राजस्थानः बूंदी जिले के इस गांव में कोरोना का कोहराम, देर से जागी सरकार, अब ब्लैक फंगस का खौफ

राजस्थान के बूंदी जिले के लेसरदा गांव में ब्लैक फंगस की वजह से हुई मौत से लोग डरे हुए हैं. लेसरदा के हंसराज पंचाल की मौत फंगस की वजह से हो गई. मौतों के बाद जागी सरकार टेस्टिंग तो नहीं करा रही लेकिन दवा की पुड़िया बांट रही है.

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गांव में डर का माहौल है (फोटो-आजतक) गांव में डर का माहौल है (फोटो-आजतक)

शरत कुमार

  • बूंदी,
  • 26 मई 2021,
  • अपडेटेड 10:24 PM IST
  • बूंदी जिले के लेसरदा गांव में 68 लोग पॉजिटिव
  • सरकारी स्वास्थ्य बीमा कोई नहीं मान रहाः परिजन
  • खांसी-बुखार पर मरीजों को दी जा रही दवा की पुड़िया

कोरोना के बाद ब्लैक फंगस राजस्थान के गांव में कोहराम मचाने लगा है. गांव में इलाज की सुविधा नहीं होने की वजह से एक तो पहले ही इलाज में देरी हो जा रही है और दूसरा जब तक पता चल रहा है तब तक जान बचना मुश्किल हो जा रहा है. बूंदी जिले के लिए लेसरदा का हमने दौरा किया जहां पर गुणा से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और 68 लोग पॉजिटिव हैं.

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गांव में ब्लैक फंगस की वजह से हुई मौत से लोग डरे हुए हैं. बूंदी जिले के लेसरदा के हंसराज पंचाल की मौत फंगस की वजह से हो गई. वह कस्बे में मेडिकल स्टोर चलाते थे कोरोना हुआ तो पहले खुद से दवा खाया, ठीक नहीं हुआ तो कस्बे के ही डॉक्टर से दवा ली.

इस बीच ब्लैक फंगस हो गया और पता ही नहीं चला. जब तक पता चलता देरी हो चुकी थी. जयपुर गए वहां एक निजी अस्पताल में सात लाख खर्च हो गए. कर्ज में डूबने के बाद जब कहीं कोई रास्ता नहीं दिखा तो पैसे खत्म होने के बाद निजी अस्पताल ने पैसे नहीं दे पा रहे थे तो मजबूरी में सरकारी अस्पताल एसएमएस में गए जहां उनकी मौत हो गई. अब पिता कह रहे हैं कि दो बच्चे हैं लेकिन कर्ज लौटाने के लिए घर बेचना पड़ेगा.

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21 मई को थी शादी 8 को हो गई मौत
सरकार कह रही है कि पूरे राजस्थान में चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना के तहत मुफ़्त इलाज हो रहा है. मगर उनके भाई बता रहे हैं कि सरकारी स्वास्थ्य बीमा होने के बावजूद कोई इसे नहीं मान रहा है.

ग्राम पंचायत में पंचायत सहायक के पद पर काम करने वाले धनराज मीणा की शादी 21 मई को होने वाले थी. 30 साल के धर्मराज की सगाई हो गई थी मगर इससे पहले अप्रैल के आखिरी सप्ताह में उन्हें कोरोना हो गया. धर्मराज भी गांव में ही दवा लेकर खाते रहे मगर अचानक तबीयत बिगड़ी तो कोटा लेकर गया जहां पर 8 मई को मौत हो गई.

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गांव में इलाज नहीं होने की वजह से इनके परिवार के तीन लोग भी पॉजिटिव हो गए. जब गांव में एक के बाद एक मौतें होने लगी तो सरकार जागी और सख्ती बरती गई. ग्रामीणों का कहना है कि घर-घर में लोग बीमार हैं. मगर पंचायत के सेक्रेटरी कह रहे हैं कि जितने लोगों की जांच हुई है उसमें 68 पॉजिटिव लोगों में से अब 12 ही पॉजिटिव बचे हैं.

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हालांकि सच्चाई यह है कि मौतों के बाद जागी सरकार अब टेस्टिंग तो नहीं करा रही है पर खांसी और बुखार वाले मरीजों की पहचान कर उन्हें दवा की एक पुड़िया दी जा रही है. इसमें पांच दिन के लिए पांच दवाएं हैं.

पंचायत की जनसंख्या करीब 3,000 है और उसमें 68 लोगों का पॉजिटिव होना और 14 लोगों की मौत होना छोटा आंकड़ा नहीं है जबकि ना जाने कितने लोगों की जांच नहीं हुई है और घर में खांसी-बुखार की दवा ले रहे हैं, लेकिन सरकार अभी भी गांव में जुगाड़ के भरोसे चमत्कार का इंतजार कर रही है.

 

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