यूपी वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की एंट्री का समर्थन, दानिश अंसारी बोले- MP मॉडल सही

उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने योजना बनाई गई है. यूपी सरकार के मंत्री ने इसका ऐलान किया है. इसके बाद सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है. सपा ने इसे ध्यान भटकाने की राजनीति बताया, जबकि मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

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MP वक्फ में दो गैर-मुस्लिम को शामिल किया गया है. (Photo- Screengrab) MP वक्फ में दो गैर-मुस्लिम को शामिल किया गया है. (Photo- Screengrab)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:14 PM IST

उत्तर प्रदेश में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन की चर्चा तेज हो गई है. इसी बीच बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष दानिश अंसारी ने मध्य प्रदेश में लागू किए गए नए वक्फ बोर्ड मॉडल का समर्थन करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है.

दानिश अंसारी ने कहा कि वक्फ संशोधन अधिनियम का उद्देश्य केवल बोर्ड की संरचना बदलना नहीं, बल्कि वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है. उन्होंने कहा कि नए कानून के तहत बनने वाले वक्फ बोर्ड में पिछड़े और पसमांदा मुस्लिम समाज, महिलाओं और अन्य वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा. साथ ही दो गैर-मुस्लिम सदस्यों का नामांकन भी कानून का हिस्सा है.

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उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए प्रावधानों के अनुरूप मध्य प्रदेश में वक्फ बोर्ड का गठन किया गया है और अन्य राज्यों में भी इसी मॉडल पर बोर्ड गठित किए जाने का प्रस्ताव है. उनका कहना है कि इससे वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेगा.

दानिश अंसारी संशोधित वक्फ के हिमायती

दानिश अंसारी इससे पहले भी कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन कानून का मकसद वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण, ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार करना, अवैध कब्जों को हटाना, दस्तावेजों को व्यवस्थित करना और नियमित ऑडिट के जरिए इन संपत्तियों से होने वाली आय बढ़ाना है.

समाजवादी पार्टी के नेताओं ने किया विरोध

वहीं समाजवादी पार्टी ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है. सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि बीजेपी असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का मुद्दा उठा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रही है.

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गौरतलब है कि मध्य प्रदेश वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला पहला राज्य बन चुका है. वहां 10 सदस्यीय बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है. अब उत्तर प्रदेश में भी इसी तर्ज पर नए वक्फ बोर्ड के गठन की संभावना पर विचार किया जा रहा है. फिलहाल सरकार की ओर से अंतिम फैसला आना बाकी है.

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