राजस्थान-छत्तीसगढ़ में लहराया पंजा, MP में किसी को बहुमत नहीं

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी का सुपड़ा साफ कर दिया तो तेलंगाना में टीआरएस पर जनता ने दोबारा भरोसा जताया है. राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनाने जा रही है, लेकिन मध्य प्रदेश में जीत हासिल करने में उसे काफी मशक्कत करनी पड़ी है.

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विधानसभा चुनावों में जीत के बाद प्रसन्न मुद्रा में राहुल (फोटो-PTI) विधानसभा चुनावों में जीत के बाद प्रसन्न मुद्रा में राहुल (फोटो-PTI)

वरुण शैलेश

  • नई दिल्ली,
  • 12 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 8:37 AM IST

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आ चुके हैं. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का सुपड़ा साफ कर दिया तो तेलंगाना में टीआरएस पर जनता ने दोबारा भरोसा जताया है. राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनाने जा रही है, लेकिन मध्य प्रदेश में जीत हासिल करने में उसे काफी मशक्कत करनी पड़ी है. बहरहाल, कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात का समय मांगा है.

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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार बनाने के जादुई आंकड़े से पीछे है. बहुमत के लिए 116 सीट जरूरी है जबिक उसे 114 सीटें मिली हैं. राज्य में वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने सरकार बनाने के लिए राज्यपाल के सामने दावा पेश कर दिया है.वहीं बीजेपी को 109 सीटें मिली हैं. 4 निर्दलीय, 2 बसपा और 1 सपा को मिली हैं.

बीजेपी-कांग्रेस में रस्साकशी

सरकार बनाने की इस कोशिश के बीच कांग्रेस ने चुनाव आयोग के समक्ष यह शिकायत दर्ज कराई कि दामोह के कलेक्टर सर्टिफिकेट जारी नहीं कर रहे हैं, जबकि उसका प्रत्याशी जीत चुका है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के दबाव में दामोह के कलेक्टर सर्टिफिकेट जारी नहीं कर रहे हैं. वहीं बीजेपी में भी आगे की रणनीति को लेकर भोपाल में शिवराज सिंह चौहान के आवास पर देर रात बैठक हुई जिसमें कैलाश विजय वर्गीय समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए. बीजेपी का आरोप था कि नतीजों में देरी के पीछ कांग्रेस का हाथ है.

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बहरहाल, मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के जादुई आंकड़े को कोई पार्टी हासिल नहीं कर सकी है, चूंकि कांग्रेस बहुमत के लिए जरूरी 116 सीटों के बिल्कुल करीब है तो सरकार बनाने के लिए अब निर्दलीयों, बसपा और सपा की भूमिका अहम हो गई. चुनाव आयोग के अनुसार बुधवार सुबह 6.53 बजे तक एमपी में कांग्रेस 114 सीटों पर जीत चुकी है, जबकि बीजेपी 109 सीटों पर अटकी हुई है. 

प्रदेश की इन दोनों प्रमुख पार्टियों के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा) को एक सीट बिजावर मिल गई है. वहीं, 4 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 2 सीटों पथरिया और भिंड में जीत हासिल कर चुकी है. मध्य प्रदेश में सरकार बनाने में अब निर्दलीयों, बसपा और सपा की भूमिका अहम हो गई है.

इस चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत करीब आठ फीसदी बढ़ा. उसे करीब 41 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि बीजेपी को भी 41 फीसदी से थोड़ा अधिक वोट मिला. इसके अलावा, प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस इस बार एकजुट होकर चुनाव लड़ी, जबकि इससे पहले के चुनाव में कांग्रेस में गुटबाजी नजर आती थी, जिसके कारण उसे सत्ता से 15 साल तक बाहर रहना पड़ा था.

राजस्थान में सरकार बनाने की तैयारी

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कांग्रेस ने राजस्थान में सत्तारूढ़ बीजेपी को शिकस्त दी है. यहां वह 99 सीटों पर जीत के साथ बहुमत के जादुई आंकड़े के लगभग पास पहुंच गई है और सरकार बनाने की तैयारी में है. वहीं पार्टी की हार के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपना इस्तीफा मंगलवार रात राज्यपाल कल्याण सिंह को सौंप दिया. कांग्रेस विधायक दल की बुधवार को यहां बैठक होगी जिसमें विधायक दल नेता सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी. पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री पद पर अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान करेगा, लेकिन इस बारे में आज फैसला होने की पूरी संभावना है.

राज्य की 200 में से 199 सीटों पर मतदान हुआ था. देर रात तक घोषित परिणामों के अनुसार कांग्रेस ने 99 सीटें जीती है. बीजेपी को 73 सीटों पर जीत मिली है. बसपा छह, माकपा दो सीटों पर जीती है. 12 सीटों पर निर्दलीय व छह पर अन्य विजयी रहे हैं. एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं.

छत्तीसगढ़ में बीजेपी का सुपड़ा साफ

कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ ने जबरदस्त जीत दर्ज की है. ऐसी जीत जिसमें कांग्रेस ने बीजेपी का सूपड़ा साफ कर दिया है. 15 साल बाद रमन सिंह को जनता ने सत्ता से बेदखल कर दिया है. नतीजों के बाद रमन सिंह सामने आए, और उन्होंने हार की जिम्मेदारी खुद ली. साथ ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी.

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राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में भले ही कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की हो, मगर तेलंगाना और मिजोरम में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा है. मिजोरम में दस साल से सत्तासीन रही कांग्रेस को एमएनएफ ने उखाड़ फेंका है तो वहीं तेलंगाना में टीआरएस का जादू फिर चला है.

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