तूतीकोरिन में फिलहाल बंद रहेगा वेदांता का स्टरलाइट कॉपर प्लांट- सुप्रीम कोर्ट

सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट और वैधानिक प्राधिकारी स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टिंग प्लांट की कई खामियों पर ध्यान देने में सही थे. प्लांट को बंद करने के आदेश में कोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है.

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भारत का सर्वोच्च न्यायालय (फाइल फोटो) भारत का सर्वोच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

सृष्टि ओझा / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 29 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 11:17 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता का स्टरलाइट कॉपर प्लांट फिलहाल बंद रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने तूतीकोरिन में वेदांत समूह के तांबा गलाने वाले संयंत्र को बंद करने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को बरकरार रखा है. राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह संयंत्र वायु और जल प्रदूषण कानूनों का उल्लंघन करता है. कोर्ट ने कहा कि सरकार शहर के निवासियों के स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए बाध्य है.

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सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट और वैधानिक प्राधिकारी स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टिंग प्लांट की कई खामियों पर ध्यान देने में सही थे. प्लांट को बंद करने के आदेश में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने प्लांट को फिर से खोलने की मांग वाली वेंदाता की अर्जी खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस प्लांट के जरिए बार-बार पर्यावरण नियमों का उल्लंघन हुआ. कोर्ट ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा जरूरी है. कोर्ट को इस प्लांट को बंद करने के हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई औचित्य नहीं लगता. 

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता के स्टरलाइट कॉपर प्लांट को फिर से खोलने की अर्जी पर सुनवाई के दौरान कहा था कि उसे आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी व्यापक चिंताओं का अंदाजा है. कोर्ट ने कहा था कि उसे यह भी देखना होगा कि फैक्ट्री खुलने का लोगों की सेहत पर क्या असर होगा. 

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आपको बता दें कि यह मामला 2018 का है. तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्थानीय लोगों के भारी विरोध के बाद स्टरलाइट प्लांट को बंद करने का आदेश दिया था. स्टरलाइट प्लांट पर गंभीर प्रदूषण पैदा करने और इससे गंभीर बीमारियां फैलने की बात कही गई थी. बाद में तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के फैसले को अगस्त 2020 में मद्रास हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा. जिसके बाद कंपनी ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

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