गोहत्या पर बैन की मांग, SC बोला- बकरीद से एक दिन पहले याद आया?

बकरीद से ठीक पहले गोवंश वध निषेध कानूनों के तहत पशु वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई. CJI सूर्यकांत की पीठ ने इस मामले में किसी भी तरह की जल्दबाजी से साफ इनकार कर दिया है.

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बकरीद से पहले गौ-हत्या प्रतिबंध याचिका पर कोर्ट का सुनवाई से इनकार. (File photo: ITG) बकरीद से पहले गौ-हत्या प्रतिबंध याचिका पर कोर्ट का सुनवाई से इनकार. (File photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:10 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बकरीद (ईद-उल-अज्हा) से ठीक पहले गौ-हत्या (गायों) पर रोक लगाने और एंटी-काउ स्लॉटर कानूनों के सख्ती से कार्यान्वयन की मांग वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया. सीजेआई ने याचिकाकर्ता से कहा कि क्या आप ईद से ठीक एक दिन पहले पब्लिसिटी के लिए आए हैं?.

दरअसल, अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल ने अपने वकील के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की. जिसमें उन्होंने गाय और उसके बछड़ों को वध से बचाने के लिए वध-विरोधी कानूनों को लागू करने के निर्देश देने की मांग की. इसमें राज्य सरकारों को प्रत्येक राज्य में कानून के अनुसार स्लॉटर हाउस के विनियमन हेतु दिशानिर्देश अधिसूचित करने का निर्देश देने की भी मांग की थी. हालांकि, कोर्ट ने उनकी याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया. 

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याचिकाकर्ता ने वकील ने अदालत के समक्ष अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि परसों ही बकरीद का त्योहार है. ये याचिका देश में पहले से मौजूद गोवंश वध निषेध कानून को पूरी कड़ाई से लागू करने की मांग को लेकर दायर की गई है. वकील ने सीजेआई से अनुरोध किया कि यदि इस मामले को कल ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया जाए और यदि अदालत हमारी दलीलों से पूरी तरह आश्वस्त हो जाती है तो इस पर तुरंत अंतरिम आदेश पारित किए जा सकते हैं.

'पब्लिसिटी के लिए आए कोर्ट'

इस दलील पर तीखी टिप्पणी करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की मंशा पर सीधे सवाल उठाए. सीजेआई ने पूछा कि क्या आप ईद से ठीक एक दिन पहले केवल पब्लिसिटी (प्रचार) पाने के लिए अदालत में आए हैं? उन्होंने आगे कहा कि आपको ये महत्वपूर्ण विषय त्योहार से ठीक एक दिन पहले याद आया है, इसलिए इस मामले में अब कोई जल्दबाजी या तात्कालिकता नहीं बची है. कोर्ट ने सुनवाई टालते हुए कहा, धन्यवाद.

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