सुप्रीम कोर्ट ने कोर्टरूम में हंगामा करने, केस से जुड़े दस्तावेज हवा में उछालने और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है. हालांकि शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता के आचरण की कड़ी आलोचना करते हुए उसकी याचिका भी खारिज कर दी.
जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने अपने लिखित आदेश में कहा कि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपने मामले पर तर्क रखने के बजाय असंगत और अमर्यादित टिप्पणियां कीं. पीठ ने कहा, 'याचिकाकर्ता की स्थिति को देखते हुए हम उसके खिलाफ कोई कार्रवाई करना उचित नहीं समझते.'
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पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले के गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता. इसलिए याचिका को खारिज किया जाता है. सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्टरूम में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्रबल प्रताप ने खुद को श्रेष्ठ बताते हुए अदालत को निर्देश देने की कोशिश की. उसने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को उसके मामले में आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाए.
इसके बाद उसने अपनी केस फाइल के कागज हवा में उछाल दिए और भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया. उसके इस व्यवहार से नाराज पीठ ने याचिकाकर्ता को हिरासत में लेने का निर्देश दिया. आदेश के तुरंत बाद सादे कपड़ों में मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने प्रबल प्रताप काबू किया और उसे कोर्टरूम से बाहर ले गए. बाद में दिल्ली पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की. यह घटना शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे हुई, जो सुप्रीम कोर्ट में समर वेकेशन के दौरान चल रहे आंशिक कार्यदिवस का अंतिम दिन था. सुप्रीम कोर्ट में अब सोमवार से नियमित कामकाज फिर से शुरू होगा.
संजय शर्मा