राजस्थानः वो सीटें जहां मीणा vs मीणा, ब्राह्मण vs ब्राह्मण और जाट vs जाट है लड़ाई

राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी लड़ाई है. राज्य की करीब 5 दर्जन सीटें ऐसी हैं, जहां समान जाति के उम्मीदवारों के बीच लड़ाई है. इसमें जीत-हार किसी की भी हो, लेकिन उसी समुदाय का विधायक चुना जाना तय है.

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कांग्रेस और बीजेपी कांग्रेस और बीजेपी

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 05 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 11:52 AM IST

राजस्थान विधानसभा चुनाव प्रचार का बुधवार को आखिरी दिन है. राज्य में 7 दिसंबर को वोटिंग होगी. इस बार राजस्थान की सियासी लड़ाई जाति के भी इर्द-गिर्द लड़ी जा रही है. सूबे की राजनीति में जातिवाद सिर चढ़कर बोल रहा है.  प्रदेश की करीब 5 दर्जन विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां एक ही जाति के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है.

राज्य के प्रमुख दलों- कांग्रेस और बीजेपी ने कई सीटों पर समान जाति के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. दिलचस्प बात ये है कि कांग्रेस जीते या फिर बीजेपी विधायक उस जाति का बनना तय है.  

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राजस्थान का जातीय समीकरण

करीब सात करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले राजस्थान में अगर किसी जाति का 10 फीसदी वोट बैंक भी बन रहा है तो यह किसी की सरकार बनाने और गिराने के लिए काफी साबित होता है. राजस्थान में कुल 272 जातियां हैं. इनमें 51 फीसदी अन्य पिछड़ा वर्ग (इसमें 91 जातियां हैं, जिनमें जाट 9 फीसदी, गुर्जर 5 फीसदी, माली 4 फीसदी), 18 फीसदी अनुसूचित जाति (59 उप-जातियां हैं जिनमें मेघावत 6 फीसदी, बैरवा 3 फीसदी), 13 फीसदी अनुसूचित जनजाति (12 उप-जातियां हैं जिनमें मीणा 7 फीसदी, भील 4 फीसदी) और 18 फीसदी अन्य (ब्राह्मण 7 फीसदी, राजपूत 6 फीसदी, वैश्य 4 फीसदी) से आते हैं.

लेकिन चुनावी नजरिए से देखा जाए तो ब्राह्मण, गुर्जर, मीणा, जाट और राजपूत समुदाय काफी अहम माने जाते हैं. सत्ता की चाबी किसके पास रहेगी, इसका फैसला करने में ये जातियां काफी मायने रखती हैं क्योंकि राजस्थान की जनसंख्या में करीब एक- तिहाई हिस्सा इन पांच जातियों का माना जाता है.

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9 सीटों पर भील का मुकाबला भील से

प्रदेश की 9 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस और बीजेपी ने भील समुदाय के प्रत्याशी आमने-समाने मैदान में है. सागवाड़ा, चौरासी, घाटोल, गढ़ी, बांसवाड़ा, बागीडोरा, झाड़ौल, खैरवाड़ा और डूंगरपुर सीटों पर दोनों पार्टियों ने भील समुदाय के उम्मीदवार उतारे हैं. राजस्थान में भील 4 फीसदी हैं.

15 सीटों पर जाट प्रत्याशी आमने-सामने

राजस्थान की 15 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों ने जाट उम्मीदवार पर दांव लगाया है. डेगाना, नावां, ओसियां, बायतू, झुंझुनूं, किशनगढ़, सूरतगढ़, हनुमानगढ़, भादरा, लूणकरणसर, सादुलपुर, मंडावा, खंडेला, डीग-कुम्हेर सीट ऐसी हैं, जहां पर कांग्रेस और बीजेपी से के जाट उम्मीदवार आमने-सामने हैं. इसके अलावा मालपुरा में आरएलडी ने जाट उम्मीदवार उतारा है. आरएलडी राजस्थान में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. राज्य में 9 फीसदी जाट समुदाय के लोग है.

इन सीटों पर मीणा बनाम मीणा

राज्य की 9 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां मीणा बनाम मीणा है. जमवारामगढ़, लालसोट, बामनवास, प्रतापगढ़ , सलूंबर , सपोटरा, टोडाभीम, राजगढ़ और बस्सी विधानसभा सीट पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों ने मीणा समुदाय के प्रत्याशी पर दांव लगाया है. राज्य में मीणा समुदाय 7 फीसदी है. ये ये अनुसूचित जन जातीय के तहत आते हैं.

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 6 सीटों पर मेघवाल का मुकाबला मेघवाल

राजस्थान में दलित समुदाय में मेघवाल राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा प्रभावी है. राज्य की 6 विधानसभा सीटें हैं, जहां पर कांग्रेस और बीजेपी ने मेघवाल समुदाय के उम्मीदवार उतारे हैं. ये सीटे हैं- खाजूवाला, सुजानगढ़, धोद, जायल, भोपालगढ़ और चौहटन. राज्य में मेघवाल करीब 6 फीसदी हैं.

6 सीटों पर ब्राह्मण के सामने ब्राह्मण

राजस्थान की सियासत में ब्राह्मण समुदाय का एक दौर में वर्चस्व रहा है. कांग्रेस से 6 ब्राह्मण समुदाय के नेता मुख्यमंत्री रहे हैं. राज्य की बीकानेर पश्चिम, हवामहल, सीकर, कोटा दक्षिण, बूंदी और रतनगढ़ सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस और बीजेपी ने ब्राह्मण नेता आमने-सामने हैं. राज्य में 7 फीसदी मतदाता हैं.

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