CBI की 'टनल व्यू' तकनीक क्या है? जिससे ट्विशा के आखिरी पलों की मिनट-टू-मिनट मैपिंग होगी

ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI ने एडवांस ‘टनल व्यू’ तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है. एजेंसी CCTV, मोबाइल डेटा, वाई-फाई लॉग्स और फॉरेंसिक मैपिंग के जरिए ट्विशा के आखिरी घंटों की डिजिटल तस्वीर तैयार कर रही है. इस बीच मामले में सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि समर्थ सिंह पहले से CBI की गिरफ्त में है.

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विशा की मौत की रात को डिजिटल तरीके से दोबारा तैयार कर रही CBI (Photo: ITG) विशा की मौत की रात को डिजिटल तरीके से दोबारा तैयार कर रही CBI (Photo: ITG)

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल, मध्य प्रदेश,
  • 28 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:29 PM IST

ट्विशा शर्मा की मौत मामले में गुरुवार को सीबीआई ने आखिरकार सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. बेटा समर्थ सिंह पहले से ही सीबीआई की गिरफ्त में है. लेकिन ट्विशा की मौत की गुत्थी अभी भी अनसुलझी है. इस बीच सीबीआई ‘टनल व्यू’ तकनीक के जरिए यह समझने की कोशिश कर रही है कि 12 मई को किन परिस्थितियों में ट्विशा की मौत हुई होगी.

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सीबीआई ने ट्विशा के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में उसके आखिरी घंटों को वर्चुअली दोबारा तैयार करने के लिए एडवांस 'टनल व्यू' जांच तकनीक का इस्तेमाल किया है. दरअसल, सीबीआई एक बेहद फोकस्ड मिनट-टू-मिनट टाइमलाइन तैयार कर रही है, जिसमें ट्विशा की मौत से पहले की हर मूवमेंट, बातचीत और डिजिटल एक्टिविटी को बारीकी से जोड़ा जा रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, जांचकर्ता सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन डेटा, वाई-फाई लॉग्स, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और कमरों की फॉरेंसिक मैपिंग को मिलाकर घर की एक वर्चुअल तस्वीर तैयार कर रहे हैं. इस डिजिटल रिकंस्ट्रक्शन के जरिए सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि ट्विशा आखिरी बार किन-किन जगहों पर गईं, कौन लोग घर के अलग-अलग हिस्सों में आए या बाहर गए और घटना से पहले घटनाक्रम किस क्रम में हुआ.

यह भी पढ़ें: ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह गिरफ्तार, CBI ने करीब 6 घंटे की पूछताछ

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'टनल व्यू' एनालिसिस के जरिए जांचकर्ता महत्वपूर्ण टाइम गैप, संदिग्ध गतिविधियों और बयानों में संभावित विरोधाभासों पर ध्यान दे सकेंगे. बताया जा रहा है कि कैमरों की टाइमस्टैम्प, फोन एक्टिविटी और इंटरनेट इस्तेमाल के डेटा को सिंक्रोनाइज कर अंतिम घंटों की एक सिम्युलेटेड तस्वीर तैयार की जाएगी. जांच एजेंसियां यह भी जांच सकती हैं कि घटना के बाद किसी डिजिटल सबूत के साथ छेड़छाड़, उसे डिलीट या छिपाने की कोशिश तो नहीं की गई.

इस वर्चुअल वातावरण के जरिए सीबीआई ट्विशा के आखिरी पलों की स्पष्ट डिजिटल तस्वीर तैयार करना चाहती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ट्विशा की मौत वाली रात किसी तरह का दबाव, साजिश या घटनास्थल से छेड़छाड़ की कोशिश हुई थी या नहीं.

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