ट्रायल, सजा और जुर्माना... जानें POCSO और पश्चिम बंगाल के बलात्कार विरोधी बिल में क्या है अंतर

पश्चिम बंगाल के विधेयक के तहत अपराजिता टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जिसमें प्रारंभिक रिपोर्ट के 21 दिनों के भीतर सजा दी जाएगी.नर्सों और महिला डॉक्टरों के आवाजाही वाले मार्गों को कवर किया जाएगा. इसके लिए राज्य सरकार ने 120 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं.

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पश्चिम बंगाल में 'अपराजिता महिला और बाल विधेयक 2024' को पारित. (PTI Photo) पश्चिम बंगाल में 'अपराजिता महिला और बाल विधेयक 2024' को पारित. (PTI Photo)

सृष्टि ओझा / कनु सारदा

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:50 PM IST

पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में 'अपराजिता महिला और बाल विधेयक (पश्चिम बंगाल आपराधिक कानून संशोधन) 2024' को पारित कर दिया. इस विधेयक में बलात्कार और हत्या के दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान है. यह विधेयक भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और POCSO में संशोधन की मांग करता है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि पश्चिम बंगाल के इस नए कानून और पॉक्सो में क्या अंतर हैं...

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1. यौन शोषण के लिए सजा में इजाफा

पश्चिम बंगाल कानून: नए कानून के तहत यौन शोषण के लिए न्यूनतम सजा 3 साल से बढ़ाकर 7 साल कर दी गई है. सजा 7 साल से 10 साल तक हो सकती है और इसके साथ जुर्माना भी हो सकता है.

यौन शोषण के लिए सजा (WB) यौन शोषण के लिए सजा (POCSO)
न्यूनतम सजा 3 साल से बढ़ाकर 7 साल कर दी गई है. सजा 7 साल से 10 साल तक हो सकती है और इसके साथ जुर्माना भी हो सकता है. POCSO एक्ट की धारा 8 के तहत, यौन शोषण करने वाले को कम से कम 3 साल की सजा दी जाएगी, जो 5 साल तक हो सकती है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
   

जबकि POCSO एक्ट की धारा 8 के तहत, यौन शोषण करने वाले को कम से कम 3 साल की सजा दी जाएगी, जो 5 साल तक हो सकती है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

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2. बच्चों के साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग

WB कानून: नए विधेयक के अनुसार, बच्चे के साक्ष्यों को 7 दिन के भीतर रिकॉर्ड किया जाएगा, जबकि POCSO में यह समय सीमा 30 दिन है.

POCSO के तहत, बच्चे के साक्ष्यों को विशेष अदालत द्वारा अपराध की जानकारी प्राप्त करने के 30 दिन के भीतर रिकॉर्ड किया जाना चाहिए. यदि कोई विलंब होता है, तो इसके कारणों को अदालत को दर्ज करना होगा.

बच्चों के साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग (WB) बच्चों के साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग (POCSO)
बच्चे के साक्ष्यों को 7 दिन के भीतर रिकॉर्ड किया जाएगा. POCSO में यह समय सीमा 30 दिन है.
   

3. मुकदमे की प्रक्रिया

पश्चिम बंगाल के नए कानून के तहत विशेष अदालत को मुकदमा 30 दिन के भीतर समाप्त करना होगा.

POCSO: विशेष अदालत को मुकदमे को अपराध की जानकारी प्राप्त करने के दिन से एक साल के भीतर समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए.

मुकदमे की प्रक्रिया (WB) मुकदमे की प्रक्रिया (POCSO)
नए कानून के तहत विशेष अदालत को मुकदमा 30 दिन के भीतर समाप्त करना होगा. विशेष अदालत को मुकदमे को अपराध की जानकारी प्राप्त करने के दिन से एक साल के भीतर समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए.
   

4. गंभीर यौन शोषण के लिए सजा में वृद्धि

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WB कानून: नए कानून के तहत, गंभीर यौन शोषण के लिए न्यूनतम सजा 5 साल से बढ़ाकर 7 साल कर दी गई है.

POCSO: POCSO की धारा 10 के अनुसार, जो कोई गंभीर यौन शोषण करता है, उसे कम से कम 5 साल की सजा और अधिकतम 7 साल की सजा दी जाएगी, और जुर्माना भी लगाया जाएगा.

गंभीर यौन शोषण के लिए सजा में वृद्धि (WB)  POCSO में क्या है प्रावधान
गंभीर यौन शोषण के लिए न्यूनतम सजा 5 साल से बढ़ाकर 7 साल कर दी गई है. कम से कम 5 साल की सजा और अधिकतम 7 साल की सजा दी जाएगी, और जुर्माना भी लगाया जाएगा.
   

5. गंभीर पेनिट्रेटिव यौन शोषण के लिए सजा

WB कानून: नए विधेयक के अनुसार, गंभीर पेनिट्रेटिव यौन शोषण के लिए जीवन की कठोर सजा दी जाएगी, जिसका मतलब है व्यक्ति की शेष जीवन की कठोर सजा और जुर्माना, या मृत्यु की सजा.

POCSO के तहत, गंभीर पेनिट्रेटिव यौन शोषण के लिए 20 साल से जीवन की कठोर सजा तक हो सकती है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है, या मृत्यु की सजा.

गंभीर पेनिट्रेटिव यौन शोषण के लिए (WB) गंभीर पेनिट्रेटिव यौन शोषण के लिए (POCSO)
जीवन की कठोर सजा दी जाएगी, जिसका मतलब है व्यक्ति की शेष जीवन की कठोर सजा और जुर्माना, या मृत्यु की सजा. 20 साल से जीवन की कठोर सजा तक हो सकती है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है, या मृत्यु की सजा.

6. जुर्माना

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WB कानून: नए विधेयक में पीड़ित या उनके परिजनों को मुआवजा देने के लिए जुर्माना निर्धारित करने का प्रावधान है, जिसे विशेष अदालत द्वारा तय किया जाएगा.

POCSO के तहत, जुर्माना उचित और पर्याप्त होना चाहिए ताकि पीड़ित के चिकित्सा खर्च और पुनर्वास को पूरा किया जा सके.

जुर्माना (WB) जुर्माना (POCSO
पीड़ित या उनके परिजनों को मुआवजा देने के लिए जुर्माना निर्धारित करने का प्रावधान है, जिसे विशेष अदालत द्वारा तय किया जाएगा. POCSO के तहत, जुर्माना उचित और पर्याप्त होना चाहिए ताकि पीड़ित के चिकित्सा खर्च और पुनर्वास को पूरा किया जा सके.

7. 16 साल से कम उम्र के बच्चे पर पेनिट्रेटिव यौन शोषण की सजा

WB कानून: नए विधेयक के अनुसार, 16 साल से कम उम्र के बच्चे पर पेनिट्रेटिव यौन शोषण के लिए जीवन की कठोर सजा दी जाएगी, जिसका मतलब है व्यक्ति की शेष जीवन की कठोर सजा और जुर्माना, या मृत्यु की सजा.

POCSO के तहत, 16 साल से कम उम्र के बच्चे पर पेनिट्रेटिव यौन शोषण के लिए 20 साल से लेकर जीवन की सजा तक हो सकती है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

16 साल से कम उम्र के बच्चे पर पेनिट्रेटिव यौन शोषण की सजा (WB) 16 साल से कम उम्र के बच्चे पर पेनिट्रेटिव यौन शोषण की सजा (POCSO)
जीवन की कठोर सजा दी जाएगी, जिसका मतलब है व्यक्ति की शेष जीवन की कठोर सजा और जुर्माना, या मृत्यु की सजा. 20 साल से लेकर जीवन की सजा तक हो सकती है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

जानें पश्चिम बंगाल में पारित हुए विधेयक की अहम बातें

इस विधेयक के अनुसार, महिलाओं के उत्पीड़न और बलात्कार के मामलों में कठोरतम सजा दी जाएगी. पोक्सो अधिनियम के प्रावधानों को और कड़ा किया गया है. बलात्कारियों के कृत्यों के परिणामस्वरूप पीड़िता की मृत्यु हो जाती है या उसे गंभीर मस्तिष्क क्षति होती है तो रेपिस्ट के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है. विधेयक के तहत अपराजिता टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जिसमें प्रारंभिक रिपोर्ट के 21 दिनों के भीतर सजा दी जाएगी.नर्सों और महिला डॉक्टरों के आवाजाही वाले मार्गों को कवर किया जाएगा. इसके लिए राज्य सरकार ने 120 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे.'रात्रि साथी' का भी प्रावधान किया है, जिसके तहत महिलाएं 12 घंटे ड्यूटी करेंगी और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अपनी ड्यूटी बढ़ाएंगे. रात में काम करने वाली महिलाओं को पूरी सुरक्षा दी जाएगी.

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