुलिस स्टेशन में बिग बी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. वो पहले भी अमिताभ द्वारा राष्ट्रगान को तय समय से ज्यादा तक गाने को लेकर शिकायत कर चुके हैं. उल्हास ने मुंबई के जुहू थाने में राष्ट्रगान को गलत तरीके से गाने के लिए बॉलीवुड स्टार के खिलाफ शिकायत की थी.


अक्टूबर 2014 को बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने ट्विटर पर कुछ ऐसा लिखा, जिससे न सिर्फ उनकी आलोचना की गई बल्कि एक नई बहस भी छिड़ गई. प्रीति ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर बताया कि उन्होंने एक ऐसे शख्स को थिएटर से बाहर फिंकवा दिया, जिसने फिल्म से पहले 'जन गण मन' के दौरान खड़े होने और गाने से इनकार कर दिया था. भले ही प्रीति ने इससे अपनी देशभक्ति और समझदारी दिखाने की कोशिश की हो, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी इस हरकत को गलत ही ठहराया गया. लोगों का मानना था कि राष्ट्रगान के लिए खड़े न होना इसका अपमान नहीं है.

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कुशाल टंडन और अमीषा पटेल के बीच ट्विटर वॉर
पिछले साल अक्टूबर में टीवी एक्टर कुशाल टंडन ने ट्विटर पर कहा था कि एक फिल्म शुरू होने से पहले बॉलीवुड एक्ट्रेस अमीषा पटेल जन-गण-मन गाने से लिए खड़ी नहीं हुईं. इसके बाद अमीषा ने ये कहते हुए कुशाल की जुबान पर ताला लगा दिया था कि वो हर महीने महिलाओं को होने वाली पीरियड्स से गुजर रही थी और राष्ट्रगान के दौरान इसलिए खड़ी नहीं हुईं थी क्योंकि उन्हें अपने कपड़े खराब होने का डर था. बात देशभक्ति की उठी तो दूर तलक गई, लेकिन इतनी दूर तलक गई कि गलत मोड़ पर जा पहुंची.

मुसलिम दंपति को थिएटर से किया बाहर
पिछले साल मुंबई के एक सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के लिए खड़े होने से इनकार करने पर एक मुस्लि‍म दंपति के साथ न सिर्फ बदसलूकी की गई, बल्कि उन्हें थिएटर से बाहर भी कर दिया गया था. इस घटना की वीडियो वायरल होने के बाद देशभर में बहस छिड़ गई कि क्या राष्ट्रगान के समय खड़े न होना, इसका अपमान करना है.

कानून की नजर से
प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 की धारा तीन के मुताबिक, ‘अगर कोई राष्ट्रगान में विघ्न डालता है या किसी को राष्ट्रगान गाने से रोकने की कोशिश करता है, तो उसे ज्यादा से ज्यादा तीन साल कैद की सजा या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.’ हालांकि इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी को राष्ट्रगान गाने के लिए बाध्य किया जाए. बेशक इस दौरान भारतीयों से उम्मीद की जाती है कि वो राष्ट्रगान के समय सावधान की मुद्रा में खड़े रहें, लेकिन ये कहना गलत होगा कि जन-गण-मन न गाना इसका अपमान है.

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राष्ट्रगान के वक्त खड़े होना जरूरी नहीं
आपको बता दें कि राष्ट्रगान को लेकर ऐसा कोई नियम नहीं है, कि इस दौरान आपको खड़े रहना है. जन-गण-मन के दौरान इसे सम्मान देना जरूरी होता है, न कि खड़े रहना. यानी राष्ट्रगान को गाते या बजाते समय बैठे रहना अपराध नहीं है, बल्कि इस दौरान किसी भी अनुचित गतिविधि में संलग्न नहीं होना चाहिए. थिएटरों में फिल्म से पहले राष्ट्रगान की परंपरा को लेकर भी ऐसा कोई नियम नहीं है कि इस दौरान खड़े रहना जरूरी नहीं है क्योंकि खड़े होने से फिल्म के प्रदर्शन में बाधा आएगी और एक असंतुलन और भ्रम पैदा होगा तथा राष्ट्रगान की गरिमा में वृद्धि नहीं होगी. अगर राष्ट्रगान किसी बंद जगह पर या छत के नीचे गाया जाता है तो नागरिक इसके सम्मान में बैठे भी रह सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
अगस्त 1986 में बिजोय एम्मानुएल वर्सेस केरल नाम के चर्चित वाद में सुप्रीम कोर्ट के सामने ये सवाल उठा था कि क्या किसी को राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर किया जा सकता है? इस केस में तीन स्टूडेंट्स को स्कूल से इसलिए निकाल दिया गया था क्योंकि उन्होंने जन-गण-मन गाने से इनकार किया था. ये स्टूडेंट्स राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े जरूर होते थे, लेकिन अपनी धार्मिक मान्यताओं का हवाला देकर उसे गाने से इनकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला स्टूडेंट्स के हक में सुनाया. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ है, जिससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत होती हों. कोर्ट के मुताबिक अगर कोई राष्ट्रगान नहीं गाता है लेकिन उसका सम्मान करता है, तो अर्थ ये नहीं कि वो इसका अपमान करता है. इसलिए राष्ट्रगान गाने के लिए न ही उस व्यक्ति को दंड दिया जा सकता है और न ही प्रताड़ित किया जा सकता है. साथ ही कोर्ट ने तीनों स्टूडेंट्स को स्कूल में वापस जाने की अनुमति दी.

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इन मौकों पर गाया जाता है जन-गण-मन
1. जब राष्ट्र सलामी देता है (इसका अर्थ है राष्ट्रपति या संबंधित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के अंदर राज्यपाल/लेफ्टिनेंट गवर्नर को विशेष अवसरों पर राष्ट्र गान के साथ राष्ट्रीय सलामी - सलामी शस्त्र प्रस्तुत किया जाता है).
2. परेड के दौरान.
3. औपचारिक राज्य कार्यक्रमों और सरकार द्वारा आयोजित अन्य कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन पर और सामूहिक कार्यक्रमों में तथा इन कार्यक्रमों से उनके वापस जाने के अवसर पर.
4. ऑल इंडिया रेडियो पर राष्ट्रपति के राष्ट्र को संबोधन से पूर्व और उसके बाद.
5. राज्यपाल/लेफ्टिनेंट गवर्नर के उनके राज्य/संघ राज्य के अंदर औपचारिक राज्य कार्यक्रमों में आगमन पर तथा इन कार्यक्रमों से उनके वापस जाने के समय.
6. जब राष्ट्रीय ध्वज को परेड में लाया जाए.
7. जब रेजीमेंट के रंग प्रस्तुत किए जाते हैं.
8. नौसेना के रंगों को फहराने के लिए.

जन-गण-मन का इतिहास
संविधान सभा ने जन-गण-मन को भारत के राष्ट्रगान के रूप में 24 जनवरी 1950 को अपनाया था. इसे सबसे पहले 27 दिसंबर, 1911 को कलकत्ता (कोलकाता) में कांग्रेस के कार्यक्रम में गाया गया था. इसे नोबेल पुरस्कार विजेता और भारतीय साहित्यकार रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सबसे पहले बंगाली में लिखा था. उन्होंने इसके पांच छंद लिखे गए थे, लेकिन पहले छंद की पंक्तियों को ही राष्ट्रगान के तौर पर अपनाया गया.

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