सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड चुनाव आयोग पर लगाया 2 लाख का जुर्माना, वोटर लिस्ट में डबल एंट्री को लेकर फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग की याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और आयोग पर 2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया. वहीं, कांग्रेस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 'वोट चोरी' का पर्दाफाश किया है और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्तारूढ़ भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहा है.

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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड चुनाव आयोग की याचिका खारिज की (File Photo: PTI) सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड चुनाव आयोग की याचिका खारिज की (File Photo: PTI)

सृष्टि ओझा / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 26 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 11:23 PM IST

सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग (SEC) की याचिका खारिज कर दी है. आयोग ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसका सर्कुलर रद्द कर दिया गया था. उस सर्कुलर के तहत कई मतदाता सूचियों में नाम होने के बावजूद उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति दी जा रही थी. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग पर 2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया. 

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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पहले ये फैसला सुनाया था कि SEC का स्पष्टीकरण उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 के खिलाफ है. कानून स्पष्ट करता है कि कोई व्यक्ति एक समय में एक से अधिक स्थानों पर मतदाता के रूप में नामांकित नहीं हो सकता. 
इसके बावजूद एसईसी का आदेश ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति देता था, जिस कारण यह कानूनी चुनौती का विषय बन गया.

इसके बाद राज्य चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य चुनाव आयोग की कड़ी फटकार लगाई और टिप्पणी की कि आप वैधानिक प्रावधानों के विपरीत निर्णय कैसे ले सकते हैं?

कांग्रेस का हमला

इस फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस ने भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला. X पर एक पोस्ट में कांग्रेस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 'वोट चोरी' का पर्दाफाश किया है और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्तारूढ़ भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहा है.

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कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने पहले नगर निगम चुनावों के दौरान मतदाताओं के नाम गांवों से शहरों में ट्रांसफर किए और फिर पंचायत चुनावों से पहले उन्हें वापस ग्राम सूची में जोड़ दिया. कांग्रेस के अनुसार जब इस रणनीति का विरोध हुआ तो भाजपा के कई सदस्य कई जगहों पर नए पंजीकरण करा बैठे, जिससे वे एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान के योग्य हो गए.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए 6 महीने के निवास नियम के उल्लंघन की बार-बार शिकायतों और रिमाइंडर्स के बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की और ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी. हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप कर कार्रवाई का आदेश दिया, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने इसे चुनौती दी. अब सर्वोच्च न्यायालय ने आयोग को कड़ी फटकार लगाई है.

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