'यारी निभाओ...', मशहूर पंजाबी सिंगर ने किया सुरक्षा छिनने का दावा, सुखबीर बादल से मीटिंग बनी वजह?

सिद्धू मूसेवाला की हत्या के चार साल बाद पंजाब में सुरक्षा वापसी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. एक अंतरराष्ट्रीय पंजाबी गायक ने दावा किया है कि सुखबीर बादल से मुलाकात के बाद उसकी सुरक्षा हटा ली गई है. गायक ने लॉरेंस गैंग से खतरे का दावा करते हुए इसे राजनीतिक कदम बताया.

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सुखबीर बादल से मिलते ही ग्लोबल सिंगर की सुरक्षा हटने का दावा. (Photo: X/@PunjabPolice) सुखबीर बादल से मिलते ही ग्लोबल सिंगर की सुरक्षा हटने का दावा. (Photo: X/@PunjabPolice)

अमन भारद्वाज

  • चंडीगढ़,
  • 24 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:01 PM IST

सिद्धू मूसेवाला की हत्या के करीब चार साल बाद पंजाब की राजनीति में सुरक्षा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंजाबी गायक/एक्टर ने दावा किया है कि पंजाब सरकार ने उनकी सुरक्षा वापस ले ली है. यह गायक खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से खतरा बता चुके हैं.

सूत्रों के मुताबिक, गायक के साथ तैनात 14 सुरक्षाकर्मियों को उस मुलाकात के तुरंत बाद हटा लिया गया, जो उन्होंने सुखबीर बादल से की थी. बताया जा रहा है कि यह मुलाकात करीब दो घंटे चली. गायक का दावा है कि उन्हें विदेश में अपने घर पर फायरिंग की घटना का सामना भी करना पड़ा था, जिसे लॉरेंस गैंग से जोड़ा गया था.

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गायक ने अपना नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि उनकी मुलाकात महज शिष्टाचार भेंट थी, इसे राजनीतिक रंग देना गलत है. उन्होंने 2022 में हुई मूसेवाला की हत्या का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि किसी ज्ञात खतरे के बावजूद सुरक्षा हटाई जाती है और कुछ अनहोनी होती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?

यह भी पढ़ें: 'बहुत चक्कर काट चुके...' इंसाफ के लिए सड़क पर उतरे सिद्धू मूसेवाला के माता-पिता, SSP दफ्तर के बाहर दिया धरना

धार्मिक नेता की सुरक्षा भी प्रभावित
बताया जाता है कि हरियाणा के सिरसा में एक कार्यक्रम के लिए जाते समय गायक को फोन कर सुरक्षा हटाए जाने की सूचना दी गई. गायक का दावा है कि यह कदम राजनीतिक रूप से प्रेरित लगता है. उन्होंने आरोप लगाया कि फोन पर उनसे कहा गया, “यारी निभाओ जिनसे मिले हो.” जिसे उन्होंने सत्ता में बैठे लोगों की टिप्पणी माना है.

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इससे पहले ननकसर संप्रदा के प्रमुख संत बाबा घाला सिंह की सुरक्षा भी सुखबीर सिंह बादल से मुलाकात के बाद कथित रूप से वापस ले ली गई थी, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो गई है. चुनाव नजदीक आने के साथ यह मुद्दा राज्य की राजनीति में गरमाता जा रहा है. अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या सुरक्षा समीक्षा राजनीतिक कारणों और मंशाओं से प्रभावित हो रही है या फिर यह वास्तविक खतरे के आकलन पर आधारित है.

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