वक्फ बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, बिहार के कांग्रेस सांसद ने दायर की याचिका

वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पास हो गया है. इसी बीच कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. उन्होंने इसे चुनौती देते हुए न्यायालय में याचिका दायर की है.

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वक्फ संशोधन बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है वक्फ संशोधन बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है

संजय शर्मा / नलिनी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 4:48 PM IST

वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पास हो गया है. इसी बीच कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. उन्होंने विधेयक को चुनौती देते हुए न्यायालय में याचिका दायर की है. मोहम्मद जावेद बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद हैं. मोहम्मद जावेद वक्फ को लेकर बनीं जेपीसी के सदस्य भी रहे हैं.

याचिका में कहा गया है कि ये बिल मुसलमानों के अधिकारों के साथ भेदभाव करने वाला है. इसके साथ ही ये संशोधन विधेयक संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत समानता के अधिकार, अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धर्म और धार्मिक गतिविधियों के पालन और प्रबंधन का अधिकार, अनुच्छेद 29 में दिए गए अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा का हनन करता है.

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याचिका में ये भी कहा गया है कि वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद की संरचना में संशोधन कर वक्फ प्रशासनिक निकायों में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है. ऐसा करना धार्मिक शासन में अनुचित हस्तक्षेप है. इसके विपरीत हिंदू धार्मिक न्यास विभिन्न राज्य अधिनियमों के तहत और विशेष रूप से हिंदुओं द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं. कांग्रेस सांसद जावेद ने अपनी अर्जी में कहा कि यह चयनात्मक हस्तक्षेप, अन्य धार्मिक संस्थानों पर समान शर्तें लगाए बिना किया गया है. लिहाजा ये एकतरफा और मनमाना वर्गीकरण है, ये अनुच्छेद 14 और 15 का सीधा-सीधा उल्लंघन है.

कई शहरों में वक्फ संशोधन बिल का विरोध

संसद के दोनों सदनों से वक्फ संशोधन विधेयक पर मुहर लगने के साथ ही विपक्षी पार्टियों में आक्रोश है. कांग्रेस के अलावा अभिनेता-राजनेता विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम ने चेन्नई में वक्फ विधेयक के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन किया और इसे वापस लेने की मांग की. 

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टीवीके ने की नारेबाजी

पीटीआई के मुताबिक टीवीके महासचिव एन आनंद के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक के खिलाफ नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि केंद्र को वक्फ संपत्तियों से संबंधित मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और विधेयक के पारित होने से केंद्र सरकार "वक्फ संपत्तियों के लिए खतरा" बन गई है. प्रदर्शनकारियों ने 'अल्पसंख्यकों के साथ विश्वासघात न करें' सरीखे नारे लगाए. मदुरै, कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, थूथुकुडी और तंजावुर में टीवीके ने विरोध प्रदर्शन किया. विजय ने भी वक्फ विधेयक को लोकतंत्र विरोधी करार दिया और मांग की कि इसे वापस लिया जाए. उन्होंने कहा कि अगर ये मांग पूरी नहीं हुई, तो उनकी पार्टी मुसलमानों के साथ मिलकर उनके "वक्फ अधिकारों के कानूनी संघर्ष" में शामिल होगी.

कोलकाता में अल्पसंख्यक समुदाय का प्रदर्शन

उधर, अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने कोलकाता के पार्क सर्कस क्रॉसिंग पर विरोध प्रदर्शन किया और वक्फ (संशोधन) विधेयक-2025 को तत्काल वापस लेने की मांग की. इसके विरोध में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे, जिसमें कई अल्पसंख्यक संगठन भी शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह विधेयक देश को विभाजित करने की भाजपा की चाल है. उन्होंने बहुमत के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विधेयक पारित किया है. हम इस तानाशाही दृष्टिकोण का विरोध करते हैं. यह न केवल मुस्लिम संपत्तियों को जब्त करने का प्रयास है, बल्कि हमें बदनाम करने का भी प्रयास है.

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