प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार ने अपने 12 साल के सफर को पूरा कर लिया है. 26 मई 2014 को पीएम मोदी सत्ता संभालने के बाद शासन, अर्थव्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल सेवाओं और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई बड़े और कड़े फैसले लिए गए, जिन्होंने न केवल भारत की राजनीति, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, समाज और वैश्विक छवि की दशा और दिशा को पूरी तरह बदल दिया.
एनडीए सरकार के 12 साल पूरे होने के साथ ही पीएम मोदी ऐसे नेता बन गए हैं, जिन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. 12 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने जनसेवा को ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी बताया है. उन्होंने कहा कि विनम्रता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ लगातार काम करने वाला व्यक्ति ही लोगों का विश्वास अर्जित कर पाता है.
पीएम मोदी 26 मई 2014 को पहली बा देश की सत्ता पर काबिज हुए थे और साल 2024 में लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की. मोदी सरकार ने जिन नीतियों, योजनाओं और रणनीतियों को जमीन पर उतारा है, उन्हें 'मोदी मंत्र' के रूप में देखा जा रहा है. यह उस 'ब्लूप्रिंट' का हिस्सा है, जो भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में खड़ा किया और आगे तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति और 'विकसित भारत 2047' बनाने की है. मोदी सरकार का लक्ष्य भारत को उस मुकाम पर पहुंचाने का है जहां हम जर्मनी और जापान को पछाड़कर अमेरिका और चीन के ठीक पीछे खड़े हों सकें.
अंत्योदय और समावेशी विकास
विकसित भारत की पहली शर्त है कि विकास समाज के आखिरी छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे. प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने विकास और योजनाओं के समावेशी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा. पीएम मोदी ने'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र के तहत जनधन खाते, उज्ज्वला योजना, और पीएम आवास जैसी योजनाओं ने देश के गरीब तबके को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ा है.
देश में जब तक हर नागरिक सशक्त नहीं होगा, तब तक देश विकसित नहीं हो सकता. इसी के तहत करीबियों को पक्का आवास देने के साथ-साथ तमाम योजनाओं को पहुंचाने का काम किया. देश में बड़ी संख्या में पक्के घर बने, उज्जवला योजना के जरिए गैस और घर-घर शौचालय बनाने का काम किया गया.
देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प
मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में भारत ने बुनियादी ढांचे के निर्माण में अभूतपूर्व गति देखी है.बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स,देशभर में एक्सप्रेसवे का जाल, आधुनिक रेलवे स्टेशन, राष्ट्रीय राजमार्गों का जाल, वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें, एयरपोर्ट्स की संख्या दोगुनी बढ़ोतरी और 'पीएम गतिशक्ति' नेशनल मास्टर प्लान ने देश के लॉजिस्टिक्स को रफ्तार दी है. मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर ही किसी भी विकसित अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है.
पीएम मोदी का विजन भारत के कोने-कोने को वैश्विक स्तर के इन्फ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने का है. इस तरह से भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की कवायद लगातार की जा रही है, जिसके लिए 12 सालों में कई अहम कदम उठाए गए हैं.
डिजिटल इंडिया और टेक-क्रांति
पीएम मोदी ने भारत में दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को स्थापित करने का काम किया है. यूपीआई (UPI) की सफलता आज पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुकी है. भारत ने तकनीकी विकास अमीरों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसका लोकतांत्रीकरण भी किया गया है. रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह डिजिटल ट्रांजैक्शन ने देश की अर्थव्यवस्था को पारदर्शी और चुस्त बनाया है.
भारत ने दुनिया को 'मिशन लाइफ' का मंत्र दिया है. इंटरनेशनल सोलर एलायंस का नेतृत्व और 2070 तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन का लक्ष्य यह दिखाता है कि भारत का विकास पर्यावरण की कीमत पर नहीं, बल्कि उसके साथ तालमेल बिठाकर होगा.
भारत को आत्मनिर्भर बनाने का प्लान
मोदी सरकार के कार्यकाल में रक्षा क्षेत्र से लेकर खिलौना उद्योग और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग तक, भारत अब दूसरे देशों पर निर्भरता कम कर रहा है. 'मेक इन इंडिया' और पीएलआई (PLI) स्कीम के जरिए देश को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का प्रयास जारी है, ताकि भारत आयातक के बजाय एक बड़ा निर्यातक बन सके. इसके लिए 12 साल से पीएम मोदी प्रयास कर रहे हैं और सरकार तमाम मदद भी कर रही है.
पीएम मोदी ने नेहरू की बनाई बुनियादी ताकत को 21वीं सदी की आधुनिकता और रफ्तार से जोड़ दिया. मोदी का विजन 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत 2047' का है, जहां नेहरू के दौर में एम्स और आईआईटी गिने-चुने थे, आज मोदी सरकार में उनकी संख्या दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है.
युवा शक्ति और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है. 'स्टार्ट-अप इंडिया' और 'स्टैंड-अप इंडिया' जैसे मंत्रों ने युवाओं को रोजगार मांगने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बना दिया है. देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे नए आइडियाज देश की तरक्की के नए इंजन हैं.
2014 में देश में जहां चंद सौ स्टार्टअप थे, आज 2026 में उनकी संख्या 2.3 लाख को पार कर चुकी है. मोदी का अगला विजन भारत की 'स्पेस इकोनॉमी' को मौजूदा 9 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर कुछ सालों में 45 बिलियन डॉलर तक ले जाने की है, जिसमें प्राइवेट सेक्टर की बड़ी हिस्सेदारी होगी.
आधी आबादी को पूरी हिस्सेदारी
भारतीय समाज में लंबे समय तक महिलाओं को 'आश्रित' या केवल 'कल्याण का पात्र' माना जाता रहा। लेकिन पिछले 12 वर्षों (2014 से 2026) में देश की नीति-निर्माण में एक युगांतकारी बदलाव आया है. मोदी सरकार ने इस सोच को बदला और देश को 'महिला सशक्तीकरण' से आगे ले जाकर 'महिलाओं के नेतृत्व में विकास'के मार्ग पर अग्रसर किया. महिलाओं के विकास की नहीं, बल्कि 'महिलाओं के नेतृत्व में विकास' की हो रही है. मुद्रा लोन की बहुतांश लाभार्थी महिलाएं हैं. 'लखपति दीदी' योजना और ड्रोन दीदी जैसे प्रयोग ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट मानना है कि भारत को विकसित बनाने का सपना तब तक अधूरा है, जब तक देश की 'आधी आबादी' को हर क्षेत्र में 'पूरी हिस्सेदारी' न मिले. वित्तीय समावेशन से लेकर देश की सुरक्षा और विधायी फैसलों तक,मोदी सरकार में महिलाओं को आत्मनिर्भर और नीति-निर्माता बनाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं. दशकों से लंबित महिला आरक्षण बिल को संसद से पारित कराकर मोदी सरकार ने आधी आबादी को 33 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया.
'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म'
पीएम मोदी का मंत्र 'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' का रहा है. सरकार ने कई पुराने कानूनों को खत्म कर नए तरीके से कानून बनाने का काम किया है. इसके सरकार ने जीएसटी (GST), बैंकिंग सुधार और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसे कड़े कदम उठाए. बिचौलियों के खात्मे और सुशासन ने सरकारी तंत्र की कार्यक्षमता को पूरी तरह बदल दिया है.
2014 में सत्ता संभालने के बाद से पीएम मोदी ने देश की प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था को बदलने के लिए इसी त्रिकोण को अपना सिद्धांत बनाया. सरकार पहले साहसिक नीतियां बनाएगी, फिर प्रशासनिक तंत्र के जरिए उन्हें पूरी निष्ठा से जमीन पर उतारने का काम किया, जिससे आखिरकार देश और नागरिकों के जीवन में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव आ सके.
34 साल बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव करते हुए नई शिक्षा नीति लागू की गई. इसके अलावा मोदी सरकार ने अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे आपराधिक कानूनों (IPC, CrPC और Evidence Act) को बदलकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) जैसे नए कानूनों को लागू किया, जिसे देश के कानूनी इतिहास में 'वि-औपनिवेशीकरण' का बड़ा कदम माना गया.
राष्ट्रीय से 'नो-कॉम्प्रोमाइज' की नीति
सुरक्षा के मोर्चे पर रक्षात्मक रुख छोड़कर 'आक्रामक रक्षा' की नीति अपनाई गई. उरी और पुलवामा हमलों के बाद सीमा पार जाकर की गई सैन्य कार्रवाई (सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक) ने दुनिया को संदेश दिया कि भारत अब घर में घुसकर मारने की क्षमता रखता है, इसने देश का हौसला और वैश्विक स्तर पर भारत की साख बढ़ाई. इसके बाल पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकाने को पूरी तरह ध्वस्त किया,
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति बड़ा कदम रही. दशकों से लंबित इस फैसले को लागू कर तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और आधुनिक युद्ध रणनीति की दिशा तय की गई. भारतीय जवानों ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर दिया था. दुनिया को संदेश दिया कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रुख अपना सकता है.
कृषि व ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण
पीएम किसान सम्मान निधि, सॉयल हेल्थ कार्ड और कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के जरिए पारंपरिक खेती को तकनीक से जोड़ा जा रहा है. सरकार का ध्यान 'पेरि-अर्बन' एग्रीकल्चर और सहकारिता आंदोलन (सहकार से समृद्धि) को मजबूत करने पर है ताकि ग्रामीण भारत शहरों के बराबर खड़ा हो सके.
भारत की वैश्विक शक्ति
पीएम मोदी का विजन भारत को ग्लोबल गवर्नेंस के रूप में स्थापित करने का है.भारत मौजूदा दौर में केवल वैश्विक मंचों पर मूकदर्शक नहीं रहता, बल्कि एजेंडा सेट करता है. चाहे वो रूस-यूक्रेन विवाद में शांति की अपील हो, ग्लोबल साउथ की आवाज बनना हो या फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करना.
ग्लोबल साउथ की आवाज बनना, जी-20 की सफल अध्यक्षता और संकट के समय दुनिया भर के देशों की मदद करना. इसने देश की वैश्विक छवि को बदला है. आज भारत अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक रोल मेकर की भूमिका में है, न कि सिर्फ एक दर्शक की. इस तरह दुनिया के पटल पर भारत का नाम गूंज रहा है.
नागरिक कर्तव्य और जनभागीदारी
विकसित भारत के ब्लूप्रिंट का सबसे आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण मंत्र 'जनभागीदारी' है. स्वच्छ भारत अभियान हो, जल जीवन मिशन हो या लोकल के लिए वोकल होना, जब तक देश का आम नागरिक किसी अभियान से नहीं जुड़ता, वह सफल नहीं हो सकता. सरकार का मानना है कि विकसित भारत का निर्माण केवल सरकारी बजट से नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयास से होगा. कोराना से लेकर अभी तक कई मोदी सरकार के एक आवाज पर पूरा देश साथ खड़ा नजर आता है.
सरकार का मानना है कि यह केवल सरकारी योजनाओं से जनभागीदारी संभव नहीं होगा; इसके लिए देश के प्रत्येक नागरिक, कॉर्पोरेट सेक्टर और स्थानीय संस्थाओं को अपने-अपने स्तर पर कर्तव्य भावना के साथ योगदान देना होगा. जब 140 करोड़ नागरिक 'विकसित भारत' के संकल्प को अपना निजी लक्ष्य बना लेंगे, तब 2047 का यह सपना समय से पहले ही हकीकत बन जाएगा.
विकसित भारत का ब्लूप्रिंट
विकसित भारत का ब्लूप्रिंट केवल बड़ी-बड़ी इमारतों या जीडीपी के आंकड़ों तक सीमित नहीं है. एक ऐसे भारत की परिकल्पना है जो आधुनिक भी हो और अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ भी है, जहां तकनीक का शिखर हो और समाज के सबसे निचले पायदान पर बैठे व्यक्ति के जीवन में सुधार हो. अगले दो दशकों का सफर इसी ब्लूप्रिंट पर आगे बढ़ने का है.
भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की कवायद लगातार की जा रही है.देश की 146 करोड़ से ज्यादा की आबादी में जो युवा ऊर्जा है, उसे स्किल्ड लेबर और ग्लोबल लीडर्स में बदलना मोदी के विजन का अहम हिस्सा है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार, विकसित भारत की इमारत जिन चार स्तंभों पर खड़ी होगी, उसमें युवा, महिला, किसान और गरीब है. मोदी सरकार इन्हीं चारों को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.
कुबूल अहमद