राशन की दुकानों से मिलेंगे सैनिटरी पैड? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की राशन दुकानों के माध्यम से महिलाओं को सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने की जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है.

Advertisement
सैनिटरी पैड को राशन दुकानों के जरिये महिलाओं को उपलब्ध कराने की जनहित याचिका दायर की गई है (Photo - Pexels) सैनिटरी पैड को राशन दुकानों के जरिये महिलाओं को उपलब्ध कराने की जनहित याचिका दायर की गई है (Photo - Pexels)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:41 PM IST

देशभर की राशन दुकानों के जरिए महिलाओं को सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है. अदालत ने सभी पक्षों से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है. याचिका में कहा गया है कि सरकार ने सैनिटरी पैड को सस्ता तो बना दिया है, लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि इसे देश की हर महिला, खासकर गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं तक आसानी से पहुंचाया जाए.

Advertisement

यह जनहित याचिका सरोज बाला, ज्योति अग्रवाल, संजीवनी अग्रवाल, स्वराज स्वरूप और प्रदीप शेखावत ने दाखिल की है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों पर सैनिटरी पैड केवल एक रुपये प्रति पैड की दर से उपलब्ध हैं. हालांकि, पूरे देश में जन औषधि केंद्रों की संख्या करीब 19,294 है, जबकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत 4.8 लाख से अधिक उचित मूल्य की राशन दुकानें संचालित हो रही हैं. ऐसे में राशन दुकानों के विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल महिलाओं तक सैनिटरी पैड पहुंचाने के लिए किया जा सकता है.

याचिका में सुझाव दिया गया है कि राशन दुकानों के माध्यम से महिलाओं को सैनिटरी पैड या तो निःशुल्क दिए जाएं या फिर प्रत्येक परिवार के लिए एक निश्चित मासिक कोटा तय किया जाए. इससे न केवल महिलाओं को सस्ती दर पर जरूरी स्वच्छता उत्पाद उपलब्ध होंगे, बल्कि मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी.

Advertisement

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि आज भी देश के कई गरीब और ग्रामीण परिवारों की महिलाओं तथा किशोरियों के लिए हर महीने सैनिटरी पैड खरीदना आर्थिक रूप से कठिन होता है. मजबूरी में वे असुरक्षित और अस्वच्छ विकल्पों का इस्तेमाल करती हैं, जिससे संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. उनका कहना है कि मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता की कमी और सस्ते स्वच्छता उत्पादों की सीमित उपलब्धता महिलाओं के स्वास्थ्य और गरिमा दोनों को प्रभावित करती है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली देश के सबसे बड़े और सबसे व्यापक सरकारी नेटवर्क में से एक है. लगभग हर गांव और कस्बे तक राशन की दुकानें पहुंची हुई हैं. यदि इसी नेटवर्क के माध्यम से सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं तो करोड़ों महिलाओं तक इनकी आसान पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है. इससे सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता संबंधी योजनाओं को भी मजबूती मिलेगी.

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को महिलाओं और किशोरियों के सम्मानजनक जीवन तथा शिक्षा के अधिकार का हिस्सा माना था. इसी वर्ष जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को मुफ्त ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएं. साथ ही स्कूलों में कार्यशील और अलग-अलग लड़कियों के लिए शौचालय सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए थे.

Advertisement

उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि लड़कियों को मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं तो इससे उनकी गरिमा प्रभावित होती है और उनकी शिक्षा में भी बाधा आती है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि सुरक्षित, प्रभावी और किफायती मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों तक पहुंच संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है.

अब दाखिल की गई नई जनहित याचिका का उद्देश्य इस सुविधा को केवल स्कूलों तक सीमित रखने के बजाय देश की सभी महिलाओं तक पहुंचाना है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि राशन दुकानों के जरिए सैनिटरी पैड का वितरण शुरू किया जाता है तो इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को सबसे अधिक लाभ मिलेगा और मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर सरकार के प्रयासों को भी नई दिशा मिलेगी.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब सभी पक्षों के जवाब के आधार पर इस मामले में आगे की सुनवाई होगी. इस याचिका पर आने वाला फैसला देश में महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पर बड़ा असर डाल सकता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »