पिता की जयंती पर चाचा से आर-पार के मूड में चिराग, हाजीपुर से निकालेंगे 'संघर्ष यात्रा'

चिराग पासवान के संघर्ष यात्रा के लिए हाजीपुर को चुनने के पीछे यह माना जा रहा है कि इस समय की परिस्थितियों में वे अपने चाचा पशुपति पारस को उनके ही निर्वाचन क्षेत्र में घेरना चाहते हैं.

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चिराग पासवान (फाइल फोटो) चिराग पासवान (फाइल फोटो)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 20 जून 2021,
  • अपडेटेड 3:12 PM IST
  • पशुपति पारस को उनके ही संसदीय क्षेत्र में घेरने की तैयारी
  • रामविलास के जन्मदिन पर 5 जुलाई को हो सकती है शुरुआत

लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) दो धड़ों में बंट चुकी है. हाजीपुर के सांसद और एलजेपी के संस्थापक रामविलास पासवान के भाई पशुपति पारस ने पार्टी पर अपना दावा जता दिया है. वहीं, चिराग अलग दावा कर रहे हैं. दोनों चाचा-भतीजे के बीच पार्टी पर वर्चस्व के लिए जारी खींचतान के बीच अब चिराग पासवान सड़कों पर उतरकर भी संघर्ष करने के मूड में हैं.

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चिराग पासवान ने रविवार को एलजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिए. चिराग ने कहा कि अब मुझे सबके आशीर्वाद की जरूरत है. मेरी माँ का आशीर्वाद ढाल की तरह मेरे साथ खड़ी रही. चिराग बात करते-करते भावुक हो गए और कहा कि ये लड़ाई धैर्य से लड़ूंगा. सच्चाई के साथ लड़ूंगा. ये लड़ाई महाभारत की तरह है क्योंकि सामने भी अपने हैं. उन्होंने कहा कि मेरे साथ 90 फीसदी कार्यसमिति के सदस्य थे. दिल्ली और जम्मू कश्मीर को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के अध्यक्ष हमारे साथ हैं. उनके साथ महज नौ लोग थे. वो बताएं कि उनकी कार्यसमिति में कितने लोग थे.

सूत्रों के मुताबिक एलजेपी में बगावत के बाद चिराग पासवान अपने पिता राम विलास पासवान के जन्मदिन 5 जुलाई से संघर्ष यात्रा पर निकलेंगे. सूत्रों का दावा है कि चिराग पासवान बिहार में रामविलास पासवान की संसदीय सीट रहे लोकसभा क्षेत्र हाजीपुर से अपनी इस यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं. हाजीपुर से इस समय राम विलास पासवान के भाई पशुपति पारस सांसद हैं.

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चिराग पासवान के संघर्ष यात्रा के लिए हाजीपुर को चुनने के पीछे यह माना जा रहा है कि इस समय की परिस्थितियों में वे अपने चाचा पशुपति पारस को उनके ही निर्वाचन क्षेत्र में घेरना चाहते हैं. हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र को रामविलास पासवान की परंपरागत सीट माना जाता है. पिछले चुनाव में रामविलास पासवान ने यहां से अपने भाई पशुपति पारस को चुनाव मैदान में उतारा था और वे जीतकर लोकसभा भी पहुंचे.

बता दें कि पशुपति पारस ने चिराग को लोकसभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता के पद से हटा दिया था. पशुपति पारस के इस कदम के बाद चिराग ने बागी सांसदों को पार्टी से निलंबित कर दिया था. इसके बाद पशुपति पारस गुट ने निर्वाचन आयोग पहुंचकर नए अध्यक्ष के चुनाव की जानकारी देते हुए पार्टी पर दावा किया था. पशुपति पारस गुट के दावे के मुताबिक नए अध्यक्ष का चुनाव पार्टी के संविधान के मुताबिक हुआ और कार्यकारिणी की बैठक में 75 सदस्य शामिल थे.

चिराग ने इसके जवाब में बैठक की तस्वीर जारी करने या उसमें शामिल हुए नेताओं के नाम सार्वजनिक करने की चुनौती दी थी. चिराग ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से भी मुलाकात की थी. चिराग ने कहा था कि शेर का बेटा हूं. पहले भी संघर्ष किया है, आगे भी लड़ूंगा. चिराग ने कहा था कि चाहता था कि परिवार की बात बंद कमरे में सुलझ जाए लेकिन अब यह लड़ाई लंबी चलेगी.

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