सुशांत केस पर बिहार के राजनीतिक दलों में होड़ क्यों है?

सुशांत केस में मुंबई पुलिस की जांच की धीमी रफ्तार को लेकर बिहार के लोगों में रोष है और बिहार के बेटे को न्याय दिलाने की मांग तेज हो रही है.

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Sushant Case protest, PTI Photo Sushant Case protest, PTI Photo

संदीप कुमार सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 12:43 PM IST
  • सुशांत केस पर बिहार में सियासत तेज
  • सभी दल मुद्दों को उठाने में जुटे
  • सीबीआई जांच को लेकर मांग तेज

फिल्म एक्टर सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस के 65 दिन हो गए हैं. लेकिन सियासत थमने का नाम नहीं ले रहा है. पहले मुंबई पुलिस की जांच, फिर बिहार पुलिस की एफआईआर, उसके बाद सीबीआई जांच के लिए तकरार और आखिर में सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचने से पूरे देश का ध्यान इसपर है.

इस बीच, बिहार में चुनाव से पहले सभी दल इसपर जमकर सियासत भी कर रहे हैं. कोई धरना दे रहा है तो कोई न्याय की मांग के लिए महाराष्ट्र के नेताओं और पुलिस के खिलाफ कोर्ट जा रहा है. आखिर बिहार चुनाव में सुशांत का केस राजनीतिक दलों के लिए इतना अहम क्यों हो गया है?

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सुशांत सिंह राजपूत बिहार से थे. बॉलीवुड में सफल थे और बिहार के युवाओं के लिए रोल मॉडल थे. सुशांत केस में को लेकर बिहार के लोगों में रोष है और बिहार के बेटे को न्याय दिलाने की मांग तेज हो रही है.

इसलिए बिहार में सभी दल इस मामले में न्याय की आवाज उठाकर सियासी रूप से खुद को जोड़ने की कोशिश में हैं. पहले आरजेडी ने सीबीआई जांच की मांग उठाई, फिर सीबीआई जांच की सिफारिश कर नीतीश सरकार भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. जीतनराम मांझी की पार्टी के एक नेता तो मुंबई पुलिस कमिश्नर और शिवसेना नेताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने भी पहुंच गए.

बिहार की सियासत के जानकार वरिष्ठ पत्रकार राजेश राज कहते हैं- 'सुशांत सिंह राजपूत बिहार के लोगों के लिए विशेषकर युवाओं के लिए रोल मॉडल थे. . और अब बिहार के लोगों के लिए ये मामला भावनात्मक है. इसीलिए सभी दल और नेता इस मामले से खुद को जोड़ रहे हैं.'

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भावनात्मक व जातिगत दोनों फैक्टर
बिहार के सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं. पटना के पत्रकार संजीत नारायण मिश्रा कहते हैं- 'जातीय समीकरण के बिना बिहार में चुनाव असंभव है. राज्य की पार्टियों के लिए सुशांत मामले के राजनीतिकरण से दो तरह के फायदे हैं, पहला भावनात्मक और दूसरा जातिगत. सुशांत राजपूत बिरादरी से आते थे, मतलब राज्य की साढे पांच फीसदी आबादी सीधे-सीधे इसी बहाने कनेक्ट हो जाएगी. और शायद इसलिए राजद नेता तेजस्वी यादव के बाद अब सीएम नीतीश कुमार भी पर्सनली इस मामले में इंटरेस्ट लेने लगे हैं. बाकी पार्टियां भी इसीलिए इस मुद्दे से दूर नहीं दिखना चाहती.'

युवा वोटर बड़ा कारण
सुशांत सिंह राजपूत केस को लेकर पार्टियों के जोर देने के पीछे कारण युवा वोटर भी है. बिहार में युवा वोटरों की आबादी अच्छी खासी है. सुशांत युवाओं में काफी लोकप्रिय भी थे. राज्य में 18 से 29 साल के एज ग्रुप के ही 24 प्रतिशत वोटर हैं.

कोरोना-बाढ़ जैसे संकट से ध्यान हटाने की कोशिश!
बिहार में कई धड़े सुशांत केस को लेकर अलग राय भी रखते हैं. पत्रकार संजीत नारायण मिश्रा कहते हैं- 'राज्य का एक धड़ा यह मान रहा है कि कोरोना और बाढ़ के मामलों में राज्य सरकार फेल्योर साबित हुई है, इसलिए सुशांत के बहाने वोटर्स का मूड अपनी तरफ मोड़ लेने की कोशिश भी इसके पीछे कारण हो सकता है.'

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सुशांत केस के अलावा बाढ़, कोरोना, प्रवासी मजदूरों का मुद्दा भी बिहार में प्रभावी है. इसके साथ ही नेपाल बॉर्डर पर बढ़ा तनाव भी कई इलाकों में मुद्दा है. नियोजित शिक्षकों का मामला भी उबाल पर है. हालांकि इन सबके बीच सुशांत केस पर पार्टियां पूरा जोर लगाए हुए हैं. अब देखना होगा कि युवा वोटरों को रिझा पाने में कौन सी पार्टी सफल रहती है.

 

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