यूनिटेक मामला: ...जब सुप्रीम कोर्ट में वकील विकास सिंह की भाषा पर भड़के जज, सिखाया सलीका

जस्टिस धनंजय चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने सुनवाई के दौरान चंद्रा के वकील विकास सिंह के जोर जोर से अपनी दलीलें देने पर भी नाराजगी जताई. विकास सिंह जांच रिपोर्ट की प्रति अपने मुवक्किलों को न दिए जाने से नाराज थे. 

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सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो)

अनीषा माथुर / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 06 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 7:06 PM IST
  • कोर्ट में अपनी बात रखने का तरीका है?- विकास सिंह से SC
  • जांच रिपोर्ट की प्रति अपने मुवक्किलों को न दिए जाने से नाराज थे विकास सिंह

यूनिटेक मामले में यूनिटेक के प्रमोटरों संजय चंद्रा और अजय चंद्रा से मिलीभगत करने पर तिहाड़ जेल के अफसरों पर गाज गिरी है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना की रिपोर्ट में नामित तिहाड़ जेल के अफसरों को निलंबित करने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अफसरों के खिलाफ जांच करने के भी आदेश जारी किए हैं. जेल से कामकाज चलाने में मदद करने के मामले पर कार्रवाई  हुई है.

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जस्टिस धनंजय चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने सुनवाई के दौरान चंद्रा के वकील विकास सिंह के जोर-जोर से अपनी दलीलें देने पर भी नाराजगी जताई. विकास सिंह, जांच रिपोर्ट की प्रति अपने मुवक्किलों को न दिए जाने से नाराज थे. कोर्ट ने फिर उनको नियमों के हवाले से बताया कि जब तक जांच पूरी नहीं होगी, कायदे से आपके साथ रिपोर्ट शेयर नहीं की जा सकेगी. विकास सिंह का कहना था कि देश के कानून के मुताबिक आरोप और दोष सिद्ध न होने तक कोई भी नागरिक निर्दोष ही होता है. कोर्ट ने अपने आदेश में इस मामले से संबंधित सभी रिपोर्ट्स सीलबंद लिफाफों में ही अदालत को सौंपने का आदेश दिया है.

यूनिटेक मामले में वर्चुअल सुनवाई के दौरान माहौल अचानक गरम हो गया. चंद्रा बंधुओं की पैरवी करते हुए सीनियर वकील विकास सिंह अचानक एजेंसियों पर आरोप लगाने लगे और उनकी आवाज भी तेज होती गई. विकास सिंह ने चंद्रा परिवार की ओर से गुस्से में कहा कि कोर्ट कितनी कंपनियां चलाएगा? कोर्ट आम्रपाली चला रहा है, सुपरटेक चला रहा है, यूनिटेक में भी हाथ डाल रखा है. मेरे पिता और पत्नी को भी गिरफ्तार किया है. मेरे बच्चों की भी सलाखों के पीछे डाल दीजिए. 

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कोर्ट में भेदभाव की वजह से हमारी कम्पनी के एक लाख यूनिट बेच चुके हैं. आखिर आम्रपाली मामले में भी तो कोर्ट ने घर खरीदारों को बकाया देने को कहा था. हमारे मामले में ऐसा ही क्यों नहीं किया कोर्ट ने? ये सब बोलते हुए ऐसा लगा कि विकास सिंह ने अपना आपा खो दिया हो.

इस पर कोर्ट ने उनको टोका. जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपना मास्क हटा लिया और लगभग डांटते हुए विकास सिंह को अपनी दलीलें बंद करने को कहा. जस्टिस चंद्रचूड़ ने तीन बार कड़क आवाज में कहा, मिस्टर सिंह सुनिए. लिसन टू मी! लिसन टू मी! लेकिन सिंह नहीं रुके और लगातार बोलते रहे.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने गुस्से में चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि आप कोर्ट पर इल्जाम लगा रहे हैं और आपकी भाषा क्या है?  ये कोर्ट में अपनी बात रखने का तरीका है? आपको पता है इसका परिणाम आपके पछतावे के रूप में भी हो सकता है.  कोर्ट में अगर आप इस तरह बहस करेंगे तो भविष्य में कोर्ट के आदेश पर आपको पछताना होगा. इसी बीच जस्टिस शाह ने भी कहा कि अपनी आवाज ऊंची ना करें. हमें आपसे इस तरह के बर्ताव की उम्मीद नहीं थी.

यूनिटेक प्रमोटरों और तिहाड़ अफसरों की मुश्किलें और बढ़ीं 

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को चंद्रा बंधुओं और तिहाड़ अफसरों के गठजोड़ पर नई FIR दर्ज करने की इजाजत दी है. आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत FIR  दर्ज होगी. दिल्ली पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट पर कोर्ट ने हरी झंडी दी है. मामले में SFIO और ED की जांच भी चलती रहेगी. कोर्ट नेे आरोपियों को रिपोर्ट की कॉपी देने से इनकार किया है. अदालत ने राकेश अस्थाना को अपनी रिपोर्ट सील कवर में गृह मंत्रालय को सौंपने को कहा है.

 

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