ट्विशा केस की जांच CBI ने संभाली... वो 7 सवाल जिनके जवाब मिलने अब तक बाकी, क्या गिरिबाला सिंह की होगी गिरफ्तारी

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सोमवार को FIR दर्ज कर जांच अपने हाथों में ले ली है. एजेंसी की एक विशेष क्राइम यूनिट ने जरूरी दस्तावेज और सूबत एकत्र करने के लिए तुरंत भोपाल का रुख किया है, ताकि 12 मई को कटारा हिल्स स्थित ससुराल में फंदे से लटकी मिली 33 वर्षीय ट्विशा की मौत के पीछे की असली वजह का पता लगाया जा सके.

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CBI ने अपने हाथ में ली ट्विशा मौत मामले की जांच. (File Photo) CBI ने अपने हाथ में ली ट्विशा मौत मामले की जांच. (File Photo)

aajtak.in

  • भोपाल,
  • 26 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:02 AM IST

भोपाल में 12 मई को अपनी ससुराल में फंदे से झूलती हुई मिली ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच की कमान संभाल ली है. सोमवार को CBI ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली और राज्य पुलिस से जांच अपने हाथ में ले ली. इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान संभालते हुए सीबीआई अब उन 7 मुख्य अनसुलझे सवालों के जवाब तलाशेगी, जिनमें मौत का असली कारण, शरीर पर चोट के निशान, अंतिम समय की परिस्थितियां और गिरिबाला द्वारा जांच को प्रभावित करने के गंभीर आरोप शामिल हैं.

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CBI की स्पेशल क्राइम यूनिट ने सोमवार को भोपाल पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है. एजेंसी ने राज्य पुलिस द्वारा पहले दर्ज FIR को फिर से दर्ज कर लिया है. इसमें ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया है. CBI ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85, 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं को भी मामले में शामिल किया है.

दर्ज एफआईआर के अनुसार, घटना की रात ट्विशा ने 9 बजकर 41 मिनट पर अपनी मां से फोन पर बात की थी. उस बातचीत के दौरान पृष्ठभूमि में उनके पति समर्थ सिंह के चिल्लाने की आवाज साफ सुनी गई थी और फिर फोन अचानक कट गया. इसके बाद जब परिवार ने बार-बार फोन किया तो सास गिरिबाला सिंह ने फोन उठाकर सिर्फ इतना कहा कि वह अब दुनिया में नहीं रही और कॉल काट दी. अब सीबीआई को इस आखिरी वक्त के घटनाक्रम और झगड़े के मुख्य कारण का सच पता लगाना है.

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शरीर पर मिले चोट के निशान

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सबसे बड़ा सवाल उनके शरीर पर मिले जख्मों को लेकर है. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ये साफ कहा गया है कि मौत का कारण फंदे से लटकने (हैंगिंग) की वजह से हुआ है, लेकिन इसके साथ ही उनके शरीर के अन्य हिस्सों पर 'कई चोटों के निशान' भी पाए गए हैं. जो मौत से पहले लगी थीं. रिपोर्ट के मुताबिक ये चोटें किसी भोथरी चीज या भारी दबाव (ब्लंट फोर्स) के कारण लगी हो सकती हैं, जो गहरी साजिश की ओर इशारा करती हैं.

ट्विशा के परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

ट्विशा के परिवार वालों ने पुलिस को दिए अपने बयानों में आरोप लगाया है कि 9 दिसंबर 2025 को हुई शादी के बाद से ही ससुराल वाले दिए गए दहेज से संतुष्ट नहीं थे. इसी वजह से 33 वर्षीय ट्विशा को लगातार मानसिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का शिकार बनाया जा रहा था, जिससे तंग आकर उन्हें ये आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा. परिवार का आरोप है कि पैसों के अवैध लेन-देन के चलते भी विवाद चल रहा था.

क्या जांच को प्रभावित कर रही हैं गिरिबाला?

मामले में सबसे बड़ा सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह अपने रसूख का इस्तेमाल कर जांच में बाधा डाल रही थीं और क्या इस काम में उनकी कोई मदद कर रहा था. पुलिस एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही वो लगातार विभिन्न टीवी चैनलों को इंटरव्यू दे रही हैं, जिसमें उन्होंने ट्विशा के कथित इलाज और उनकी मानसिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसे पीड़ित पक्ष ने जांच भटकाने की कोशिश बताया है.

घटना वाले दिन ट्विशा के पति समर्थ उन्हें रात 10 बजकर 20 मिनट पर एम्स (AIIMS) भोपाल लेकर पहुंचे थे, जहां एम्स के डॉक्टरों 13 मई को रात 12 बजकर 5 मिनट पर उन्हें मृत घोषित (ब्रॉट डेड) कर पुलिस को सूचित किया कि उसे मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था और पीएमएलसी (प्राइवेट मेलिंग ट्रायल) दर्ज की गई थी. इसके बाद भोपाल पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में पूरे दो दिन की देरी की और 15 मई को मामला दर्ज किया. सीबीआई अब इस पूरी प्रक्रिया और इसमें शामिल संदिग्धों की भूमिका की बारीकी से जांच करेगी.

इन सवालों के जवाब खोजेगी CBI

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  • ट्विशा की मौत कैसे हुई?  
  • शरीर पर मिले चोटों के निशान कैसे और किसके द्वारा लगे?  
  • मौत से ठीक पहले क्या-क्या हुआ?  
  • क्या गिरिबाला जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं?  
  • मामले में और कौन-कौन लोग मदद कर रहे थे?  
  • परिवार में झगड़े का क्या कारण था?  
  • दहेज और पैसे के लेन-देन के आरोपों में कितनी सच्चाई है?

सार्वजनिक रूप से न दें बयान

वहीं, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा मौत मामले से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि वे एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करेंगे. शीर्ष अदालत ने कहा कि हम पीड़ित और आरोपी दोनों के परिवार वालों से ये अपील करना चाहेंगे कि वह सार्वजनिक रूप से या मीडिया के सामने बयान देने के बजाय, जांच एजेंसी के समक्ष अपना पक्ष दर्ज कराएं, ताकि चल रही जांच निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया पर कोई बुरा असर न पड़े.

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